शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप (एसपीजी) की कंपनियों के शेयरों को 15 सितंबर को बाजार खुलते ही पंख लग गए। इसकी वजह यह है कि आरबीआई ने टाटा संस के उस अप्लिकेशन को खारिज कर दिया है, जिसे कंपनी ने एनबीएफसी का अपना लाइसेंस सरेंडर करने की पेशकश की थी। अप्लिकेशन खारिज होने का मतलब यह है कि अब टाटा संस को खुद को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराना होगा। टाटा संस टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है।
गोकाक टेक्सटाइल्स के शेयरों में लगा अपर सर्किट
Afcons Infrastructure का शेयर एक समय 10 फीसदी तक चढ़ गया था। बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। 1 बजे यह शेयर 9.14 फीसदी चढ़कर 277 रुपये पर चल रहा था। Gokak Textiles का शेयर 10 फीसदी चढ़कर 64.35 रुपये पर पहुंच गया, जिसके बाद इसमें अपर सर्किट लग गया। Sterling and Wilson Renewable Energy का शेयर एक समय 186 रुपये पर पहुंच गया था। बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। 1 बजे यह 0.75 फीसदी चढ़कर 181.57 रुपये पर चल रहा था।
टाटा संस की लिस्टिंग से शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप को फायदा
टाटा संस की शेयर बाजारों में लिस्टिंग से शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप को फायदा होगा। इसकी वजह यह है कि इस ग्रुप की टाटा संस में 18 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है। 15 सितंबर को टाटा समूह की भी कई कंपनियों के शेयरों में उछाल दिखा। इसमें टाटा केमिकल, टाटा मोटर्स पीवी, टाटा इनवेस्टमेंट और टीसीएस शामिल हैं।
टाटा संस ने आरबीआई के पास 2024 में भेजा था अप्लिकेशन
टाटा संस ने अपना एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करने के लिए आरबीआई के पास 2024 में अप्लिकेशन दिया था। आरबीआई ने विचार के बाद इसे बीते हफ्ते के आखिर में खारिज कर दिया। इसका असर 15 सितंबर यानी सोमवार को बाजार खुलने पर टाटा संस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला।
लिस्टिंग से टाटा संस से जुड़ी कंपनियों की वैल्यूएशन बढ़ सकती है
टाटा संस की लिस्टिंग से इससे जुड़ी कंपनियों की वैल्यूएशंस बढ़ सकती है और उनकी वैल्यू अनलॉक हो सकती है। इस वजह से टाटा समूह और एसपी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में 15 सितंबर को बड़ी तेजी देखने को मिली। शेयर बाजारों में गिरावट के बावजूद इन शेयरों में उछाल आया। टाटा संस टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है, जिसका नियंत्रण TCS, Tata Motors, Tata Steel और Air India जैसी दिग्गज कंपनियों पर है।
टाटा संस खुद को शेयर बाजारों में लिस्ट नहीं कराना चाहती है
टाटा संस खुद को शेयर बाजारों में लिस्ट नहीं कराना चाहती है। लेकिन, अपर-लेयर एनबीएफसी होने के चलते उसे खुद को लिस्ट कराना होगा। नियम के मुताबिक, किसी अपर-लेयर एनबीएफसी को तीन साल के अंदर खुद को शेयर बाजारों में लिस्ट कराना जरूरी है।