US Markets: अमेरिकी शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर, सेंसेक्स और निफ्टी ऑल-टाईम हाई से कितना दूर?

17 अप्रैल को ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के ऐलान का अमेरिकी शेयर बाजारों पर पॉजिटिव असर पड़ा। कारोबार खत्म होने पर S&P500 1.20 फीसदी यानी 84.78 फीसदी अंक चढ़कर 7,126 पर बंद हुआ। Nasdaq 1.52 फीसदी यानी 365 प्वाइंट्स के उछाल के साथ 24,468 पर क्लोज हुआ

अपडेटेड Apr 18, 2026 पर 1:25 PM
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भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक भी अपने ऑल-टाइम हाई के करीब बढ़ रहे हैं।

अमेरिकी शेयर बाजारों में 17 अप्रैल को बड़ी तेजी दिखी। एसएंडपी500 और नैस्डेक लगातार तीसरे दिन चढ़कर बंद हुए। दोनों ही सूचकांकों ने ऊंचाई के अपने पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। डाओ जोंस भी फरवरी के बाद सबसे हाई लेवल पर है। 17 अप्रैल को ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के ऐलान का अमेरिकी शेयर बाजारों पर पॉजिटिव असर पड़ा। इनवेस्टर्स को उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द स्थायी सीजफायर हो जाएगा।

अमेरिकी बाजारों में शानदार तेजी

कारोबार खत्म होने पर S&P500 1.20 फीसदी यानी 84.78 फीसदी अंक चढ़कर 7,126 पर बंद हुआ। Nasdaq 1.52 फीसदी यानी 365 प्वाइंट्स के उछाल के साथ 24,468 पर क्लोज हुआ। Dow Jones 1.79 फीसदी यानी 868 अंक की तेजी के साथ 49,447 पर पहुंच गया। इस हफ्ते एसएंडपी500 4.53 फीसदी चढ़ा है। नैस्डेक 6.84 फीसदी उछला है, जबकि डाओ जोंस में 3.2 फीसदी मजबूती आई है।


क्रूड में बड़ी गिरावट से मिला सपोर्ट

ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने का असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूट और डब्ल्यूटीआई क्रूड में बड़ी गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड 9.07 फीसदी गिरकर 90.380 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड तो 11.45 फीसदी गिरकर 83.85 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिका-ईरान में लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थीं। एक समय तो क्रूड का भाव 118 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। हालांकि, बाद में इसमें थोड़ी नरमी आई। फिर भी यह लड़ाई शुरू होने के पहले के अपने 72 डॉलर प्रति बैरल के भाव से काफी ऊपर बना रहा। 17 अप्रैल को क्रूड में नरमी से अमेरिकी शेयर बाजार में उछाल आया।

क्रूड में उछाल से बाजारों पर बढ़ा था दबाव

क्रूड में बड़ी गिरावट पूरी दुनिया के लिए अच्छी खबर है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से अमेरिका में भी फ्यूल की रिटेल कीमतें बढ़ी हैं, जिससे आम लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ा है। भारत के लिए क्रूड में गिरावट बड़ी खुशखबरी है। भारत क्रूड की अपनी करीब 90 फीसदी जरूरत इंपोर्ट से पूरी करता है। यह 50 फीसदी गैस का आयात करता है। मध्यपूर्व में लड़ाई की वजह से गैस और ऑयल की सप्लाई में कमी आई है। इससे दोनों की कीमतें बढ़ी हैं। इसका असर आम लोगों पर पड़ा है। खासकर लोगों को एलपीजी की दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, भारत में सरकारी ऑयल कंपनियों ने नॉर्मल पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी नहीं बढ़ाई है।

20 अप्रैल को भारतीय बाजार में भी बड़ी तेजी की उम्मीद

एक्सपर्टस का कहना है कि होर्मुज का खुलना भारत के लिए अच्छी खबर है। इसका असर 20 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार पर दिख सकता है। अप्रैल में भारतीय शेयर बाजार में भी अच्छी रिकवरी दिखी है। यह लगातार दूसरा हफ्ता है, जब भारतीय शेयर बाजार में तेजी दिखी है। इस हफ्ते प्रमुख सूचकांक करीब 1 फीसदी चढ़े हैं। पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजारों में बड़ी तेजी आई थी, जिससे प्रमुख सूचकांक 6 फीसदी तक चढ़ गए थे।

सेंसेक्स-निफ्टी भी ऑल-टाइम हाई की तरफ बढ़ रहे

भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक भी अपने ऑल-टाइम हाई के करीब बढ़ रहे हैं। निफ्टी 50 ने इस साल 2 जनवरी को अपना ऑल-टाइम हाई बनाया था। यह 26,328 अंक पर बंद हुआ था। हालांकि, बाद में इसमें गिरावट आई। यह अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 2000 अंक यानी 7 फीसदी नीचे हैं। 17 अप्रैल को यह 24,353 अंक पर बंद हुआ। उधर, सेंसेक्स 27 सितंबर को 85,836 के अपने ऑल टाइम हाई पर बंद हुआ था। 17 अप्रैल को यह 78,493 पर बंद हुआ। इसका मतलब है कि सेंसेक्स अपने ऑल-टाइम हाई से 7000 अंक यानी 8 फीसदी से ज्यादा नीचे हैं।

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इन वजहों से भारतीय बाजार में आ सकती है तेजी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी फंडों की खरीदारी लौटने पर ही इंडियन मार्केट्स में बड़ी तेजी आएगी। विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में बड़ी बिकवाली की है। हालांकि, गिरावट के बाद भारतीय बाजार की वैल्यूएशन अब लॉन्ग टर्म की औसत वैल्यूएशन से नीचे आ गई है। ऐसे में अगर अमेरिका-ईरान की लड़ाई खत्म हो जाती है और क्रूड की कीमतें नीचे आ जाती है तो भारतीय बाजार में विदेशी फंड्स फिर से निवेश शुरू कर सकते हैं। लेकिन, इसके लिए मार्च तिमाही के कंपनियों के नतीजों में इम्प्रूवमेंट जरूरी है। निवेशकों की नजरें कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ पर लगी हैं।

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