शेयर बाजार में अप्रैल में अच्छी रिकवरी दिखी है। यह लगातार दूसरा हफ्ता है जब बाजार में तेजी दिखी। इससे निवेशक खुश हैं। लेकिन, उनके मन में एक सवाल भी चल रहा है। क्या यह रैली टिकाऊ है या कोई बड़ा रिस्क आने वाला है? सीएनबीसी-आवाज के "आवाज़ अड्डा" में लक्ष्मण राय ने इसी मसले पर बाजार के दिग्गजों से व्यापक चर्चा की।
ट्रंप और युद्ध विराम का 'साइकोलॉजिकल' असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख और ईरान के साथ युद्ध की आशंकाएं कम होने की खबरों ने बाजार को बूस्ट दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इक्विटी मार्केट हमेशा भविष्य को लेकर आशावादी (Optimistic) होता है। बाजार ने यह मान लिया है कि सीजफायर अब स्थायी हो जाएगा, जिससे क्रूड की कीमतें स्थिर होंगी और भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं को बड़ी राहत मिलेगी।
बाजार की तेजी के बीच एक चिंताजनक खबर 'अलनीनो' (El Nino) के प्रभाव को लेकर है। यदि मानसून सामान्य से कम रहता है, तो ग्रामीण इलाकों में कंजम्पशन (Demand) घट सकती है। निवेशकों को मानसून के अपडेट्स और रूरल डिमांड पर कड़ी नजर रखनी होगी क्योंकि यह भारतीय अर्थव्यवस्था का बड़ा ग्रोथ ड्राइवर है।
बैंकिंग और आईटी में से किसमें दिख रहा ज्यादा दम
दिग्गजों का मानना है कि बिना बैंकिंग इंडेक्स के बेहतर प्रदर्शन के बाजार ऊपर नहीं जा सकता। पिछले कुछ महीनों में MSME और SME सेक्टर को लेकर जो चिंताएं थीं, वे अब युद्ध के शांत होने के साथ कम हो सकती हैं। बैंकिंग सेक्टर में आईटी के मुकाबले ज्यादा तेजी से रिकवरी (Bounce Back) की उम्मीद है। आईटी सेक्टर (Market Performer) को फिलहाल 'मार्केट परफॉर्मर' माना जा रहा है। इसमें कुछ मिडकैप स्टॉक्स अच्छा कर सकते हैं, लेकिन आउटपरफॉर्मेंस के लिए अभी इंतजार करना होगा।
चौथी तिमाही के नतीजों का सीजन बाजार के लिए अहम
बाजार को चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों का बेसब्री से इंतजार है। अभी सिर्फ कुछ बड़ी कंपनियों के नतीजे आए हैं। आने आने वाले नतीजे बाजार के लिए दिशा तय करने वाले होंगे। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस समय केवल उन्हीं कंपनियों पर फोकस करें जिनके बिजनेस फंडामेंटल्स मजबूत हैं और जो अच्छे नतीजे पेश कर रही हैं।
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