Stocks to Sell: बाजार में आज थोड़ी सुस्ती छाई हुई है लेकिन एक कारोबारी दिन पहले इसने रिकॉर्ड ऊंचाई का सफर तय किया था। वहीं कंपनियां भी जून तिमाही के नतीजे जारी कर रही हैं। इन दोनों को लेकर ब्रोकरेज फर्म निवेश की स्ट्रैटजी सुझा रहे हैं। घरेलू ब्रोकरेज फर्म एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने तीन कंपनियों के शेयरों को बेचने की सलाह दी है। इन तीन शेयरों में से एक तो टाटा ग्रुप का भी है। ब्रोकरेज के दिए टारगेट के हिसाब से इन्हें नहीं बेचा तो आपको 20 फीसदी तक का घाटा हो सकता है। चेक करें कि इनमें से आपके पोर्टफोलियो में कौन-सा है और ब्रोकरेज ने इन्हें सेल या रिड्यूस रेटिंग क्यों दी है।
ट्रांसपोर्टेशन वर्टिकल में सुस्त ग्रोथ और मीडिया एंड कम्यूनिकेशन्स वर्टिकल में हल्के रुझान के चलते टाटा एलक्सी के लिए जून तिमाही खास नहीं रही। ट्रांसपोर्टेशन वर्टिकल की बात करें तो फैसले लेने में देरी के चलते इसे झटका लगा और अब दूसरी और तीसरी तिमाहियों में इसमें तेजी दिख सकती है। हेल्डी डील पाइपलाइन के साथ दूसरी और तीसरी तिमाहियों में ओईएम प्लेटफॉर्म डील के दम पर ट्रांसपोर्टेशन वर्टिकल में तेजी और हेल्थकेयर वर्टिकल में रिकवरी के चलते टाटा एलक्सी में ग्रोथ के आसार दिख रहे हैं। मार्जिन रिवरी को सब-कांट्रैक्टर पर कम निर्भरता और यूटिलाइजेशन बढ़ने से सपोर्ट मिलेगा।
हालांकि ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY20-23 में 40% CAGR की तुलना में FY23-26E में 17% EPS CAGR की उम्मीद है। इन सबको देखते हुए ब्रोकरेज ने 6420 रुपये के टारगेट पर इसकी सेल रेटिंग बरकरार रखा है जो इसके मौजूदा लेवल से 14 फीसदी डाउनसाइड है। अभी बीएसई पर यह 7504 रुपये पर है।
21 फीसदी की शानदार लोन ग्रोथ, स्थायी मार्जिन और फीस से अच्छी आय के चलते इंडसइंड बैंक के लिए जून तिमाही अब तक की सबसे धमाकेदार तिमाही रही। हालांकि ग्रॉस स्लिपेज बढ़कर 2 फीसदी पहुंच गया और क्रेडिट कॉस्ट भी बहुत हाई (144 बीपीएस) है, जिससे संकेत मिल रहा है कि बैंक का कारोबार रिस्क के ऊंचे वाले छोर पर चल रहा है। बैंक की योजना अगले तीन साल में ब्रांच बढ़ाकर डिपॉजिट ग्रैन्यलैरिटी बढ़ाने की है। ग्रेन्यलैरिटी का मतलब डाइवर्सिफाई से है यानी कि कारोबार के लिए कुछ ही ग्राहक पर निर्भर न हो।
हालांकि ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि हाई-यील्डिंग लोन (लोन और डिपॉजिट का रेश्यो 89 फीसदी) के साथ-साथ सरप्लस लिक्विडिटी के किसी अन्य इंस्ट्रूमेंट के साथ इसके रिप्लेस होने और सामान्य होने के चलते लोन ग्रोथ में सुस्ती आ सकती है। लोन ग्रोथ अभी भी डिपॉजिट ग्रोथ के नीचे बना हुआ है। इन सब वजहों से ब्रोकरेज ने 1140 रुपये के टारगेट पर इसकी रिड्यूस रेटिंग बरकरार रखी है जो इसके मौजूदा भाव से 20 फीसदी नीचे है। अभी यह बीएसई पर 1425.25 रुपये पर है।
फैसले लेने में देरी के चलते कुछ डील के पूरा होने पर असर पड़ा जिसके चलते जून तिमाही में कंपनी का कारोबार प्रभावित हुआ। जून तिमाही में सालाना आधार पर इसका रेवेन्यू 15 फीसदी उछलकर 2301 करोड़ रुपये और कंसालिडेटेड नेट प्रॉफिट 13 फीसदी चढ़कर 311 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि तिमाही आधार पर नेट प्रॉफिट 8 फीसदी और रेवेन्यू 3 फीसदी कम हुआ है। इसके ट्रांसपोर्टेशन वर्टिकल को ऑफ-हाईवे, ईवी और सॉफ्टवेयर-डिफाइन्ड वेईकल्स में तेजी से सपोर्ट मिलेगा। वहीं टेलीकॉम एंड हाई-टेक में में चिप सब-सेगमेंट में कमजोरी के चलते झटका लगा और अभी यह झटका इस तिमाही तक लग सकता है।
वहीं इसके स्मार्ट वर्ल्ड एंड कम्यूनिकेशन (SWC) रेवेन्यू की बात करें तो जून तिमाही में इसमें सीजनलिटी के चलते सुस्ती आई लेकिन इस छमाही यानी अप्रैल-सितंबर 2023 में इसमें सुधार दिख सकता है। कंपनी के सालाना रेवेन्यू में इसकी 60 फीसदी हिस्सेदारी रही है। अब निवेश को लेकर बात करें तो ब्रोकरेज का मानना है कि 33x FY24E पर रिस्क-रिवार्ड खास नहीं दिख रहा है तो इसकी रिड्यूस रेटिंग को बरकरार रखा है। ब्रोकरेज ने इसमें निवेश के लिए 3865 रुपये का टारगेट दिया है जो मौजूदा लेवल से करीब 6 फीसदी डिस्काउंट पर है। बीएसई पर अभी यह 4091 रुपये के भाव पर है।
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