स्टॉक मार्केट की चाल ने इनवेस्टर्स को कनफ्यूज कर दिया है। हालांकि, बीते हफ्ते मार्केट में गिरावट कम और तेजी ज्यादा आई। इसके बावजूद निवेशक मार्केट के रुख को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। उन्हें आगे गिरावट का डर सता रहा है। इस मार्केट को समझने के लिए मनीकंट्रोल ने स्टार हेल्थ एंड अलॉयड इंश्योरेंस कंपनी के अनीश श्रीवास्तव से बातचीत की। उनसे मार्केट की आगे की दिशा के बारे में पूछा। इंटरेस्ट रेट में कमी की संभावनाओं के बारे में भी पूछा। श्रीवास्तव ने कहा कि ग्लोबल इकोनॉमिक बैकड्रॉप काफी चैलेंजिंग है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से ट्रैरिफ वॉर शुरू होने की आशंका है। इससे फिर से इनफ्लेशन पर दबाव बढ़ सकता है।
आगे Sensex और Nifty की चाल कैसी रहेगी?
क्या हालिया गिरावट के बाद मार्केट (Stock Markets) के लिए मुश्किल खत्म हो गई है? इसके जवाब में श्रीवास्तव ने कहा कि निफ्टी कंपनियों की अर्निंग्स में सुस्ती देखने को मिली है। अर्निंग्स ग्रोथ (Earnings Growth) घटकर 4-5 फीसदी रह गई है। हालांकि, मार्केट्स की वैल्यूएशन (Valuation) अपेक्षाकृत ज्यादा है। यह अब भी 22 गुना के करीब है। इसके चलते वैल्यूएशन में थोड़ा करेक्शन आने के आसार हैं। ग्लोबल इकोनॉमिक इनवायरमेंट और डोमेस्टिक ग्रोथ की स्थिति को देखते हुए ऐसा लगता है कि शॉर्ट टर्म में स्टॉक मार्केट में गिरावट का रुख जारी रहेगा।
FY25 में जीडीपी ग्रोथ कितनी रह सकती है?
क्या जीडीपी ग्रोथ FY25 में 7 फीसदी से नीचे आ जाएगी। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी में हालात चुनौतीपूर्ण दिख रहे हैं। कई देशों में डिमांड कमजोर है। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अगर अमेरिका टैरिफ बढ़ाता है तो इससे इनफ्लेशन पर फिर से दबाव बढ़ सकता है। इससे इंटरेस्ट रेट्स भी लंबे समय तक हाई बने रह सकते हैं। इसके अलावा डॉलर मजबूत हो रहा है। विदेशी निवेशक इंडिया से पैसे निकाल रहे हैं। इन वजहों से शॉर्ट टर्म में RBI के इंटरेस्ट रेट में कमी करने की संभावना सीमित हो जाती है। इस वजह से FY25 में हमें इंडिया की ग्रोथ करीब 6.5 फीसदी रहने की उम्मीद है। यह लंबी अवधि में इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ की संभावनाओं के करीब है।
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क्या डॉलर के मुकाबले रुपये में ज्यादा गिरावट आने वाली है?
क्या डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 85-86 तक जा सकता है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि इंडिया का रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (REER) अभी 17.21 के करीब है। यह बताता है कि रुपये की वैल्यू सही लेवल पर है। हालांकि, एक्सपोर्ट में सुस्ती के आसार और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। उधर, अमेरिका और चीन में टैरिफ वॉर बढ़ने पर चीन की करेंसी Yuan में कमजोरी आ सकती है। इससे इंडिया सहित दूसरे उभरते मार्केट्स को डिवैल्यूएशन स्ट्रेटेजी अपनानी पड़ सकती है। ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपया की फेयर वैल्यू 85.5 के करीब रहने की उम्मीद है।