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पूरे F&O में नहीं है दिक्कत, F&O बैन के नियमों पर किया जाएगा विचार : SEBI चीफ तुहिन कांत पांडे

SEBI चीफ तुहिन कांत पांडे के कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया है। इस मौके पर उन्होंने शेयर मार्केट, वीकली एक्सपायरी, MTF, IPO जैसे तमाम मुद्दों पर दिल खोलकर बात उन्होंने कि कहा कि पूरे F&O में दिक्कत नहीं है।F&O बैन के नियमों पर विचार किया जाएगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 02, 2026 पर 3:36 PM
पूरे F&O में नहीं है दिक्कत, F&O बैन के नियमों पर किया जाएगा विचार : SEBI चीफ तुहिन कांत पांडे
पांडे ने कहा कि पिछले साल, SEBI ने सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए कई रेगुलेटरी कदम उठाए। अक्टूबर 2024 में उपाय शुरू किए गए, इसके बाद मई 2025 में छह और कदम उठाए गए, जिनमें से आखिरी दिसंबर में लागू हुआ। ऐसे में रेगुलेटर अब इनके असर के आकलन के मोड में है

तुहिन कांता पांडे ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) के चेयरमैन के तौर पर एक साल पूरा कर लिया है। मनीकंट्रोल की सीनियर कंसल्टिंग एडिटर, एन महालक्ष्मी ने उनके साथ बैठकर यह समझने की कोशिश कि पिछला साल कैसा रहा, SEBI अभी किन खास पॉलिसी मुद्दों पर विचार कर रहा है, और उनके दूसरे साल में रेगुलेटर का फोकस कहां पर होगा। यहां हम आपके लिए इस एक्सक्लूसिव इंटरव्यू का संपादित अंश दे रहे हैं।

अकेले ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस में लगभग 58 सुधार किए गए

पिछला साल बहुत मुश्किल साल रहा है। लेकिन 2025 में प्राइमरी मार्केट काफी अच्छा रहा। हम IPO में नंबर वन रहे और वैल्यू, डेट और इक्विटी इश्यू के मामले में नंबर तीन पर रहै। खराब ग्लोबल स्थतियों के बावजूद हमने तालमेल बनाए रखा है। SEBI कई सुधार किए हैं और सच में कहें को 2025 सुधारों का साल रहा।, जिसका मकसद सबसे अच्छा रेगुलेशन लाना था। ट्रांसपेरेंसी, भरोसा, टीमवर्क और टेक्नोलॉजी इन सभी सिद्धांतों को SEBI अधिकारियों ने मार्केट पार्टिसिपेंट्स के साथ मिलकर अच्छी नियम लागू किए। अकेले ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस में लगभग 58 सुधार किए गए हैं।

तुहिन कांता पांडे ने टाइगर ग्लोबल टैक्स केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर उत्पन्न चिंताओं पर कहा कि ऐसे बड़े फैसलों से इन्वेस्टर में स्वाभाविक रूप से चिंता बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि शुरुआती चिंताएं अक्सर दूसरे ट्रांज़ैक्शन परए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के असर से जुड़ी होती हैं। उन्होंने आगे कहा कि विदेशी इन्वेस्टर्स से जुड़ना और बातचीत और पॉलिसी में स्पष्टता के ज़रिए चिंताओं को दूर करना सरकार का काम है। उन्होंने कहा कि यह मामला पहले ही काफी सुलझ चुका था, और CBDT ने इस पर अपनी बात रखी थी। इसके बाद, कई करारो में बदलाव किए गए हैं।

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