शेयर बाजार में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही हैं। Nifty 50 आज कारोबार के दौरान लगभग 23,500 के अहम स्तर से नीचे फिसलते-फिसलते बचा। दिन के कारोबार में यह 23,503 तक पहुंच गया था। Sensex भी आज 528 अंकों की गिरावट के साथ 77,620 पर बंद हुआ। विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली और तिमाही नतीजों का सीजन शुरू होने से ठीक पहले बाजार सहमा हुआ दिखाई दिया। ऐसे में यह आशंका तेज हो गई कि बाजार में कोई ठोस रिकवरी आने से पहले क्या Nifty 22,000 से भी नीचे फिसल सकता है?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निफ्टी नवबंर में ही अपने करेक्शन जोन में चला गया था। हालिया शिखर से भी इसमें 10% से अधिक की गिरावट आ चुकी है। 10% की गिरावट के बाद माना जाता है कि अब इंडेक्स टेक्निकल तौर से करेक्शन जोन में आ चुके हैं। मार्च 2020 के कोविड काल के बाद यह केवल दूसरी बार है, जब निफ्टी में इस स्तर पर गिरावट आई है। अब इस अहम मोड़ पर निवेशकों को क्या करना चाहिए, इसे लेकर हमने कुछ टेक्निकल एक्सपर्ट्स से बात की।
रिलायंस सिक्योरिटीज के हेड रिसर्च एनालिस्ट विकास जैन ने बताया कि निफ्टी 23,200 के सपोर्ट लेवल को बरकरार नहीं रख पाता है, तो इसमें आगे और गिरावट आ सकती है। जैन ने कहा कि 23,200 से नीचे कोई भी गिरावट निफ्टी को 21,800-21,500 की रेंज में खींच सकती है।
वहीं, LKP Securities के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा ने कहा कि निफ्टी आज 23,500 के स्तर से ऊपर बंद हुआ है। यह इसके लिए एक मजबूत सपोर्ट लेवल है। इसने चार्ट पर 200-दिनों के EMA से नीचे एक बेयरिश कैंडलस्टिक बनाया है, जो सावधानी का संकेत है। उन्होंने कहा कि अगर 23500 का स्तर टूटता है तो फिर आगे और गिरावट आ सकती है। वहीं 23,800 इसके लिए रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर सकता है। अगर अगले कुछ दिनों में Nifty 23,800 का स्तर पार करता है, तो बाजार में फिर नई गति आ सकती है।
शेयर बाजार में क्यों नहीं थम रही गिरावट?
अब आते हैं कि आखिर शेयर बाजार में गिरावट क्यों नहीं थम रही है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा रीजन अर्निंग ग्रोथ से जुड़ी चिंताएं हैं। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नतीजों के ऐलान के साथ ही आज से आधिकारिक तौर पर अर्निंग सीजन की शुरुआत हो गई। इससे पहले पिछली तिमाही में भारतीय कंपनियों और खासतौर से निफ्टी में शामिल कंपनियों का प्रदर्शन पिछले 4 सालों में सबसे कमजोर रहा था। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा तिमाही नतीजों से पहले बाजार में एक घबरहाट देखी जा रही है। आज से तीसरी तिमाही के नतीजों का सीजन शुरू हो गया और बाजार अब कॉरपोरेट के प्रदर्शन के हिसाब से प्रतिक्रिया देगा।
मिराए एसेट शेयरखान के संजीव होता ने कहा कि अभी तक ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं कि निफ्टी-50 में शामिल कंपनियों के नतीजे पिछली तिमाही के मुकाबले अच्छे होंगे। इसके चलते निवेशक काफी सतर्क हैं। इसके अलावा ट्रंप की नीतियों को लेकर अनिश्चितता और फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में अनुमान से कम कटौती की चिंता के चलते भी बाजार पर दबाव बना हुआ है।
CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप सत्ता संभालने पर ग्लोबल आयात पर 10 प्रतिशत और चीनी वस्तुओं पर लगभग 60 प्रतिशत की ड्यूटी लगा सकते हैं। इन ड्यूटी पर कोई आपत्ति नहीं करे, इसके लिए वे अमेरिका में नेशनल इकोनॉमिक इमरजेंसी का ऐलान कर सकते हैं। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों का मानना है कि इसके चलते अमेरिका में महंगाई से जुड़ी चिताएं फिर से वापस आ सकती हैं।
इसके चलते फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में आक्रामक कटौती की उम्मीदें कम हो गई हैं। शेयर बाजार अब 2025 में केवल एक बार 0.25 फीसदी की कटौती का ही अनुमान लगा रहा है। दूसरी कटौती की संभावना काफी कमजोर हो गई हैं। यह शेयर बाजार की चिंता का एक और बड़ा कारण है।
इस सबके बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकालना जारी रखा है। FIIs ने बुधवार को 3,362.18 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। अकेले जनवरी में, FII अब तक 10,419 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं। ये सभी फैक्टर मिलकर बाजार पर दबाव बनाए हुए हैं।
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