एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को लेटर आफ इंटेंट देने के बाद सरकार अब जल्दी ही स्पेक्ट्रम देने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई आज सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़ी हुई सिफारिशें से जारी करेगा यह पूरी खबर बताते हुए सीएनबीसी-आवाज के असीम मनचंदा ने बताया कि देश में जल्द ही सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा मिलेगी। इसके लिए स्टारलिंक को सरकार से लेटर ऑफ इंटेंट मिल गया है।
टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई जल्द ही सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के आवंटन की सिफारिश जारी करेगा। कंपनियों को 5 साल के लिए लाइसेंस मिलेगा। सभी कंपनियों को स्पेक्ट्रम शेयर करना होगा। कंपनियों को स्पेक्ट्रम पर 3 फीसदी स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज देना होगा। कंपनियों को शुरुआत में टोकन अमाउंट देना होगा। Oneweb और रिलायंस जियो के पास सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं देने का लाइसेंस है। सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा देने के लिए स्टारलिंक का भारती एयरटेल और रिलायंस जियो के साथ करार है।
ये मंजूरी कंपनी की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी शर्तों को मानने के बाद जारी की गई है। माना जा रहा है कि भारत सरकार की ओर से स्टारलिंक को हरी झंडी में तेजी का फैसला अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता में मदद। कर सकता है। बता दें कि स्टारलिंक को लेकर सरकार की तरह से पहले भी ये कहा जा रहा था कि सुरक्षा से जुड़े सारे क्लीयरेंस देखनी होगी, उसके बाद ही उन्हें लाइसेंस मिलेगा।
भारत में सैटेलाइट सर्विस लॉन्च करने से पहले Starlink को दूरसंचार विभाग की तरफ से जोड़े गए जिन शर्तों को मानना होगा उसमें वेबसाइट ब्लॉकिंग और कानूनी सर्विलांस समेत कई और सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने वाले नियम शामिल हैं। DoT ने सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए नियम को और सख्त किया है। इसके लिए दूरसंचार विभाग ने 29 से 30 नए सुरक्षा मापदंडों को जोड़ा है।
नए नियम के तहत दूरसंचार विभाग ने सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए भारत के अंतर्राष्ट्रीय सीमा के 50 किलोमीटर के दायरे में स्पेशल सर्विलांस जोन बनाने का प्रावधान रखा है।
इसके साथ ही सर्विस प्रोवाइडर्स को सुरक्षा एजेंसी की डिमांड पर भारत की सीमा में यूजर टर्मिनल (फिक्स्ड और मोबाइल) रीयल-टाइम लोकेशन डेटा ट्रैकिंग करना होगा। इसमें यूजर टर्मिनल के लॉन्गिट्यूड और लैटिट्यूड की जानकारी रीयल-टाइम के आधार पर देनी होगी।
यही नहीं, सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर्स को यूजर टर्मिनल्स को वेरिफाई करना होगा। इसके लिए वे ऑथेंटिकेशन तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिनमें किसी अनरजिस्टर्ड विदेशी डिवाइस को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बाद केवल भारत में ही सर्विस एक्सेस मिलेगा।