शेयर बाजार लगातार दूसरे ट्रेडिंग सेशन में लाल, सेंसेक्स खुलते ही 1200 अंक तक लुढ़का; निवेशकों के ₹6.74 लाख करोड़ साफ

शुक्रवार, 27 मार्च को सेंसेक्स पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप घटकर 4,22,15,450.82 करोड़ रुपये पर आ गया था। मार्केट की ओपनिंग होते ही निवेशकों की दौलत से 6.73 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए। खुलने के कुछ पलों के अंदर ही सेंसेक्स में गिरावट बढ़कर 1200 अंक तक पहुंच गई

अपडेटेड Mar 30, 2026 पर 10:01 AM
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शुक्रवार को भी शेयर बाजार में तगड़ी गिरावट देखी गई थी।

30 मार्च को शेयर बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में लाल निशान में हैं। BSE सेंसेक्स में तगड़ी गिरावट है। सेंसेक्स 1000 अंकों से ज्यादा ​की गिरावट के साथ 72,565.22 पर खुला। इसी तरह निफ्टी भी 269.95 अंकों की गिरावट के साथ 22,549.65 पर खुला। तुरंत ही यह 22,470.15 के लो तक गया।खुलने के कुछ पलों के अंदर ही सेंसेक्स में गिरावट बढ़कर 1200 अंक तक पहुंच गई और इंडेक्स 72,391.98 के लो तक खिसक गया। मार्केट की ओपनिंग होते ही निवेशकों की दौलत से 6.74 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए।

शुक्रवार, 27 मार्च को सेंसेक्स पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप घटकर 4,22,15,450.82 करोड़ रुपये पर आ गया था। सोमवार को यह मार्केट खुलने पर तुरंत ही गिरकर 4,15,41,537.69 करोड़ रुपये तक चला गया। शुक्रवार को सेंसेक्स 1690.23 अंक गिरकर 73,583.22 पर और निफ्टी 486.85 अंक लुढ़ककर 22,819.60 पर बंद हुआ था।

क्यों फिसल रहा है बाजार


भारतीय बाजारों में गिरावट के पीछे वैश्विक बाजारों की कमजोरी, पश्चिम एशिया में संघर्ष में कमी न आने के संकेत, कच्चे तेल की कीमत और बढ़ना, रुपये में गिरावट और विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली हैं। वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।शुक्रवार को रुपया 89 पैसे लुढ़ककर 94.85 प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ था। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मैक्रोइकोनॉमिक आउटलुक पर इसके दुष्प्रभाव की आशंका से घरेलू मुद्रा पर दबाव बना हुआ है। हालांकि ​सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से 128 पैसे चढ़ा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.57 पर पहुंच गया।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मार्च में अब तक घरेलू शेयर बाजार से 1.13 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष, रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारत की ग्रोथ पर असर पड़ने की संभावना है। इसके चलते विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे हैं। इसके अलावा यूएस बॉन्ड की यील्ड बढ़ गई है और ग्लोबल लिक्विडिटी में कमी आई है। इससे विकसित बाजार FPI के लिए ज्यादा आकर्षक बन गए हैं।

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वैश्विक बाजारों का हाल

वैश्विक बाजारों की बात करें तो अमेरिकी और यूरोपीय शेयर मार्केट शुक्रवार को गिरावट में बंद हुए। एशियाई बाजार भी लाल निशान में हैं। जापान का निक्केई 3 प्रतिशत से ज्यादा टूटा है। दक्षिण कोरिया के कॉस्पी में भी 3 प्रतिशत की गिरावट है। ताइवान वेटेड में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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