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Short Call: शॉर्ट टाइम में इन दो शेयरों पर रखें नजर, पहले से ही आपके पास?

Trump Effect: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के आने की आहट पर भारत, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे विकासशील देशों के 7.6 लाख करोड़ डॉलर के स्टॉक्स को ट्रैक करने वाले MSCI का एमर्जिंग मार्केट इंडेक्स ढह चुका है। पिछले साल अक्टूबर में यह ढाई साल के हाई पर पहुंचा था और इस हाई से यह 10 फीसदी से अधिक गिर चुका है जबकि विकसित देशों के स्टॉक्स लगभग फ्लैट बने हुए हैं

Edited By: Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Jan 16, 2025 पर 12:48 PM
Short Call: शॉर्ट टाइम में इन दो शेयरों पर रखें नजर, पहले से ही आपके पास?
Trump Effect: अगले हफ्ते अमेरिका में एक बार डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की सरकार बनने जा रही है। मार्केट उनकी ताजपोशी का इंतजार कर रहा है क्योंकि नई सरकार में नई नीतियां आ सकती हैं तो उसके हिसाब से मार्केट अपनी चाल तय करेगा।

Trump Effect: अगले हफ्ते अमेरिका में एक बार डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की सरकार बनने जा रही है। मार्केट उनकी ताजपोशी का इंतजार कर रहा है क्योंकि नई सरकार में नई नीतियां आ सकती हैं तो उसके हिसाब से मार्केट अपनी चाल तय करेगा। अभी तो मार्केट का मानना है कि ट्रंप के आने से अमेरिकी ग्रोथ को सपोर्ट मिल सकता है लेकिन इस बात की भी आशंका है कि महंगाई बढ़ सकती है। वैसे अभी ट्रंप राष्ट्रपति बने नहीं हैं, लेकिन उनके आने की आहट पर विकासशील देशों को झटके लगने लगे हैं।

ट्रंप के ट्रेड टैरिफ की स्ट्रैटेजी और डॉलर की मजबूती पर निवेशक विकासशील देशों के स्टॉक्स से पैसे निकाल रहे हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि ट्रंप की टैरिफ और टैक्स कटौती जैसी नीतियों से फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में कटौती का इंतजार लंबा हो सकता है। इन सबके बीच ब्रोकरेज ने शॉर्ट टर्म के लिए दो स्टॉक्स पर अपना व्यू दिया है।

BSE

ब्रोकरेज फर्म नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने खरीदारी की रेटिंग के साथ बीएसई की कवरेज शुरू की है। ब्रोकरेज का कहना है कि इंडेक्स डेरिवेटिव से जुड़े सख्त नियमों के बावजूद बीएसई में अच्छी तेजी दिख सकती है। बंद हो चुके वीकली कॉन्ट्रैक्ट्स की इसके इंडेक्स प्रीमियम वॉल्यूम में महज 21.3 फीसदी हिस्सेदारी थी जबकि एनएसई के मामले में यह आंकड़ा 46.9 फीसदी था। खास बात ये है कि बीएसई के पास अपने एक्टिव कस्टमर बेस को बढ़ाने का काफी मौका है। इसका एक्टिव कस्टमर बेस अभी 15-20 लाख मासिक है जबकि एनएसई का आंकड़ा 42 लाख का है। हालांकि दूसरी तरफ रिस्क की बात करें तो नियमों में बदलाव, इक्विटी इंडेक्स ऑप्शंस सेगमेंट पर अधिक निर्भरता, मैक्रोइकनॉमिक लेवल पर बड़े पैमाने पर सुस्ती से बीएसई को झटका लग सकता है

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