शेयर बाजार ने हाल ही अपने रिकॉर्ड लेवल को छुआ है। ऐसे में Indiacharts के फाउंडर और मार्केट एक्सपर्ट रोहित श्रीवास्तव का मानना है कि डिफेंस, कैपिटल गुड्स, मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल सेक्टर के शेयरों की कीमतों में तेजी बनी रहेगी। Moneycontrol को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'FMCG और फार्मा जैसे डिफेंसिव शेयर पिछले 10 साल में मार्केट लीडर रहे, जबकि अब ये पिछड़ गए हैं। यह बदलाव 2020-21 में हुआ। अब मार्केट लीडर के तौर पर नए सेक्टर उभरकर सामने आए हैं और यही बाजार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।'
सरकार कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत खर्च) में आक्रामक तरीके से बढ़ोतरी कर रही है। वित्त वर्ष 2024 के बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर के मद में 37.4 पर्सेंट की बढ़ोतरी की गई और इसके लिए 10,00,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, इंडस्ट्रियल कंपनियों के ऑर्डर में बढ़ोतरी हुई है। फॉरेन ब्रोकिंग फर्म जेफरीज के मुताबिक, इन कंपनियों के ऑर्डर में सालाना आधार पर 15 पर्सेंट से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कोरोना महामारी से पहले यह ग्रोथ महज 5 पर्सेंट थी। HAL, L&T और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे शेयरों में साल 2020 के निचले लेवल से 200-400 पर्सेंट तक की बढ़ोतरी हुई है।
पिछले तीन साल में कैपिटल एक्सपेंडिचर सेगमेंट से जुड़े शेयरों में तेजी से भले ही इनकी वैल्यूएशन ऐतिहासिक औसत के मुकाबले ज्यादा ऊंचे लेवल पर पहुंच गई हो, लेकिन श्रीवास्तव इससे बिल्कुल परेशान नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'मिसाल के तौर पर हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स (HAL) का प्राइस-टू-अर्निंग रेशियो 20 गुना है। इसकी प्रति शेयर अर्निंग ग्रोथ सालाना आधार पर 20 पर्सेंट से ज्यादा है। इसका मतलब है कि इसका PEG रेशियो तकरीबन 1 है, लिहाजा इसे महंगा नहीं कहा जा सकता।' EG का आकलन प्राइस-टू-अर्निंग रेशियो को कंपनी की अर्निंग ग्रोथ से भाग देकर निकाला जाता है।
बैंकिंग शेयरों के बारे में?
बाजार के बाकी एक्सपर्ट्स की तरह श्रीवास्तव भी बैंकिंग शेयर को लेकर काफी पॉजिटिव हैं। उनका कहना था कि साफ-सुथरी बैलेंस शीट और कम एनपीए वाले बैंकों के शेयरों की परफॉर्मेंस बेहतर रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, 'निवेशकों को पूरे बैंकिंग बास्केट पर फोकस नहीं करना चाहिए। उन्हें चुनिंदा बैंकिंग शेयरों में निवेश करना चाहिए। '
श्रीवास्तव का मानना है कि अक्टूबर 2020 से मार्च 2023 के दौरान बुल मार्केट में कंसॉलिडेशन का दौर था। उन्होंने कहा, 'फिलहाल, हम तेजी के तीसरे दौर में हैं। पहले दौर 2020 में था, जब मार्केट 8,000 से 18,000 पर पहुंच गया। इसके बाद दूसरे दौर में 18 महीने लंबा कंसॉलिडेशन चला जिसकी अवधि मार्च 2023 तक थी।' श्रीवास्तव को उम्मीद है कि तीसरे दौर में सूचकांक पहले दौर के मुकाबले डबल ऊंचाई पर पहुंच जाएगा। इसका मतलब अगले 2-3 साल में निफ्टी 35,000 का टारगेट पूरा कर सकता है।