यह हफ्ता स्टॉक मार्केट्स (Stock Markets) के लिए ठीक रहा। लगातार चार हफ्ते गिरावट के बाद प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। इस हफ्ते सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) में करीब ढाई फीसदी की तेजी रही। इसकी बड़ी वजह उन शेयरों में खरीदारी रही, जो पिछले कुछ हफ्तों की पिटाई के बाद सस्ता भाव पर उपलब्ध हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल स्टॉक मार्केट्स पर रूस-यूक्रेन क्राइसिस (Russia-Ukraine Crisis) का असर बना रहेगा। इसके अलावा अगले हफ्ते अमेरिका में फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की बैठक होने वाली है। इसके बाद अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंट्रेस्ट रेट बढ़ाने का फैसला लेगा। सबकी निगाहें इस बात पर लगी हैं कि वह ब्याज दर कितना बढ़ाता है। दरअसल, यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद हालात बदल गए हैं।
उधर, पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब ऑयल कंपनियां किसी वक्त पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं। जानकारों का मानना है कि पेट्रोल और डीजल के भाव में कम से कम प्रति लीटर 10 से 14 रुपये की वृद्धि हो सकती है। हो सकता है कि तेल कंपनियां यह वृद्धि एक बार में नहीं कर धीरे-धीरे करें।
अगले हफ्ते होली का त्योहार है। इसलिए बाजार में शुक्रवार यानी 18 मार्च को छुट्टी रहेगी। ऐसे में बाजार में सिर्फ चार दिन ही कारोबार होगा। अभी इनवेस्टर्स बाजार में सावधानी बरत रहे हैं। उन्हें मार्केट के आगे की चाल को लेकर कनफ्यूजन है। अगर आने वाले दिनों में कमोडिटी की कीमतों में नरमी नहीं आती है तो फिर महंगाई आसमान पर पहुंच सकती है।
उधर, विदेशी संस्थागत निवेशक के रुख पर भी बाजार की चाल निर्भर करेगी। अभी तक उनके रुख में बदलाव नहीं आया है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने अच्छी खरीदारी कर बाजार के बहुत ज्यादा दबाव में आने से बचा लिया है। लेकिन, फॉरेन इनवेस्टर्स कमोडिटीज के बढ़ते दाम से चिंतित हैं। उन्हें लगता है कि यह इंडिया जैसे देश के लिए अच्छा नहीं है। इसकी वजह यह है कि इंडिया अपनी 85 फीसदी ईंधन की जरूरत आयात से पूरा करता है।