Get App

बाजार में 4-5 साल में 12-15% से ज्यादा रिटर्न की उम्मीद नहीं, पावर और रीन्यूएबल एनर्जी स्पेस में काफी दम

सुनील सिंघानियां का कहना है कि Q1 नतीजों से ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं। निफ्टी अर्निंग्स में 5-6 फीसदी ग्रोथ की उम्मीद है। मार्केट में 12-14 फीसदी अर्निंग्स ग्रोथ जरूरी है। सितंबर तिमाही से नतीजों में सुधार संभव है। लिक्विडिटी का असर 3-6 महीने में दिखेगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 25, 2025 पर 12:59 PM
बाजार में 4-5 साल में 12-15% से ज्यादा रिटर्न की उम्मीद नहीं, पावर और रीन्यूएबल एनर्जी स्पेस में काफी दम
बाजार पर बात करते हुए सुनील सिंघानियां ने कहा कि बाजार में खास ट्रिगर नहीं दिख रहा है। बाजार दिशाहीन नजर आ रहा है

बाजार में लगातार दूसरे दिन भी दबाव देखने को मिल रहा है। निफ्टी 180 अंक से ज्यादा फिसलकर 24900 के नीचे दिख रहा है। HDFC बैंक, बजाज फिनसर्व, RIL और इंफोसिस ने दबाव बनाया है। हालांकि बैंक निफ्टी में निचले स्तरों से रिकवरी आई है। लेकिन मिडकैप-और स्माॉल कैप में कमजोरी देखने को मिल रही है। ऑटो, कैपिटल गुड्स और डिफेंस शेयरों में आज दबाव दिख रहा है। वहीं सरकारी बैंक और फार्मा में खरीदारी का मूड है। सरकारी बैंकों में केनरा बैंक, यूनियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया में रौनक है।

इस माहौल में आज मार्केट गुरु सुनील सिंघानिया ने सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल से बातचीत में कहा कि दूसरी तिमाही से अर्निंग इंजन स्टार्ट होने की उम्मीद है। बैंकिंग-फाइनेंशियल, एग्रोकेमिकल और पावर सेक्टर में दम है। टेस्ला की एंट्री पर बात करते हुए सुनील सिंघानिया ने कहा कि भारतीय इकोनॉमी में मजबूत ग्रोथ देखने को मिल रही है। भारत एक बड़ा मार्केट है। ग्लोबल कंपनियां भारत को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। विकसित देशों को छोड़कर टेस्ला ज्यादा जगह मौजूद नहीं है। टेस्ला वहीं जा रही है, जहां उसे संभावना दिख रही है। वर्ल्ड क्लास कंपनियां अब भारत आना चाहती हैं। घरेलू मैन्युफैक्चरिंग से टेस्ला की कारें सस्ती होंगी। देश में कोस्टल रोड जैसी इंफ्रा की काफी जरूरत है।

आगे अर्बन डिस्क्रिशनरी कंजम्प्शन में सुधार संभव, ऑटो सेक्टर को मिलेगा बूस्ट

ऑटो सेक्टर से क्या उम्मीदें हैं? इसके जवाब में सुनील सिंघानियां ने कहा कि 2 साल से डिस्क्रिशनरी कंजम्प्शन पर दबाव दिख रहा है। सख्त पॉलिसी और महंगाई का कंजम्प्शन पर असर देखने को मिला है। हालांकि 6 महीने से लिक्विडिटी बढ़ी है। साथ ही ब्याज दरें 1 फीसदी घटी हैं। रूरल डिस्क्रिशनरी कंजम्प्शन में सुधार आया है। सुनील सिंघानिया ने आगे कहा कि 6 महीने में करीब 8 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी बढ़ी है। CRR कटौती से सितंबर-दिसंबर में 2.5 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी बढ़ेगी। रूरल डिस्क्रिशनरी कंजम्प्शन में सुधार दिख रहा है। मॉनसून के बाद अर्बन डिस्क्रिशनरी कंजम्प्शन में सुधार संभव है। इससे ऑटो सेक्टर को बूस्ट मिलेगा।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें