भारतीय शेयर बाजारों में अप्रैल में अच्छी रिकवरी आई है। लेकिन, प्रमुख सूचकांक अब भी मध्यपूर्व में लड़ाई से पहले के अपने स्तर से करीब 5 फीसदी नीचे हैं। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई शुरू हुई थी। उसके बाद भारतीय शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई।
सेंसेक्स, निफ्टी लड़ाई के पहले के लेवल से अभी 5% नीचे
सेंसेक्स 26 फरवरी को 82,250 प्वाइंट्स पर था। अप्रैल में रिकवरी के बावजूद यह इस लेवल से करीब 4,180 प्वाइंट्स नीचे है। निफ्टी 50 लड़ाई शुरू होने से पहले 25,500 अंक पर था। अभी यह इस लेवल से करीब 1,275 अंक नीचे है। इसका मतलब है कि दोनों ही सूचकांक लड़ाई से पहले के अपने स्तर से करीब 5 फीसदी नीचे हैं।
यूएस-ईरान की लड़ाई खत्म होने से अप्रैल में शानदार रिकवरी
अप्रैल में भारतीय शेयर बाजार में शानदार रिकवरी आई। इसकी वजह मध्यपूर्व में लड़ाई खत्म होने की उम्मीद है। 7 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के सीजफायर पर सहमति बनी। इसका अच्छा असर शेयर बाजारों पर पड़ा। हालांकि, पिछले हफ्ते पाकिस्तान में दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रही। लेकिन, बातचीत फिर से शुरू होने की उम्मीद से शेयर बाजारों में तेजी है। 13 और 14 अप्रैल को अमेरिकी शेयर बाजारों में अच्छी तेजी आई। 15 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजारों में भी उछाल दिखा।
दुनिया के कई दूसरे बाजार मध्यपूर्व की लड़ाई के असर से उबरे
दुनिया के दूसरे कई बाजार तो मध्यपूर्व की लड़ाई की वजह से आई गिरावट के असर से उबर चुके हैं। इनमें चीन का सीएसआई 300 इंडेक्स के साथ ही ताइवान और सिंगापुर के बाजार शामिल हैं। अमेरिका में भी एसएंडपी 500 भी लड़ाई के असर से उबर चुका है। यह अपने रिकॉर्ड हाई के करीब पहुंच चुका है। अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई खत्म होने की उम्मीद का असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है। क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई है। लड़ाई शुरू होने के बाद एक समय यह 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।
अनिश्चितता के बावजूद भारत दुनिया की बड़ी इकोनॉमीज में से एक
Abakkus Asset Manager के फाउंडर सुनील सिंघानिया ने अपने अप्रैल मार्केट आउटलुक में कहा है कि वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत बड़ी ताकतवर इकोनॉमीज में से एक है। इसकी बड़ी वजह स्ट्रॉन्ग घरेलू डिमांड, सरकार का पूंजीगत खर्च, मॉनेटरी पॉलिसी में नरमी कंपनियों की बेहतर होती बैलेंसशीट हैं। उन्होंने कहा कि शॉर्ट टर्म में एनर्जी की ऊंची कीमतों, सप्लाई चेन में बाधा और लॉजिस्टिक्स से जुड़े मसलों का असर कंपनियों की कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर पड़ सकता है।
वैल्यूएशन के लिहाज से भारतीय बाजारों का अट्रैक्शन बढ़ा
अब भारतीय शेयर बाजारों की वैल्यूएशन और अट्रैक्टिव हो गई है। निफ्टी का एक साल का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल मार्च में गिरकर 17.7 गुना पर आ गया। यह लंबी अवधि के अपने 20.9 गुना के औसत से करीब 15 फीसदी नीचे है। निफ्टी 50, निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 के फॉरवर्ड वैल्यूएशन मल्टीपल सितंबर 2024 के अपने पीक से क्रमश: 28 फीसदी, 29 फीसदी और 18 फीसदी नीचे हैं।
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