Short Call: बीते 10 साल में Nifty Midcap 100 ने दिया सबसे ज्यादा रिटर्न, जानिए Granules India और Jubilant Pharmova क्यों सुर्खियों में हैं

बीते 10 साल में रिटर्न के लिहाज से मिडकैप 100 इंडेक्स अव्वल रहा है। इसे निफ्टी 50 के मुकाबले ज्यादा रिस्की लेकिन स्मॉलकैप 100 इंडेक्स के मुकाबले कम रिस्की माना जाता है। इस बीच, मार्केट की नजरें अमेरिका में फेडरल रिजर्व के फैसले पर होंगी

अपडेटेड Sep 16, 2024 पर 10:06 AM
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जुबिलेट फार्मोवा का स्टॉक 13 सितंबर को 12 फीसदी उछाल के साथ 1,174 रुपये पर बंद हुआ था। इसकी वजह इसका हाई वॉल्यूम और पॉजिटिव आउटलुक है।
     
     
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    निफ्टी 50, निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 में बीते 10 साल में किसने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया है? संभवत: आपका जवाब होगा निफ्टी स्मॉलकैप 100। लेकिन, सही जवाब है निफ्टी मिडकैप 100। इस इंडेक्स में स्मॉलकैप से कम रिस्क है, लेकिन निफ्टी 50 से ज्यादा है। पिछले एक दशक में इसका प्रदर्शन निफ्टी 50 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 से अच्छा रहा है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने अपनी रिपोर्ट में दिलचस्प जानकारी दी है। उसने कहा है कि अगर अगर अगस्त 2014 में तीनों इंडेक्स का बेस 100 मान लिया जाए तो आज निफ्टी 50 सूचकांक 235 पर होगा, स्मॉलकैप इंडेक्स 275 पर होगा और एनएसई मिडकैप 100 सूचकांक 396 पर होगा।

    अगर आपको एक दशक का समय ज्यादा लगता है तो हम बीते 3 साल के रिटर्न पर गौर कर सकते हैं। Nifty50 सूचकांक करीब 46 फीसदी चढ़ा है। Nifty Smallcap 100 करीब 81 फीसदी चढ़ा है, जबकि Nifty Midcap 100 करीब 101 फीसदी चढ़ा है। इसका मतलब है कि इसने तीन साल में निवेशकों का पैसा दोगुना कर दिया है। यह ध्यान रखना होगा कि कुछ स्मॉलकैप स्टॉक्स में 700-800 फीसदी तेजी आई है। लेकिन, कुल मिलाकर मिडकैप इंडेक्स का रिटर्न लार्जकैप इडेक्स और स्मॉलकैप इंडेक्स से ज्यादा रहा है।

    Granules India

    यह स्टॉक 13 सितंबर को 2.1 फीसदी गिरकर 553 रुपये पर बंद हुआ। यह लगातार तीसरा दिन था जब Granules India का स्टॉक गिरावट के साथ बंद हुआ। इसकी वजह अमेरिकी ड्रग रेगुलेटर का ऑब्जर्वेशन है। USFDA ने कंपनी के गागिलपुर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को लेकर तीन ऑब्जर्वेशन दिए हैं। बुल्स का कहना है कि कंपनी ज्यादा मार्जिन वाले ओंकोलॉजी स्पेस, लार्ज-वॉल्यूम प्रोडक्ट्स, इनोवेटिव टेक आधारित प्रोडक्ट्स में अपनी स्थिति मजबूत कर रही है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कंपनी का फोकस बैकवॉर्ड इंट्रिगेशन पर है, जिससे FY24-26 के दौरान अर्निंग्स सीएजीआर को मजबूती मिल सकती है। उधर, बेयर्स की दलील है कि कंपनी का रेगुलेटरी ट्रैक रिकॉर्ड शानदार है, लेकिन गागिलपुर प्लांट में अगर नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो इसका असर कंपनी की ग्रोथ पर पड़ सकता है। गागिलपुर प्लांट की क्षमता काफी अधिक है। यह दूसरी जगरों पर स्थित कंपनी के तीन प्लांट्स की कुल क्षमता से ज्यादा है।


    Jubilant Pharmova

    जुबिलेट फार्मोवा का स्टॉक 13 सितंबर को 12 फीसदी उछाल के साथ 1,174 रुपये पर बंद हुआ था। इसकी वजह इसका हाई वॉल्यूम और पॉजिटिव आउटलुक है। कंपनी मीडियम टर्म ग्रोथ के लिए सीडीएमओ इंजेक्टेबल्स सेगमेंट में अपनी पॉजिशन मजबूत कर रही है। यह पीईटी डायगनास्टिक्स का भी विस्तार कर रही है। विलय और अधिग्रहण में भी इसकी दिलचस्पी बढ़ रही है। उधर, अमेरिका में बायोसेक्योर एक्ट के पारित होने के बाद लंबी अवधि में कंपनी के लिए काफी मौके होंगे। उधर, बेयर्स का मानना है कि अमेरिका में इनफ्लेशन का असर कंपनी के जेनरिक्स मार्जिन पर पड़ सकता है। रेडियोफॉर्मा प्रोडक्ट लॉन्च में देरी का असर भी पड़ सकता है। उधर, स्टराइल इंजेक्टेबल सेगमेंट में प्रतियोगिता बढ़ रही है। इससे प्रमुख मार्केट्स में बिजनेस की अच्छी संभावनाओं के बावजूद ग्रोथ सीमित रह सकती है।

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    Zen Technologies

    जेन टेक्नोलॉजीज का शेयर 13 सितंबर को 2.7 फीसदी चढ़कर 1,664.90 रुपये पर बंद हुआ। स्टॉक में तेजी की वजह यह है कि नुवामा ने इसे कवर करना शुरू किया है। उसने Zen Technologies के शेयरों को खरीदने की सलाह दी है। इसका टारगेट प्राइस 2,200 रुपये बताया है। बुल्स का कहना है कि आत्मनिर्भर भारत और डिफेंस पर बढ़ते खर्च के चलते लोकल मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ अच्छी रहेगी। कंपनी ने अगले 2-3 साल में रेवेन्यू का CAGR 60 फीसदी से ज्यादा रहने का अनुमान जताया है, जबकि ऑपरेटिंग मार्जिन 35 फीसदी रह सकता है। इंडिया के डिफेंस सेक्टर में लंबी अवधि में विस्तार की काफी संभावना दिख रही है। सरकार देश में डिफेंस इक्वपमेंट बनाने पर जोर दे रही है। एक्सपोर्ट पर भी उसका फोकस है। डिफेंस बजट में अच्छा इजाफा देखने को मिला है।

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