कई इनवेस्टर्स निवेश के लिए सही मौके का इंतजार करते हैं। गिरावट आने पर उन्हें लगता है कि मार्केट और गिर सकता है। इसलिए वे निवेश नहीं करते। तेजी आने पर उन्हें लगता है कि शेयरों की कीमतें ज्यादा हो गई हैं। इसलिए वे निवेश नहीं करते। इस तरह वे निवेश के लिए इंतजार करते रह जाते हैं। ऐसे निवेशकों के लिए व्हाइटओक कैपिटल मैनेजमेंट के फाउंडर प्रशांत खेमका की सलाह बहुत मायने रखती है। उन्होंने कहा है कि इनवेस्टर्स को निवेश के सही मौके का इंतजार करने के बजाय लंबी अवधि के निवेश पर फोकस करना चाहिए। इसका मतलब है कि निवेश के लिए हर वक्त सही है।
गिरावट सस्ते भाव पर स्टॉक खरीदने का मौका
खेमका ने कहा, "आम तौर पर मैं मानता हूं कि हर वक्त निवेश के लिए सही है। मैं कभी निवेश के लिए सही मौके का इंतजार नहीं करता हूं।" उन्होंने कहा कि मार्केट में उतारचढ़ाव स्वाभाविक है। इस उतारचढ़ाव का असर इनवेस्टर के लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट पर नहीं पड़ना चाहिए। एक समय 17 चीजें सही होती हैं, जबकि 17 चीजें गलत भी होती हैं। पिछले 5 महीने से जारी गिरावट के बाद निवेशकों को काफी लॉस हुआ है। लेकिन, यह वक्त सस्ते भाव पर स्टॉक्स खरीदने का है।
मार्केट और गिरने के डर से निवेशक नहीं कर रहे निवेश
सितंबर के आखिर में गिरावट शुरू होने से पहले मार्केट ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया था। तब मार्केट की हाई वैल्यूएशन को लेकर चिंता जताई जा रही थी। विदेशी निवेशकों ने तो इंडियन मार्केट की हाई वैल्यूएशन के चलते ही अपने पैसे निकालने शुरू कर दिए थे। आज मार्केट की वैल्यूएशन अपने 10 साल की औसत वैल्यूएशन से कम हो गई है। लेकिन, इनवेस्टर्स इस डर से स्टॉक्स में निवेश नहीं कर रहे हैं कि मार्केट में गिरावट बढ़ सकती है। स्टॉक मार्केट्स ऐसा इकलौता बाजार है जिसमें कीमतें गिरने से लोग चिंतित हो जाते हैं।
विदेशी फंडों की बिकवाली से गिरा बाजार
खेमका ने कहा कि मार्केट में आई गिरावट की बड़ी वजह विदेशी फंडों की बिकवाली है। वे इंडिया से पैसे निकाल अमेरिका में निवेश कर रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं कि इंडिया में सेंटिमेंट खराब है। विदेशी निवेशक को जहां सही लगता है वहां वे निवेश करते हैं। अभी उन्हें अमेरिकी बाजार सही लग रहा है। अगर अमेरिका में उतारचढ़ाव बढ़ता है तो वे अपनी इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी पर फिर से विचार कर सकते हैं। ऐसा होने पर इंडिया जैसे उभरते बाजारों को फायदा होगा।
लंबी अवधि के निवेश के लिए हर वक्त बेस्ट है
उन्होंने कहा कि इकोनॉमिक ग्रोथ और मार्केट का रिटर्न कभी सीधी लाइन में नहीं होता है। बाजार में करेक्शन स्वाभाविक है। इसे निवेश के मौके के रूप में देखना चाहिए। अगर आप निवेश के लिए बेस्ट टाइम का इंतजार कर रहे हैं तो फिर इसका कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को शॉर्ट टर्म के उतारचढ़ाव पर ध्यान देने के बजाय लंबी अवधि के निवेश पर फोक करना चाहिए।