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FY26 की गिरावट पर FY27 में चढ़ेगा मार्केट? मोतीलाल ओसवाल को ये शेयर हैं पसंद

Stock Market Strategy: ईरान-अमेरिका की लड़ाई की आंच इस वित्त वर्ष 2026 में भी बनी हुई है। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स इस साल जनवरी में रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद बिकवाली के दबाव में ऐसा फिसला कि अब इस हाई से यह करीब 14% टूट चुका है। जानिए कि मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक मार्केट में अब आगे क्या रुझान है और कौन-से स्टॉक्स दांव लगाने लायक हैं

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Apr 05, 2026 पर 3:56 PM
FY26 की गिरावट पर FY27 में चढ़ेगा मार्केट? मोतीलाल ओसवाल को ये शेयर हैं पसंद
घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने लॉर्ज कैप में भारती एयरेटल (Bharti Airtel), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank), टाइटन (Titan), महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra), इंफोसिस (Infosys) और टाटा स्टील (Tata Steel) पर दांव लगाया है।

Stock Market Strategy: पिछले वित्त वर्ष 2026 में टैरिफ वार और ईरान-अमेरिका की जंग ने भारत समेत दुनिया भर के स्टॉक मार्केट को तगड़े शॉक दिए। हालांकि अब घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का मानना है कि उतार-चढ़ाव भरा वित्त वर्ष 2026 अब भारतीय इक्विटी बाजारों के लिए वित्त वर्ष 2027 को मजबूत बनाने की नींव रख सकता है। ब्रोकरेज फर्म ने पिछले वित्त वर्ष 2026 को लगभग ब्लैक स्वान कहा है। रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि पिछले वित्त वर्ष 2026 में भारतीय मार्केट सबसे खराब परफॉरमेंस करने वाले बाजारों में शुमार रहा जोकि डॉलर टर्म में करीब 14% गिर गया जबकि एसएंडपी 500 में 16% तो कई उभरते बाजारों में 27% तक की तेजी आई।

अब आगे क्या है रुझान?

पिछले वित्त वर्ष 2026 में घरेलू मार्केट में इसलिए दबाव दिखा क्योंकि दूसरे बाजारों में निवेशकों को ग्रोथ की अधिक मजबूत संभावनाएं और अधिक आकर्षक वैल्यूएशन दिखा। रुपये में करीब 8% की कमजोरी ने इस पर और दबाव बनाया क्योंकि डॉलर के टर्म में रिटर्न पर दबाव डाला तो बाकी मार्केट्स की तुलना में गैप बढ़ गया। भारतीय मार्केट को घरेलू संस्थागत निवेशकों से तगड़ा सपोर्ट मिला जिन्होंने साल भर करीब $9600 करोड़ डाले जबकि दूसरी तरफ विदेशी निवेशको ने $2000 करोड़ निकाल लिए। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक मार्केट ने घरेलू निवेशकों की खरीदारी की बजाय विदेशी निवेशकों की बिकवाली पर अधिक रिस्पांस दिया और यह बिखर गया।

नीतिगत मोर्चे पर बात करें तो मार्केट को सपोर्ट देने वाले अहम ऐलान हुए जैसे कि सरकार ने इनकम टैक्स में राहत दी, जीएसटी पर टैक्स की दरों को घटाया और प्रमुख वैश्विक भागीदारों के साथ कारोबारी सौदों को आगे बढ़ाया तो आरबीआई ने रेपो रेट में 100 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती। मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक इसका मार्केट पर अभी पूरा पॉजिटिव असर नहीं दिखा लेकिन इनका असर कुछ समय बाद दिखाई दे सकता है। कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-28 के दौरान कमाई में सालाना लगभग 16% की तेजी आ सकती है और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद दोहरे अंकों के ग्रोथ की संभावना बनी रहेगी। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक वैल्यूएशन में भी भी गिरावट आई है। निफ्टी करीब 17.7 गुना अर्निंग्स पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके लॉन्ग-टर्म एवरेज से करीब 15% कम है तो दूसरी तरफ उभरते बाजारों के मुकाबले भारत का प्रीमियम घटकर लगभग 27% रह गया है, जो इसके ऐतिहासिक औसत 73% से काफी कम है।

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