Stock Market Crash: सेंसेक्स-निफ्टी में 6 साल की सबसे बड़ी मंथली गिरावट, क्या और गिरेगा शेयर बाजार?

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के लिए मार्च का महीना बेहद निराशाजनक साबित हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी में पिछले छह सालों, यानी मार्च 2020 के बाद की सबसे बड़ी मंथली गिरावट देखने को मिली। महीने के आखिरी कारोबारी दिन 30 मार्च को भी बाजार में भारी बिकवाली रही। बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 2% से ज्यादा टूटकर बंद हुए

अपडेटेड Mar 30, 2026 पर 5:31 PM
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Stock Market Crash: निफ्टी-50 इंडेक्स में मार्च महीने के दौरान 11.3% की गिरावट आई

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के लिए मार्च का महीना बेहद निराशाजनक साबित हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी में पिछले छह सालों, यानी मार्च 2020 के बाद की सबसे बड़ी मंथली गिरावट देखने को मिली। महीने के आखिरी कारोबारी दिन 30 मार्च को भी बाजार में भारी बिकवाली रही। बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 2% से ज्यादा टूटकर बंद हुए। इस पूरे महीने की गिरावट ने निवेशकों को झकझोर कर रख दिया।

सोमवार को कारोबार के अंत में 1,635.67 अंक यानी 2.22% गिरकर 71,947.55 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 488.20 अंक यानी 2.14% टूटकर 22,331.40 के स्तर पर आ गया। यह अप्रैल 2025 के बाद का निफ्टी का सबसे निचला स्तर है।

मार्च बना 2020 के बाद सबसे खराब महीना

मार्च 2026 बाजार के लिए पिछले 6 सालों का सबसे खराब महीना साबित हुआ। निफ्टी-50 में इस दौरान 11.3% की गिरावट आई। वहीं बैंक निफ्टी इंडेक्स इस महीने 16.94% तक टूट गया। अगर पूरे तिमाही की बात करें तो भी हालात बेहतर नहीं रहे। मार्च तिमाही में निफ्टी 14.54% और बैंक निफ्टी 15.62% गिरा, जो कोविड काल (2020) के बाद का सबसे खराब प्रदर्शन है।


इस दौरान बाजार में डर का स्तर भी काफी बढ़ा। शेयर बाजार का फियर इंडेक्स’ कहा जाने वाला इंडिया VIX, मार्च में 103.5% और पूरे तिमाही में 194.33% तक उछल गया।

शेयर बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें

इस भारी गिरावट के पीछे कई बड़े कारण रहे। मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी और विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया।

कमजोर ग्लोबल संकेतों ने भी बाजार की शुरुआत को प्रभावित किया। सोमवार को बाजार 22,600 के नीचे खुला और लगातार बिकवाली के चलते निफ्टी इंट्राडे में 22,283.85 के स्तर तक चला गया।

रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी

इस बीच भारतीय करेंसी भी दबाव में रही। रुपया पहली बार 95 के स्तर को पार करते हुए 95.12 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, बाद में कुछ रिकवरी के साथ यह 94.83 प्रति डॉलर पर लगभग स्थिर बंद हुआ। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ाता है और इससे बाजार में और बिकवाली का दबाव बन सकता है।

टेक्निकल इंडिकेटर क्या कहते हैं?

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तकनीकी रूप से बाजार अभी भी पूरी तरह मंदड़ियों के कब्जे में है। चार्ट पर लगातार “लोअर हाई–लोअर लो” का पैटर्न बन रहा है, जो गिरावट के ट्रेंड को मजबूत करता है।

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट, नागराज शेट्टी ने बताया कि निफ्टी 22,500 के अहम सपोर्ट के नीचे आ चुका है, जिससे कमजोरी और बढ़ सकती है। उनका मानना है कि निकट भविष्य में निफ्टी 22,000 से 21,900 के स्तर तक फिसल सकता है, जबकि ऊपर की तरफ 22,500 एक मजबूत रेजिस्टेंस रहेगा।

उन्होंने कहा कि डेरिवेटिव डेटा के अनुसार, फिलहाल बाजार 22,000 से 22,500 के दायरे में रह सकता है। इस रेंज के किसी भी तरफ ब्रेकआउट से अगली दिशा तय होगी।

एनालिस्ट्स का कहना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, वेस्ट एशिया में तनाव कम नहीं होता और FII की बिकवाली जारी रहती है, तब तक बाजार में स्थिरता आना मुश्किल है।

अगला कारोबार

शेयर बाजार कल मंगलवार 31 मार्च को महावीर जंयती के कारण बंद रहेगा। बाजार में अगला कारोबार अब बुधवार 1 अप्रैल को शुरू होगा।

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