मामाअर्थ (Mamaearth) की पैरेंट कंपनी होनासा कंज्यूमर (Honasa Consumer) की मार्केट में एंट्री कुछ खास नहीं रही। मंगलवार 7 नवंबर यानी लिस्टिंग के दिन यह महज 4 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ। इस प्रकार होनासा कंज्यूमर का आईपीओ इस साल के सबसे बुरे आईपीओ में शुमार हो गया। इसके आईपीओ को भी निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला था और आखिरी दिन ही जाकर यह पूरा भर पाया था। हालांकि इसके आईपीओ के फीके सब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग के दिन के परफॉरमेंस को लेकर एनालिस्ट्स बहुत चकित नहीं हुए तो इसकी भी कुछ वजहें हैं।
इस साल के सबसे बेहतर और खराब परफॉरमेंस वाले IPO
मामाअर्थ की पैरेंट कंपनी होनासा कंज्यूमर के आईपीओ की लिस्टिंग इस साल के सबसे खराब में शुमार रही क्योंकि इसने पहले दिन 10 फीसदी से भी कम रिटर्न दिया। वहीं इस साल के सबसे कमजोर एंट्री वाले आईपीओ की बात करें तो एवलॉन टेक इस मामले में टॉप पर है। यह 18 अप्रैल 2023 को लिस्ट हुआ था और पहले दिन करीब 9 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ था। इसका 865 करोड़ रुपये का आईपीओ 2.21 गुना सब्सक्राइब हुआ था।
सबसे चौंकाने वाली एंट्री तो कैडिला फार्मा के आईआरएम एनर्जी की रही। इसका आईपीओ 27.05 गुना सब्सक्राइब हुआ था लेकिन एंट्री के दिन यह 6 फीसदी से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं इस साल सबसे बेहतर परफॉरमेंस आईडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी का रही जो पहले दिन करीब 93 फीसदी प्रीमियम पर बंद हुआ। इसके 567 करोड़ रुपये के आईपीओ को भी शानदार रिस्पांस मिला था और ओवरआल 106.06 गुना भरा था।
Mamaearth को लेकर एक्सपर्ट्स क्या दे रहे सलाह?
अब मामाअर्थ की बात करें तो इसके स्टॉक मार्केट परफॉरमेंस को लेकर एनालिस्ट्स बहुत चकित नहीं हुए। इसकी वजह इसका 10 हजार करोड़ रुपये का वैल्यूएशन है। एनालिस्ट्स के मुताबिक विज्ञापनों पर इसका खर्च सेल्स का 30-40 फीसदी है, जो बहुत अधिक है जबकि ट्रेडिशनल कंज्यूमर कंपनियां करीब 15 फीसदी खर्च करती हैं। इसके अलावा सेल्स के लिए यह ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अधिक निर्भर है। इन वजहों से एनालिस्ट्स को इसका वैल्यूएशन काफी हाई लग रहा है। सिर्फ यही नहीं होनासा को वित्त वर्ष 2023 में 150.9 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ।
ब्रोकरेज स्वास्तिक इनवेस्टमार्ट के हेड (वेल्थ) शिवानी न्याति के मुताबिक होनासा कंज्यूमर अभी नई कंपनी है और भारतीय बीपीसी मार्केट में यह तेजी से उभरी है लेकिन इसकी वित्तीय सेहत चुनौतियों से जूझ रही है। इसके अलावा कारोबार से जुड़े भी कुछ रिस्क हैं। ऐसे में शिवानी ने निवेशकों को मुनाफा लेकर निकलने की सलाह दी है।
मेहता इक्विटीज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) प्रशांत तापसे ने इसमें निवेश को लेकर निवेशकों को सावधान किया है। इसकी वजह ये है कि यह कंपनी घाटे में चल रही है और इसके आईपीओ का अधिकतर हिस्सा ऑफर फॉर सेल का था। इसके अलावा हाई कॉम्पटीशन के साथ-साथ मार्जिन पर भी दबाव है, प्रमोटर की हिस्सेदारी कम है और वित्तीय सेहत कमजोर है।
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