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शेयर बाजारों को बूस्टर डोज की जरूरत, इन उपायों से मार्केट को लग सकते हैं पंख

कई डेटा भारतीय अर्थव्यवस्था में मजूबती का संकेत देते हैं। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही (जून तिमाही) में निफ्टी 50 की रेवेन्यू ग्रोथ 20 फीसदी से ज्यादा रही है। टैक्स बाद प्रॉफिट (PAT) 21 फीसदी बढ़ा है। सितंबर में ऑटो सेल्स रिकॉर्ड 25.4 लाख यूनिट्स पर पहुंच गई। लेकिन, इनका असर शेयर बाजारों पर नहीं दिख रहा

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Oct 13, 2026 पर 1:56 PM
शेयर बाजारों को बूस्टर डोज की जरूरत, इन उपायों से मार्केट को लग सकते हैं पंख
बीते एक साल में निफ्टी 10 फीसदी से ज्यादा गिरा है, जबकि सेंसेक्स करीब 12 फीसदी फिसला है।

भारत की इकोनॉमी मजबूत है, लेकिन शेयर बाजारों पर इसका असर नहीं दिख रहा है। कम्प्लीट सर्किल के मैनेजिंग पार्टनर एवं चीफ इनवेस्टमेंट अफसर गुरमीत चड्ढ़ा का कहना है कि सरकार को शेयर बाजारों के सेंटीमेंट में सुधार के लिए टैक्स घटाने के साथ ही रिफॉर्म्स करना चाहिए। उन्होंने इस बारे में कुछ कदम उठाने की सलाह दी।

आंकड़े अर्थव्यस्था में मजबूती की दे रहे गवाही

उन्होंने कहा कि कई डेटा भारतीय अर्थव्यवस्था में मजूबती का संकेत देते हैं। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही (जून तिमाही) में निफ्टी 50 की रेवेन्यू ग्रोथ 20 फीसदी से ज्यादा रही है। टैक्स बाद प्रॉफिट (PAT) 21 फीसदी बढ़ा है। सितंबर में ऑटो सेल्स रिकॉर्ड 25.4 लाख यूनिट्स पर पहुंच गई। कमर्शियसल व्हीकल्स की रिटेल बिक्री पहली बार एक लाख यूनिट्स पहुंच गई। इससे इकोनॉमी में आर्थिक गतिविधियां मजबूत रहने का पता चलता है।

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