Why Market Fall: स्टॉक मार्केट में आज काफी उथल-पुथल रही। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 (Nifty 50) और बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) इंट्रा-डे में करीब डेढ़ फीसदी तक फिसल गए थे। दोपहर के बाद हालांकि कारोबार में कुछ रिकवरी दिखी लेकिन फिर भी ज्यादा संभल नहीं पाए और आधे फीसदी से अधिक गिरावट के साथ बंद हुए हैं। घरेलू मार्केट में गिरावट की कई वजहें रही जिसके बारे में नीचे बताया जा रहा है लेकिन पहले ये समझ लें कि यह गिरावट सिर्फ यहीं नहीं बल्कि दुनिया भर के बाजारों में दबाव दिख रहा है।
निफ्टी आज डेढ़ फीसदी टूटकर 16,828.35 पर आ गया था जो दिन के आखिरी में 0.65 के गिरावट के साथ 16,988.40 पर बंद हुआ है। वहीं सेंसेक्स भी 57,084.91 पर आ गया था लेकिन दिन के आखिरी में 0.62 फीसदी की गिरावट के साथ 57,628.95 पर बंद हुआ है। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 1.4 फीसदी, हॉन्ग कॉन्ग का हैंग सेंग 3.2 फीसदी; यूरोपीय बाजारों में फ्रांस का सीएसी और जर्मनी का डीएएक्स 1.3 फीसदी से अधिक, ब्रिटेन का एफटीएसई 1 फीसदी फिसला है। अमेरिका में शुक्रवार को एसएंडपी 1.1 फीसदी और नास्डाक 0.7 फीसदी टूट गए। अब यहां मार्केट में गिरावट की वजहें यहां दी जा रही है।
इस हफ्ते अमेरिकी फेड की बैठक
अमेरिका में सिलिकॉन वैली बैंक और सिग्नेचर बैंक के डूबने के बाद माना जा रहा था कि अमेरिकी फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर लगाम कसेगा। हालांकि अब अनुमान है कि यह 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। इसका इक्विटीज पर निगेटिव असर पड़ सकता है।
बैंकिंग शेयरों में बिकवाली
स्विटजरलैंड के यूबीएस ग्रुप ने अपने प्रतिद्वंद्वी क्रेडिट स्विस का अधिग्रहण कर लिया है और दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों ने डॉलर के नए लिक्विडिटी मानकों को लागू कर दिया है, इसके बावजूद बैंकिंग शेयरों में गिरावट है। निवेशकों और स्ट्रैटजिस्ट्स का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में इसमें अभी और गिरावट हो सकती है।
पिछले दस कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल के भाव 18 फीसदी से अधिक टूट चुके हैं। वैश्विक स्तर पर बैंकिंग क्राइसिस की आशंका के चलते कमोडिटीज जैसे रिस्की एसेट्स में घटती दिलचस्पी के चलते इसके भाव टूट रहे हैं। Emkay की रिपोर्ट के मुताबिक उद्योगों में इसके इस्तेमाल में कटौती, चीन में कंजम्प्शन ग्रोथ पर कंट्रोल ने इसे और कमजोर किया है। सोमवार को अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड फ्यूचर्स 2.8 फीसदी गिरकर 64.89 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो दिसंबर 2021 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
बढ़ती गर्मी के चलते देश के इकनॉमिक ग्रोथ पर झटके का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि पीएम मोदी की प्रमुख सलाहकार और नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकनॉमिक रिसर्च की प्रमुख पूनम गुप्ता का मानना है कि भारतीय इकनॉमी मौसम से जुड़ी किसी भी चुनौती से निपटने में सक्षम है। इस भरोसे के बावजूद दिसंबर 2022 तिमाही में देश की इकनॉमिक ग्रोथ सुस्त होकर 4.4 फीसदी पर आ गई। अगर खराब मौसम के चलते फसलों पर आने वाले हफ्तों में असर दिखता है तो यह महंगाई नियंत्रण करने की आरबीआई की कोशिशों को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।