दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा बोले, "अदाणी मामले का भारत की ग्रोथ पर नहीं पड़ेगा असर, RBI का फैसला होगा बड़ा ट्रिगर"

महंगाई के असर को लेकर लोगों ने जो अनुमान लगाया था, यह उसके अधिक घातक साबित हुई है। ये कहना है अनुभवी निवेशक और जीक्वांट इनवेस्टेक (GQuant Investech) के फाउंडर शंकर शर्मा का। शंकर शर्मा ने दुबई में पीएमएस बाजार (PMS Bazaar) की ओर से आयोजित एक इनवेस्टमेंट समिट के दौरान मनीकंट्रोल को इंटरव्यू दिया। पेश है चुनिंदा अंश-

अपडेटेड Feb 27, 2023 पर 3:48 PM
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शंकर शर्मा, अनुभवी निवेशक और जीक्वांट इनवेस्टेक (GQuant Investech) के फाउंडर

महंगाई के असर को लेकर लोगों ने जो अनुमान लगाया था, यह उसके अधिक घातक साबित हुई है। ये कहना है अनुभवी निवेशक और जीक्वांट इनवेस्टेक (GQuant Investech) के फाउंडर शंकर शर्मा (Shankar Sharma) का। शंकर शर्मा ने दुबई में पीएमएस बाजार (PMS Bazaar) की ओर से आयोजित एक इनवेस्टमेंट समिट के दौरान मनीकंट्रोल को इंटरव्यू दिया। इस दौरान उन्होंने बाजार पर असर डालने वाले कारकों, हिंडनबर्ग रिपोर्ट के असर और भारतीय अर्थव्यवस्था पर जॉर्ज सोरोस के दिए बयान को लेकर बातचीत की। पेश है चुनिंदा अंश:

भारतीय बाजार पर असर डालना वाला अगला बड़ा कारक क्या होगा?

अगला बड़ा कारक आरबीआई के कड़े रुख में नरमी आने का कहा। क्योंकि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि ग्रामीण भारत के साथ-साथ शहरी भारत में भी कंज्यूमर मांग पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर है। अगर आप एशियन पेंट्स और ऐसी दूसरी कंज्यूमर कंपनियों आंकड़ें पर नजर डालें तो, ये भी आपको बता रहे हैं कि मांग में नरमी है। इसलिए मुझे लगता है कि अगली मॉनिटरी पॉलिसी बाजार के लिए एक बड़ा इवेंट हो सकती है, जब आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी को शायद विराम दें या अपने रुख में नरमी को लेकर पर्याप्त सबूत देगा।


ग्लोबल लेवल पर क्या मंहगाई आपको अभी भी एक चिंता का विषय लगता है?

हां यह काफी खिंचता हुआ मामला दिख रहा है, जो एक समस्या है। इसका एक कारण यह है कि रूस-यूक्रेन जंग जल्द समाप्त नहीं है। इसके चलते कीमतें एक अच्छे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी। इसके अलावा एक यह भी तथ्य है कि भारत सहित दुनिया भर के केंद्रीय बैंक इस मामले में देर से जगते हुए दिख हैं। वे कीमतों को स्थिर रखने पर कम और ग्रोथ पर अधिक फोकस थे और ये अब उन्हें नुकसान पहुंचा रहा है। लोगों ने जितना अनुमान लगाया था, महंगाई उससे कहीं अधिक दिक्कत देने वाली साबित हुई है।

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अर्थव्यवस्था की बात करें तो क्या आपको लगता है कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट और जॉर्ज सोरोस की टिप्पणी जैसी घटनाएं भारत की निवेश अपील पर असर डाल सकती है?

पहले इस मुद्दे को अलग करके देखते हैं। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट भारत पर नहीं है। यह एक कॉर्पोरेट समूह पर एक रिपोर्ट है। मुझे समझ नहीं आता कि लोग इन दोनों चीजों को एक साथ क्यों मिलाना शुरू कर देते हैं, जैसे कि भारत में कोई दूसरी कंपनी ही नहीं है। भारत में बड़ी कंपनियां हैं - टाटा समूह, बिड़ला समूह और अंबानी समूह। इसके अलावा और भी छोटे समूह हैं। आप कह रहे हैं कि एक कंपनी भारत की इन सभी कंपनियों के की सामूहिक प्रतिष्ठा के बराबर है? यह बिल्कुल हास्यास्पद है। साथ ही यह एक महान देश और भारत जैसे बड़े बाजार के साथ अन्याय है।

पिछले साल आपका आखिरी बुलिश दांव स्मॉल-कैप शेयरों पर था और हाल ही में इन शेयरों में तेजी भी देखी गई। क्या अब यह तेजी खत्म हो गई या अभी भी इनमें दमखम बाकी है?

याद रखें कि स्मॉल कैप शेयर आपको एक स्थिर कंपाउंडिंग [रिटर्न] नहीं देने वाले हैं, जैसा कि लार्ज कैप शेयरों में एक संभावना रहती है। यहां रिटर्न की एक सीमित अवधि होती है। लेकिन जब मैं स्मॉल-कैप आंकड़ों को देखता हूं, तो मैं कई कंपनियों को देखता हूं। जिन कंपनियों में मैंने निवेश किया है, मैं एक समूह के रूप में बहुत आशावादी हूं और निश्चित रूप से, आपको इन शेयरों को चुनने में काफी सावधानी बरतनी होती है। नए या अनुभवहीन निवेशकों के लिए यह एक खतरनाक सेगमेंट है। यह पैसे बनाने की आसान जगह नहीं है। यहां आपको कई धमाके इधर-उधर होते हुए दिखेंगे। लार्ज कैप में भी हमने ऐसे धमाके होते हुए देखे हैं। लेकिन स्मॉल कैप में इन धमाकों की संख्या काफी ज्यादा है।

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