शेयर बाजार में करेक्शन के बाद अब निवेश का है सही मौका? एक्सपर्ट्स से समझें निवेश की रणनीति

Stock Market Valuation: बाजार की मजबूती इस बात पर टिकी है कि कंपनियां कितना मुनाफा कमा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 और 2028 में कमाई में डबल डिजिट की ग्रोथ देखने को मिल सकती है। जब शेयर की कीमत गिरती है और कंपनी का मुनाफा बढ़ता है, तो वैल्यूएशन अपने आप आकर्षक हो जाती है

अपडेटेड Apr 16, 2026 पर 12:10 PM
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वैल्यूएशन का सीधा मतलब है कि कंपनी की कमाई के मुकाबले उसका शेयर कितना सस्ता या महंगा है

Stock Market Valuations: भारतीय शेयर बाजार कुछ समय पहले तक काफी 'महंगा' लग रहा था। पर अब एक बड़े करेक्शन के बाद मार्केट निवेश के लिए आकर्षक नजर आने लगा है। सितंबर 2024 के उच्चतम स्तर से बाजार में आई गिरावट और कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन ने निवेशकों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। मिराए एसेट म्यूचुअल फंड के हेड ऑफ रिसर्च हर्षद बोरावाके और आनंद राठी वेल्थ की श्वेता रजनी के इनपुट्स के साथ समझिए बाजार का मौजूदा हाल।

क्यों सस्ता और बेहतर लगने लगा है बाजार?

वैल्यूएशन का सीधा मतलब है कि कंपनी की कमाई के मुकाबले उसका शेयर कितना सस्ता या महंगा है। सितंबर 2024 के हाई से इंडेक्स में करीब 20-30% तक की गिरावट देखी गई है। वित्त वर्ष 2025 थोड़ा सुस्त रहा, लेकिन 2026 की शुरुआती तीन तिमाहियों में कंपनियों की कमाई मजबूत हुई है। निफ्टी 50 अब अपने लॉन्ग-टर्म औसत से करीब 10% नीचे ट्रेड कर रहा है, जिससे यह 'ओवरहीटेड' यानी जरूरत से ज्यादा महंगा नहीं रह गया है।


कंपनियों की कमाई का अच्छा आउटलुक

बाजार की मजबूती इस बात पर टिकी है कि कंपनियां कितना मुनाफा कमा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 और 2028 में कमाई में डबल डिजिट की ग्रोथ देखने को मिल सकती है। जब शेयर की कीमत गिरती है और कंपनी का मुनाफा बढ़ता है, तो वैल्यूएशन अपने आप आकर्षक हो जाती है।

भारतीय इकोनॉमी के मजबूत संकेत

ग्लोबल लेवल पर तनाव के बावजूद फिलहाल भारत की घरेलू स्थिति बेहतर है:

GDP ग्रोथ: भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7% के बीच रहने का अनुमान है।

स्थिर महंगाई: महंगाई दर फिलहाल RBI के तय दायरे में है।

खपत और क्रेडिट: बाजार में कंजप्शन और बैंकों से कर्ज लेने की रफ्तार स्थिर बनी हुई है।

बेहतर आउटलुक के बीच कुछ जोखिम भी हैं जिन पर नजर रखना जरूरी है। वैश्विक संघर्षों की वजह से सप्लाई चेन में दिक्कत आ सकती है। कच्चे तेल और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ सकती है, जिसका असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है। वैसे विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय बाजार में यह एक 'हेल्दी करेक्शन' है, जो ग्लोबल फैक्टर्स की वजह से है, न कि भारतीय अर्थव्यवस्था की कमजोरी के कारण।

अब क्या हो निवेश की रणनीति?

अगर आप इस बाजार में पैसा लगाना चाहते हैं, तो इन दो मंत्रों एक साथ पैसा न लगाएं और SIP जारी रखें, को याद रखें। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अपना सारा पैसा एक बार में लगाने के बजाय उसे अगले कुछ हफ्तों या महीनों में किश्तों में बांटकर निवेश करें। साथ ही जो लोग पहले से SIP कर रहे हैं, उनके लिए यह गिरावट फायदेमंद है क्योंकि उन्हें कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलेंगी। और ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, ऐसी गिरावट के बाद बाजार अक्सर 2 से 3 महीने में रिकवर कर जाता है।

डिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट्स/ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

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