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भारत सरकार ने हिंदुस्तान जिंक की कंपनी को विभाजित करने की योजना को किया खारिज : रिपोर्ट

भारत सरकार हिंदुस्तान जिंक में सबसे बड़ी माइनॉरिटी शेयरधारक है। सरकार के पास जिसके पास हिंदुस्तान जिंक में 29.54 फीसदी हिस्सेदारी है। नाम न छापने का अनुरोध करते हुए सूत्रों ने बताया कि जब कंपनी ने जस्ता, सीसा, चांदी और रीसाइक्लिंग कारोबार के लिए अलग इकाइयां बनाने के लिए कंपनी को विभाजित करने का निर्णय लिया था जिसे सरकार ने रिजेक्ट कर दिया

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 22, 2024 पर 1:39 PM
भारत सरकार ने हिंदुस्तान जिंक की कंपनी को विभाजित करने की योजना को किया खारिज : रिपोर्ट
मार्च में, सरकार ने दो वेदांत कंपनियों को खरीदने के हिंदुस्तान जिंक के एक और प्रस्ताव का विरोध किया था

मामले की जानकारी रखने वाले वाले एक सरकारी सूत्र के हवाले से शुक्रवार को पता चला है कि भारत सरकार ने माइनिंग कंपनी हिंदुस्तान जिंक द्वारा कंपनी को अलग-अलग इकाइयों में विभाजित करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। भारत सरकार हिंदुस्तान जिंक में सबसे बड़ी माइनॉरिटी शेयरधारक है। सरकार के पास हिंदुस्तान जिंक में 29.54 फीसदी हिस्सेदारी है। नाम न छापने का अनुरोध करते हुए सूत्रों ने बताया कि जब कंपनी ने जस्ता, सीसा, चांदी और रीसाइक्लिंग कारोबार के लिए अलग इकाइयां बनाने के लिए कंपनी को विभाजित करने का निर्णय लिया तो इस पर उसने सरकार से परामर्श नहीं किया।

इस प्लान पर हिंदुस्तान जिंक ने कहा था कि यह विभाजन योजना कंपनी के लिए अपार संभावनाओं के द्वार खोलेगी। लेकिन सरकारी सूत्र ने कहा कि इससे शेयरधारकों के लिए वैल्यू क्रिएशन होने की संभावना नहीं है। सूत्रों के मुताबिक हिंदुस्तान जिंक का प्रबंधन करने वाले खान मंत्रालय ने कंपनी को अपनी आपत्ति के बारे में सूचित कर दिया है।

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सरकार के खान मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और हिंदुस्तान जिंक ने इस खबर पर अभी तक कोई सफाई नहीं दी है। मार्च में, सरकार ने दो वेदांत कंपनियों को खरीदने के हिंदुस्तान जिंक के एक और प्रस्ताव का विरोध किया था। सरकार मार्केट रेग्युलेटर सेबी को पत्र लिखकर अपना विरोध जताया था। इसके बाद कंपनी ने ये योजना रद्द कर दी थी। गौरतलब है कि हिंदुस्तान जिंक में वेदांता की 64.9 फीसदी हिस्सेदारी है।

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