Stock Split: शेयर मार्केट में अगले हफ्ते दो कंपनियों के शेयर अपने स्टॉक स्प्लिट के चलते सुर्खियों में रहने वाले हैं। इनमें कंप्यूटर एज मैनेजमेंट सर्विसेज (CAMS) और मिनी डायमंड्स इंडिया (Mini Diamonds India) के शेयर शामिल हैं। इन दोनों शेयरों के स्टॉक स्प्लिट के लिए रिकॉर्ड डेट अगले हफ्ते है। जो निवेशक स्टॉक स्प्लिट का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें एक्स-डेट से पहले शेयर अपने पोर्टफोलियो में रखना होगा।
1. CAMS (कंप्यूटर एज मैनेजमेंट सर्विसेज)
CAMS ने अपने शेयरों को 1:5 के अनुपात में विभाजित करने यानी स्टॉक स्प्लिट का ऐलान किया है। इसके तहत कंपनी अपने 10 रुपये के फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर को 2 रुपये के फेस वैल्यू वाले 5 शेयरों में बांटेगी। यानी हर एक शेयर 5 छोटे टुकड़ों में बंट जाएगा। कंपनी के बोर्ड ने इस स्टॉक स्प्लिट के लिए शुक्रवार 5 दिसंबर 2025 को रिकॉर्ड डेट तय किया है।
2. मिनी डायमंड्स इंडिया (Mini Diamonds India)
Mini Diamonds India भी इसी तरह अपने शेयरों का विभाजन करेगी। कंपनी के 10 रुपये के फेस वैल्यू वाले अपने प्रत्येक शेयर को 2 रुपये के फेस वेल्यू वाले पांच शेयरों में बांटेगी। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 13 नवंबर 2025 की बैठक में इसका फैसला लिया था। स्टॉक स्प्लिट के लिए रिकॉर्ड डेट मंगलवार 2 दिसंबर 2025 तय किया गया है। इस तारीख तक जिन निवेशकों के पास शेयर होंगे, वे इस स्टॉक स्प्लिट का लाभ उठा सकेंगे।
मिनी डायमंड्स इंडिया के शेयर शुक्रवार 28 नवंबर को एनएसई पर 0.85 फीसदी की गिरावट के साथ 140 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहे थे। पिछले एक महीने में कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन लगभग सपाट रहा है। हालांकि इस साल की शुरुआत से अब तक इसके शेयरों में करीब 17 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।
स्टॉक स्प्लिट क्या होता है?
स्टॉक स्प्लिट वह प्रक्रिया है जिसमें कोई कंपनी अपने शेयरों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट देती है, ताकि उसके शेयरों की कीमत कम हो जाए लेकिन निवेशक के कुल निवेश की वैल्यू वही बना रहे। मान लीजिए किसी कंपनी का 1 शेयर 1,000 रुपये का है और कंपनी 1:5 के अनुपात में स्टॉक स्प्लिट करती है। इसका मतलब है कि हर 1 शेयर 5 शेयरों में बंट जाएगा।
यानी पहले अगर किसी निवेश पास 1000 रुपये के 1 शेयर थे, तो अब स्टॉक स्प्लिट के बाद उसके पास 200-200 रुपये के 5 शेयर हो जाएंगी। मतलब उसके शेयरों की वैल्यू 1000 रुपये ही बनी रहेगी, बस उसके पास मौजूद शेयरों की संख्या बढ़ जाएगी। कंपनियां आमतौर पर अपने शेयरों की कीमत को घटाने, बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाना और रिटेल निवेशकों को आकर्षित करने के लिए स्टॉक स्प्लिट करती हैं।
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