Trade setup for today: बाजार खुलने के पहले इन आंकड़ों पर डालें एक नजर, मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में होगी आसानी
23 नवंबर को भारतीय बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 789.86 करोड़ रुपए की बिकवाली की। वहीं, इस दिन घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 413.75 करोड़ रुपए की खरीदारी की
विज्ञान सावंत का मानना है कि निफ्टी शॉर्ट टर्म में 18,000 – 18,500 के दायरे में घूमता दिखेगा।
23 नवंबर को बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली। हालांकि उतार-चढ़ाव पर कारोबारी दिन में सेंसेक्स-निफ्टी एक सीमित दायरे में ही घूमते नजर आए। नवंबर वायदा की एक्सपायरी के पहले बाजार में सतर्क नजरिया देखने को मिला। Sensex 92 अंकों की बढ़त के साथ 61511 पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 23 अंक की बढ़त लेकर 18267 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी ने कल डेली चार्ट पर बियरिश ओपनिंग मारूबोजू (Bearish Opening Marubozu)पैटर्न बनाया। ये पैटर्न ऊपरी स्तरों पर बिकवाली या मुनाफा वसूली के संकेत होता है। ये शॉर्ट टर्म में बाजार के लिए चिंता का विषय है।
GEPL Capital के विज्ञान सावंत का कहना है कि मोमेंटम इंडीकेटर RSI (relative strength index)60 के स्तर के आसपास घूम रहा है। ये इंडेक्स में निहित तेजी का संकेत है। निफ्टी के लिए 18325 (डे हाई) पर पहला सपोर्ट है। उसके बाद 18442 (3-वीक हाई )पर अगला बड़ा सपोर्ट है। दूसरी तरफ इसके लिए 18139 (20-day SMA) पर पहला और 18000 (key support)पर दूसरा बड़ा सपोर्ट है। विज्ञान सावंत का मानना है कि निफ्टी शॉर्ट टर्म में 18,000 – 18,500 के दायरे में घूमता दिखेगा।
कल दिग्गजों की तरह ही छोटे और मझोले शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली थी। Nifty Midcap और Smallcap इंडेक्स कल 0.3 फीसदी और 0.5 फीसदी बढ़त लेकर बंद हुए थे। कल के कारोबार में मार्केट ब्रेड्थ भी पॉजिटिव रही थी।
यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी। यहां इस बात का ध्यान रखें कि इस स्टोरी में दिए गए ओपन इंटरेस्ट (OI)और स्टॉक्स के वॉल्यूम से संबंधित आंकड़े तीन महीनों के आंकड़ों का योग हैं, ये सिर्फ चालू महीनें से संबंधित नहीं हैं।
Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल
निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 18249 और उसके बाद दूसरा सपोर्ट 18230 और 18200 पर स्थित है। अगर इंडेक्स ऊपर की तरफ रुख करता है तो 18310 फिर 18329 और 18359 पर इसको रजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है।
Nifty Bank
निफ्टी बैंक के लिए पहला सपोर्ट 42599 और उसके बाद दूसरा सपोर्ट 42527 और 42411 पर स्थित है। अगर इंडेक्स ऊपर की तरफ रुख करता है तो 42832 फिर 42903 और 43020 पर इसको रजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है।
कॉल ऑप्शन डेटा
18300 की स्ट्राइक पर 1.44 करोड़ कॉन्ट्रैक्ट का अधिकतम कॉल ओपन इंटरेस्ट देखने को मिला है जो नवंबर सीरीज में अहम रजिस्टेंस लेवल का काम करेगा। इसके बाद 18400 पर सबसे ज्यादा 1.16 करोड़ कॉन्ट्रैक्ट का कॉल ओपन इंटरेस्ट देखने को मिल रहा है। वहीं, 18500 की स्ट्राइक पर 92.62 लाख कॉन्ट्रैक्ट का कॉल ओपन इंटरेस्ट है।
18300 की स्ट्राइक पर काल राइटिंग देखने को मिली। इस स्ट्राइक पर 37.61 लाख कॉन्ट्रैक्ट जुड़े। उसके बाद 18700 पर भी 27.41 लाख कॉन्ट्रैक्ट जुड़ते दिखे हैं।
18200 की स्ट्राइक पर सबसे ज्यादा कॉल अनवाइंडिंग देखने को मिली। इसके बाद 18500 और फिर 18100 की स्ट्राइक पर सबसे ज्यादा कॉल अनवाइंडिंग रही।
पुट ऑप्शन डेटा
18200 की स्ट्राइक पर 95 लाख कॉन्ट्रैक्ट का अधिकतम पुट ओपन इंटरेस्ट देखने को मिला है जो नवंबर सीरीज में अहम सपोर्ट लेवल का काम करेगा। इसके बाद 18200 पर सबसे ज्यादा 78.68 लाख कॉन्ट्रैक्ट का पुट ओपन इंटरेस्ट देखने को मिल रहा है। वहीं, 18300 की स्ट्राइक पर 72.22 लाख कॉन्ट्रैक्ट का पुट ओपन इंटरेस्ट है।
18000 की स्ट्राइक पर पुट राइटिंग देखने को मिली। इस स्ट्राइक पर 9.54 लाख कॉन्ट्रैक्ट जुड़े। उसके बाद 18300 पर भी 12.46 लाख कॉन्ट्रैक्ट जुड़ते दिखे हैं। जबकि 18100 पर 2.02 लाख कॉन्ट्रैक्ट जुड़े हैं।
18200 की स्ट्राइक पर सबसे ज्यादा पुट अनवाइंडिंग देखने को मिली। इसके बाद 17400 और फिर 17000 की स्ट्राइक पर सबसे ज्यादा पुट अनवाइंडिंग रही।
हाई डिलिवरी परसेंटेज वाले शेयर
इनमें Marico, Dabur India, Nestle India, Colgate Palmolive और ICICI Bank के नाम शामिल हैं। हाई डिलिवारी परसेंटेज इस बात का संकेत होता है कि निवेशक उन शेयरों में रुचि दिखा रहे हैं।
23 नवंबर को भारतीय बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 789.86 करोड़ रुपए की बिकवाली की। वहीं, इस दिन घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 413.75 करोड़ रुपए की खरीदारी की।
NSE पर F&O बैन में आने वाले शेयर
24 नवंबर को NSE पर सिर्फ एक स्टॉक Punjab National BankF&O बैन में है। बताते चलें कि F&O सेगमेंट में शामिल स्टॉक्स को उस स्थिति में बैन कैटेगरी में डाल दिया जाता है, जिसमें सिक्योरिटीज की पोजीशन उनकी मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट से ज्यादा हो जाती है।
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