पैसेंजर कार और टू-व्हीलर्स की बिक्री ने नवंबर में नए रिकॉर्ड बनाए। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल्स डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के मनीष राज सिंघानिया ने दिसंबर में भी बिक्री शानदार रहने की उम्मीत जताई है। सवाल है कि ऑटो कंपनियों के स्टॉक्स पर इसका कितना असर पड़ सकता है? CLSA ने कहा है कि टू-व्हीलर कंपनियों की वैल्यूएशन में अगले कुछ सालों में वॉल्यूम में डबल-डिजिट ग्रोथ की संभावना शामिल है। नियर-टर्म में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स में मार्जिन पर दबाव हो सकता है। इसकी वजह यह है कि कंपनियों ने सस्ते इलेक्ट्रिक स्कूटर्स लॉन्च करने पर फोकस बढ़ाया है।
Warburg Pincus आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 1.3 फीसदी हिस्सेदारी बेचने जा रहा है। यह डील प्रति शेयर 85.70 रुपये के प्राइस पर होगी। यह 6 दिसंबर को स्टॉक के क्लोजिंग प्राइस से 5 फीसदी कम है। सितंबर में इस पीई फर्म में अपनी 4.2 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी। IDFC First Bank शेयरों की यह बिक्री 89 रुपये के प्राइस पर हुई थी। सितंबर में अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई से यह स्टॉक 10 फीसदी गिर चुका है। दूसरी तिमाही में इस बैंक में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने अपनी हिस्सेदारी 20.85 फीसदी से बढ़ाकर 24.48 फीसदी कर दी। PL ने इस स्टॉक को खरीदने की सलाह दी है। उसने इसका टारगेट प्राइस 97 रुपये बताया है।
50,000 रुपये से कम के पोस्टपेड लोन की अब पेटीएम के पोर्टफोलियो में कम हिस्सेदारी होगी। कंपनी का यह फैसला RBI की सख्ती के कुछ ही दिन बाद आया है। RBI ने हाल में अनसेक्योर्ड लोन की तेज ग्रोथ पर चिंता जताई थी। तब से Paytm के शेयरों में गिरावट देखने को मिली है। इससे इस साल इस स्टॉक में आई 50 फीसदी की शानदार तेजी पर ब्रेक लग गया है। अब तक सस्ता वैल्यूएशन इस स्टॉक के लिए मददगार था। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि कंपनी ने अब तक क्रेडिट और बैड लोन का एक पूरा सर्किल नहीं देखा है। इसके अलावा लेंडिंग स्पेस में कॉम्पिटशन भी बहुत ज्यादा है।
दिल्ली में दो दिन के HAL Avionics Expo से पहले HAL के स्टॉक में तेजी दिखी है। कंपनी फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के अपने टारगेट के 70 फीसदी से ज्यादा ऑर्डर हासिल कर लिया है। इस वित्त वर्ष के बाकी महीनों में कंपनी को कुछ बड़े ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। ऐसे में मार्केट को एचएएल के लिए बहुत अच्छी संभावनाएं दिख रही हैं।
नवंबर में क्लाइंट बेस में साल दर साल 51 फीसदी का इजाफा हुआ है। मार्केट में जारी तेजी से ब्रोकिंग फर्मों को फायदा हो रहा है। दूसरी तिमाही के नतीजों से इसका पता चलता है। करीब 18 महीनों तक सीमित दायरे में रहने के बाद इस स्टॉक ने अक्टूबर में ब्रेकआउट दिया था। मार्केट में तेजी के दौरान ब्रोकिंग फर्मों के स्टॉक्स में भी कमाई के मौके बढ़ जाते हैं। इस स्टॉक में तेजी को देखकर लगता है कि मार्केट का मजबूत सेंटिमेंट आगे जारी रह सकता है।