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SEBI क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों, कस्टोडियंस को सेल्फ एटेस्टेड डॉक्युमेंट की इजाजत दे सकता है, जानिए क्या है इसका मतलब

SEBI ने 22 अगस्त को इस बारे में एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें कंपनी लॉ कमेटी की कई रिपोर्ट के हवाले से कई बातें बताई गई हैं। इसमें कहा गया है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए हलफनामा (affidavit) की जगह सेल्फ डेक्लेरेशन की इजाजत देने का प्रस्ताव है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 22, 2024 पर 6:26 PM
SEBI क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों, कस्टोडियंस को सेल्फ एटेस्टेड डॉक्युमेंट की इजाजत दे सकता है, जानिए क्या है इसका मतलब
SEBI के कंसल्टेशन पेपर पर इस 6 सितंबर, 2024 तक अपनी राय भेजी जा सकती है।

सेबी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों, कस्टोडियंस, नो योर क्लाइंट रजिस्ट्रेशन एजेंसी (केआरए), डिपॉजिटरीज और इंडेक्स प्रोवाइडर्स को सेल्फ-एटेस्टेड डॉक्युमेंट सब्मिट करने की इजाजत दे सकता है। मार्केट रेगुलेटर ने अभी इस बारे में प्रस्ताव पेश किया है। सेबी ने इस बारे में 22 अगस्त को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। बाजार नियामक कुछ दूसरे डॉक्युमेंट्स के सेल्फ एटेस्टेशन की इजाजत दे सकता है। इनमें टेकओवर रेगुलेशंस और बायबैक रेगुलेशंस से एग्जेम्प्शन के अप्लिकेशन शामिल हो सकते हैं। इस बारे सेबी को 6 सितंबर, 2024 तक अपनी राय भेजी जा सकती है।

सेबी ने कंपनी लॉ कमेटी की कई सिफारिशों का हवाला दिया है

कंसल्टेशन पेपर में कंपनी लॉ कमेटी की 21 मार्च, 2022 की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार ट्रस्ट-आधारित सिस्टम को बढ़ावा देना चाहती है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए हलफनामा (affidavit) की जगह सेल्फ डेक्लेरेशन की इजाजत देने का प्रस्ताव है। कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली, पंजाब और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों ने एफडेविट की जगह सेल्फ डेक्लेरेशन का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इससे सिटीजंस को पब्लिक सर्विसेज की डिलीवरी के लिए कानूनी प्रावधानों को बाहर रखा गया है।

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