शॉर्ट कॉल : Marico, LIC की नई चिंता और बैंकिंग शेयर बता रहे हैं मार्केट का हाल

दो हफ्ते पहले के मुकाबले मार्केट का सेंटिमेंट बेहतर दिख रहा है। हालांकि, ठोस संकेतों के लिए हमें दो-चार दिन इंतजार करना पड़ेगा। अगले हफ्ते से कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजों का सीजन शुरू हो रहा है। इससे पता चलेगा कि उनकी कमाई का हाल कैसा है

अपडेटेड Apr 05, 2023 पर 11:41 AM
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इनवेस्टर्स की दिलचस्पी फिर से सेकेंड लाइन स्टॉक्स में दिखने लगी है। हालांकि, जल्द फोकस वैल्यूएशंस पर शिफ्ट हो जाएगा, क्योंकि चौथी तिमाही के कंपनियों के नतीजों का सीजन शुरू होने जा रहा है।

दो हफ्ते पहले के मुकाबले मार्केट सेंटिमेंट (Market Sentiment) अब बेहतर है। मशहूर अमेरिकी इनवेस्टर और फंड मैनेजर पीटर लिंच () ने कहा था कि किसी स्टॉक इनवेस्टर का ज्यादा ज्ञान उसके अपने साथी इनवेस्टर से अPeter Lynchच्छी ट्रिक या टिप सीखने में आड़े नहीं आनी चाहिए। लिंच का यह कोट बाजार की मौजूदा स्थिति पर सही बैठता है। इनवेस्टर्स की दिलचस्पी फिर से सेकेंड लाइन स्टॉक्स में दिखने लगी है। हालांकि, जल्द फोकस वैल्यूएशंस पर शिफ्ट हो जाएगा, क्योंकि चौथी तिमाही के कंपनियों के नतीजों का सीजन शुरू होने जा रहा है। पिछले कुछ समय से कमई की ग्रोथ को लेकर चिंता इनवेस्टर्स को खुलकर निवेश करने से रोक रही थी। कुछ नतीजें आ जाने के बाद यह पता लगेगा कि इनवेस्टर्स की यह चिंता कितनी सही थी।

बैंकिंग सेक्टर की तस्वीर

बैंकों से चौथी तिमाही के जो अपडेट्स मिले हैं, उनसे पता चलता है कि क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी हुई है। लेकिन, यह डिपॉजिट ग्रोथ है, जिसे देखकर इनवेस्टर्स यह फैसला लेंगे कि आने वाले दिनों में वे बैंकिंग शेयरों के लिए कितने पैसे चुकाने को तैयार हैं। RBL Bank का CASA अभी बेस्ट लेवल पर है। फेडरल बैंक और इंडसइंड बैंक का कासा कई तिमाही के निचले स्तर पर है। South Indian Bank और Bandhan Bank को भी अपना डिपॉजिट बढ़ाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।


मार्जिन बचाने की चुनौती

इनवेस्टर्स की नजरें बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर रहेंगी। नेट मार्जिन का मतलब उस अंतर से है, जो बैंक कर्ज लेने वाले लोगों से इंटरेस्ट के रूप में वसूलता है को डिपॉजिटर्स को इंटरेस्ट के रूप में चुकाता है। इंटरेस्ट रेट्स बढ़ने की वजह से नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव देखने को मिल रहा है। अब तक बैंक कर्ज लेने वाले लोगों सो ज्यादा इंटरेस्ट रेट लेकर अपना NIM बढ़ाने में सफल रहे हैं। लेकिन, अब उन्हें डिपॉजिटर्स को भी ज्यादा इंटरेस्ट रेट्स देने होंगे।

Capri Global की चाल

पिछले कुछ हफ्तों से Capri Global Capital के शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव रहा है। फरवरी की शुरुआत में यह शेयर सबसे पहले 727 रुपये के लेवल से क्रैश कर गया। यह गिरकर मार्च के आखिर हफ्ते में 570 रुपये पर आ गया। उसके बाद यह चमत्कारिक रूप से चढ़कर 31 मार्च को 661 रुपये पर बंद हुआ। वॉल्यूम भी काफी ज्यादा रहा। लेकिन, डिलीवरी कम रही।

LIC की नई चिंता

Capri के लिए नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत अच्छी नहीं रही है। 3 मार्च को यह शेयर 7 फीसदी क्रैश कर गया। इससे LIC की चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि वह इस कंपनी का सबसे बड़ा घरेलू संस्थागत निवेशक है। LIC दिसंबर 2020 से ही इस कंपनी में अपना निवेश बढ़ाता आ रहा है।

रूरल मार्केट पर नजरें

Marico के चौथी तिमाही के बिजनेस अपडेट्स मिलेजुले रहे हैं। साल दर साल आधार पर वॉल्यूम ग्रोथ अच्छी रही है। लेकिन, कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू की ग्रोथ सिंगल डिजिट में रही है। कमेंट्री से यह पता नहीं चला है कि रूरल मार्केट में कंपनी का बिजनेस कैसा रहा है। यह कंपनी के लिए बहुत अहम है। अच्छी बात यह है कि कमोडिटीज की कीमतों में नरमी से मार्जिन में सुधार दिख रहा है।

इस कंपनी के शेयर में पिछले तीन महीनों से दिक्कत देखने को मिल रही है। हालांकि, मार्च में उतार-चढ़ाव के दौरान कई बार इनवेस्टर्स को FMCG शेयरों का सहारा लेते देखा गया। इसका मतलब है कि इनवेस्टर्स इस शेयर में निवेश से पहले ऑपरेटिंग इनवायरमेंट में सुधार आने का इंतजार कर रहे हैं।

क्रूड से डरने की जरूरत नहीं

इनवेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टेनली ने 2023 के लिए क्रूड की कीमत को लेकर अपने अनुमान में कमी की है। उसने कहा है कि OPEC के प्रोडक्शन में कमी करने का हालिया फैसला इस बात का संकेत हो सकता है कि तेल उत्पादक देश ऑयल की मांग में सुस्ती को लेकर चिंतित हैं। मॉर्गन स्टेनली ने दूसरी तिमाही में ब्रेंट क्रूड के प्राइस के अनुमान को 90 डॉलर प्रति बैरल से घटाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है।

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