Madhabi Puri Buch: शेयर बाजार धोखाधड़ी मामले में माधबी पुरी बुच को मिला SEBI का साथ, FIR दर्ज करने के आदेश को देगा चुनौती
Madhabi Puri Buch: महाराष्ट्र की विशेष अदालत ने शनिवार (1 मार्च) को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी ACB को शेयर बाजार में कथित धोखाधड़ी और रेगुलेटरी उल्लंघन के संबंध में सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया। सेबी इस आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती देगी
MoneyControl News
अपडेटेड Mar 02, 2025 पर 8:25 PM
Madhabi Puri Buch: सेबी ने कहा कि कोर्ट ने बोर्ड को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया है
Madhabi Puri Buch: सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने रविवार (2 मार्च) को कहा कि वह विशेष भ्रष्टाचार निरोधक (ACB) अदालत के उस आदेश को चुनौती देगा, जिसमें कथित शेयर बाजार धोखाधड़ी के संबंध में पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। सेबी ने तर्क दिया कि अदालत एक "तुच्छ" याचिका पर कार्रवाई कर रही है। उसने बोर्ड को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया है। मुंबई की एक अदालत ने एंटी-करप्शन ब्यूरो को माधबी पुरी बुच, तीन वर्तमान पूर्णकालिक सदस्यों और BSE के दो अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है।
विशेष अदालत ने शनिवार (1 मार्च) को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी ACB को शेयर बाजार में कथित धोखाधड़ी और रेगुलेटरी उल्लंघन के संबंध में सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है।
मुंबई स्थित विशेष एसीबी अदालत के जज शशिकांत एकनाथराव बांगर ने आदेश में कहा, "प्रथम दृष्टया रेगुलेटरी चूक और मिलीभगत के सबूत हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।" अदालत ने कहा कि वह जांच की निगरानी करेगा। साथ ही 30 दिनों के भीतर मामले की स्थिति रिपोर्ट मांगी गई है। अदालत ने आदेश में यह भी कहा है कि आरोपों से अपराध का पता चलता है, जिसके लिए जांच जरूरी है।
सेबी का बयान
कोर्ट के आदेश के बाद सेबी के रविवार को एक बयान में कहा गया, "आवेदक को एक तुच्छ और आदतन वादी के रूप में जाना जाता है, जिसके पिछले आवेदनों को कोर्ट ने खारिज कर दिया था। कुछ मामलों में लागत लगाई थी। सेबी इस आदेश को चुनौती देने के लिए उचित कानूनी कदम उठाएगा। सभी मामलों में उचित नियामक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
सेबी के बयान में कहा गया है, "भले ही ये अधिकारी प्रासंगिक समय पर अपने संबंधित पदों पर नहीं थे। लेकिन अदालत ने बिना कोई नोटिस जारी किए या सेबी को तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने का कोई अवसर दिए बिना आवेदन को अनुमति दे दी।"
अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सेबी ने बयान में कहा, "सेबी की पूर्व चेयरपर्सन, तीन वर्तमान पूर्णकालिक सदस्यों और बीएसई के दो अधिकारियों के खिलाफ एसीबी अदालत, मुंबई के समक्ष एक विविध आवेदन दायर किया गया था।"
सेबी ने कहा, "हालांकि, ये अधिकारी प्रासंगिक समय पर अपने संबंधित पदों पर नहीं थे। फिर भी अदालत ने बिना कोई नोटिस जारी किए या सेबी को तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने का कोई अवसर दिए बिना आवेदन को अनुमति दे दी।"
SEBI के बयान के अनुसार, "आवेदक को एक तुच्छ और आदतन मुकदमाकर्ता के रूप में जाना जाता है, जिसके पिछले आवेदनों को अदालत द्वारा खारिज कर दिया गया था। और कुछ मामलों में जुर्माना भी लगाया गया था।"
इन लोगों पर भी दर्ज होगा केस
पीटीआई के मुताबिक, बुच के अलावा जिन अन्य अधिकारियों के खिलाफ अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। उनमें बीएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) सुंदररामन राममूर्ति, इसके तत्कालीन चेयरमैन और जनहित निदेशक प्रमोद अग्रवाल और सेबी के तीन पूर्णकालिक सदस्य अश्विनी भाटिया, अनंत नारायण जी और कमलेश चंद्र वार्ष्णेय शामिल हैं।
शिकायतकर्ता सपन श्रीवास्तव एक मीडिया रिपोर्टर हैं। उसने कथित अपराधों की जांच की मांग की थी, जिसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी, रेग्यूलेटरी उल्लंघन और भ्रष्टाचार शामिल है।
क्या है आरोप?
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि सेबी के अधिकारी अपने वैधानिक कर्तव्य में विफल रहे, बाजार में हेरफेर को बढ़ावा दिया। साथ ही निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करने वाली कंपनी को सूचीबद्ध करने की अनुमति देकर कॉरपोरेट धोखाधड़ी के लिए रास्ता खोला।
शिकायतकर्ता ने कहा कि कई बार पुलिस स्टेशन और संबंधित नियामक निकायों से संपर्क करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। भारत की पहली महिला सेबी प्रमुख बुच पर अमेरिका स्थित शोध एवं निवेश कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने हितों के टकराव के आरोप लगाए थे। उसके बाद राजनीतिक तनाव के बीच बुच ने शुक्रवार को अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा किया।