मामले की जानकारी रखने वाले वाले एक सरकारी सूत्र के हवाले से शुक्रवार को पता चला है कि भारत सरकार ने माइनिंग कंपनी हिंदुस्तान जिंक द्वारा कंपनी को अलग-अलग इकाइयों में विभाजित करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। भारत सरकार हिंदुस्तान जिंक में सबसे बड़ी माइनॉरिटी शेयरधारक है। सरकार के पास हिंदुस्तान जिंक में 29.54 फीसदी हिस्सेदारी है। नाम न छापने का अनुरोध करते हुए सूत्रों ने बताया कि जब कंपनी ने जस्ता, सीसा, चांदी और रीसाइक्लिंग कारोबार के लिए अलग इकाइयां बनाने के लिए कंपनी को विभाजित करने का निर्णय लिया तो इस पर उसने सरकार से परामर्श नहीं किया।
