Waaree Energies का शेयर धड़ाम, 3 दिन में 22% गिरा भाव, जानें डोनाल्ड ट्रंप की जीत से क्यों सहमे हुए हैं निवेशक

Waaree Energies share price: वारी एनर्जीज के शेयरों में गिरावट का सिलसिला 11 नवंबर को भी जारी रहा। दिन के कारोबार के दौरान कंपनी के शेयर करीब 9.5 फीसदी टूटकर 2,838 रुपये के भाव पर आ गए। पिछले 3 दिन में कंपनी का शेयर लगभग 22 प्रतिशत गिर चुका है। इस गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत को मुख्य वजह माना जा रहा है

अपडेटेड Nov 11, 2024 पर 11:12 PM
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Waaree Energies Shares: डोनाल्ड ट्रंप ने 'पहले दिन' ही रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं पर रोक लगाने का वादा किया है

Waaree Energies share price: वारी एनर्जीज के शेयरों में गिरावट का सिलसिला 11 नवंबर को भी जारी रहा। दिन के कारोबार के दौरान कंपनी के शेयर करीब 9.5 फीसदी टूटकर 2,838 रुपये के भाव पर आ गए। पिछले 3 दिन में कंपनी का शेयर लगभग 22 प्रतिशत गिर चुका है। इस गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत को मुख्य वजह माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि ट्रंप की जीत से अमेरिका के रिन्यूएबल एनर्जी एक्सपोर्ट में गिरावट आ सकती है। इसका असर वारी एनर्जीज सहित उन कंपनियों पर हो सकता है जो एक्सपोर्ट के लिए अमेरिका पर बहुत अधिक निर्भर हैं।

ट्रम्प का ‘पहले दिन’ का वादा

डोनाल्ड ट्रंप ने जीत के बाद दिए अपने भाषण में कहा कि वह राष्ट्रपति पद संभालने के बाद 'पहले दिन' ही रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं पर रोक लगा देंगे। ट्रंप के ऐलान के चलते उद्योग जगत में हलचल मची हुई है और इसके कारण रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों शेयरों में भारी गिरावट आई है। ट्रंप ने ऑपशोर विंड फार्मों के बारे में कहा, “हम यह सुनिश्चित करने जा रहे हैं कि यह पहले दिन ही समाप्त हो जाए।”

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने रिन्यूएबल सेक्टर के खिलाफ रुख अपनाया है। ट्रंप ने अपने पिछले चुनावी अभियान में, ट्रंप ने दावा किया था कि सोलर पैनलों को एनर्जी पैदा करने के लिए भारी जगह चाहिए होती है, जैसे कि पूरा का पूरा रेगिस्तान।


हालांकि, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर ट्रंप के इस मामले पर विचार से असहमत है। सोलर एनर्जी इंडस्ट्री एसोसिएशन के मुताबिक, सोलर पैनलों के लिए वास्तविक भूमि की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम है और आज की तारीख में मौजूद अधिकतर यूटिलिटी-स्केल सोल फार्मा 6,00,000 एकड़ से कम जगह लेते हैं।

एलारा कैपिटल के सीनियर एनालिस्ट, रूपेश सांखे ने मनीकंट्रोल को बताया, "इस बदलाव का सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट्स का एक्सपोर्ट्स करने वाली भारतीय कंपनियों पर पड़ सकता है।" उन्होंने कहा कि इसका शॉर्ट-टर्म में असर न्यूनतम रहने की उम्मीद है, लेकिन मीडियम टर्म यानी अगले 3 से 4 सालों में इस बदलाव का असर अच्छे से महसूस होगा।

एनालिस्ट्स का मानना ​​है कि वारी एनर्जीज जैसी कुछ भारतीय कंपनियों के रेवेन्यू में अमेरिकी एक्सपोर्ट का अहम हिस्सा है। ऐसे में अगर अमेरिका घरेलू स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता देता है तो इन कंपनियों को एक्सपेंशन प्लान में फिर से बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है।

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