यह डिफेंसिव नहीं एग्रेसिव होने का वक्त, सीमेंट और केमिकल स्टॉक्स में निवेश से होगी छप्परफाड़ कमाई

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के देवर्ष वकील का मानना है कि इस करेक्शन में मार्केट के जल्द अपने बॉटम तक पहुंच जाने की उम्मीद है। इसके बाद सेक्टोरल रोटेशन दिख सकता है। अभी सही सेक्टर और स्टॉक्स पर दांव लगाने से अच्छी कमाई हो सकती है

अपडेटेड Mar 05, 2025 पर 5:20 PM
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वकील ने कहा कि अगले 6 से 12 हफ्तों में एचडीएफसी सिक्योरिटीज रिस्क इनवेस्टमेंट जैसे सीमेंट और केमिकल स्टॉक्स में निवेश की सलाह देगी।

बीते 5 महीनों से स्टॉक मार्केट में जारी गिरावट ने इनवेस्टर्स को डरा दिया है। निवेशक डिफेंसिव स्टॉक्स में निवेश के बारे में सोच रहे हैं। लेकिन, एचडीएफसी सिक्योरिटीज के देवर्ष वकील की सोच अलग है। उनका मानना है कि यह आईटी और फार्मा जैसे डिफेंसिव शेयरों में छुपने का नहीं बल्कि एग्रेसिव होने का वक्त है। मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने स्टॉक मार्केट और इनवेस्टमेंट के बारे में कई अहम बातें बताई। उन्होंने कहा कि मार्केट अपने बॉटम के करीब है। अभी थोड़ा रिस्क लेने का मतलब है कि आगे मोटी कमाई हो सकती है।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के रुख में बदलाव

वकील ने कहा कि इस करेक्शन में मार्केट के जल्द अपने बॉटम तक पहुंच जाने की उम्मीद है। इसके बाद सेक्टोरल रोटेशन दिख सकता है। उन्होंने कहा कि अगले 6 से 12 हफ्तों में एचडीएफसी सिक्योरिटीज रिस्क इनवेस्टमेंट जैसे सीमेंट और केमिकल स्टॉक्स में निवेश की सलाह देगा। निवेशक कमोडिटी-फोकस्ड सेगमेंट्स में भी निवेश कर सकेंगे। इससे पहले एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने निवेशकों को आईटी और फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टर्स में निवेश बढ़ाने की सलाह दी थी।


मार्केट के जल्द बॉटम बनाने की उम्मीद

उन्होंने कहा कि अब निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का 30-40 फीसदी हिस्सा बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) कंपनियों को देना चाहिए। इसकी वजह यह है कि इन शेयरों की वैल्यूएशन सही है। उन्होंने कहा कि जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं के बीच मार्केट के अगले कुछ हफ्तों में अपना बॉटम बना लेने की उम्मीद है। बॉटम बनते ही बाजार की चाल बदल जाएगी। इंडिया मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बनने जा रहा है। सरकार PLI जैसी स्कीमों के जरिए देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है।

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अर्निंग्स ग्रोथ से एफआईआई को हुई निराशा

विदेशी फंडों की बिकवाली के बारे में वकील ने कहा कि FII इंडिया ग्रोथ के लिए आते हैं न कि वैल्यू के लिए। पिछले कुछ हफ्तों में कंपनियों की अर्निंग्स ऐसी नहीं रही, जैसा एफएफआई ने उम्मीद की थी। उधर, चीन में सरकार के पैकेज और डीपसेक के एआई इनोवेशन की बदौलत चीनी कंपनियों के स्टॉक्स की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव हो गई। रुपये में कमजोरी से भी एफआईआई इंडियन मार्केट से अपने पैसे निकाल रहे हैं। वकील ने कहा कि जल्द इंडियन कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ फिर से स्ट्रॉन्ग हो जाएगी।

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