RBI कल रेपो रेट में करेगा बदलाव? इन 5 फैसलों पर टिकी शेयर बाजार की नजरें

RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन-दिवसीय बैठक पर बाजार और निवेशकों की निगाहें टिकी हुई हैं। इस बैठक के नतीजे कल 8 अप्रैल को आएंगे। यह मौजूदा वित्त वर्ष और मिडिल ईस्ट में जंग शुरू होने के बाद आरबीआई की पहली पॉलिसी समीक्षा बैठक है। इस चलते इस बैठक के फैसलों का महत्व और बढ़ गया है

अपडेटेड Apr 07, 2026 पर 6:31 PM
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RBI MPC Meeting: सबसे अधिक तेजी आईटी, मेटल और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली

RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन-दिवसीय बैठक पर बाजार और निवेशकों की निगाहें टिकी हुई हैं। इस बैठक के नतीजे कल 8 अप्रैल को आएंगे। यह मौजूदा वित्त वर्ष और मिडिल ईस्ट में जंग शुरू होने के बाद आरबीआई की पहली पॉलिसी समीक्षा बैठक है। इस चलते इस बैठक के फैसलों का महत्व और बढ़ गया है। माना जा रहा है कि मिडिल-ईस्ट में छिड़ा संघर्ष आरबीआई के महंगाई और आर्थिक ग्रोथ के अनुमानों को प्रभावित कर सकता है।

इससे पहले मनीकंट्रोल के एक सर्वे में अर्थशास्त्रियों, ट्रेजरी हेड्स और मार्केट एक्सपर्ट्स ने अनुमान जताया था कि RBI इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, RBI अपने बयानों में मौजूदा वित्त वर्ष 2027 के लिए क्या संकेत देता है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। इसी से पता चलेगा कि आने वाले समय में RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कैसी रह सकती है।

इसलिए निवेशकों को इस बैठक की कुछ खास बातों पर ध्यान देना चाहिए।


1. महंगाई का अनुमान रहेगा अहम

इस बैठक में आरबीआई वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई (CPI) का अनुमान पेश करेगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह आंकड़ा 4% से 4.7% के बीच रह सकता है। हाल ही में नए आधार वर्ष (2024) के साथ जारी आंकड़ों के अनुसार फरवरी में महंगाई 3.2% रही, जो जनवरी के 2.7% से अधिक है। फूड आइटम्स और सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी इसका मुख्य कारण रही है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर भी RBI के महंगाई अनुमानों पर दिख सकता है।

2. ग्रोथ आउटलुक पर भी फोकस

GDP ग्रोथ के अनुमान भी इस बैठक का अहम हिस्सा होंगे। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, FY27 में भारत की आर्थिक ग्रोथ FY26 के मुकाबले थोड़ी धीमी रह सकती है। जहां पहले 7% के आसपास ग्रोथ की उम्मीद थी, वहीं अब इसे घटाकर करीब 6.8% तक आंका जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर व्यापार, निवेश और खपत पर पड़ सकता है, जिससे ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।

3. कच्चे तेल की कीमतें बनेंगी बड़ा फैक्टर

फरवरी के अंत में मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80% विदेशों से आयात करता है। इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी महंगाई और चालू खाते के घाटे को बढ़ा सकती है। इसलिए आरबीआई की ओर से तेल की कीमतों के अनुमान और उनके असर पर टिप्पणी बेहद अहम होगी।

4. रुपये की चाल पर नजर

हाल के दिनों में भारतीय रुपया काफी दबाव में रहा है और एक समय यह 95 प्रति डॉलर के स्तर के करीब पहुंच गया था। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला और यह 93 के स्तर तक वापस आया। फिर भी एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है। आरबीआई की ओर से फॉरेक्स मार्केट में उठाए गए कदमों और संभावित नई नीतियों पर भी नजर रहेगी।

5. लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर क्या होगा कदम

बैंकिंग सिस्टम में तरलता (Liquidity) भी घटकर हाल के महीनों के निचले स्तर पर आ गई है। आरबीआई पहले ही ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) और वेरिएबल रेट रेपो (VRR) के जरिए बाजार में नकदी डाल चुका है। मार्च में ही करीब ₹2.4 लाख करोड़ की लिक्विडिटी सिस्टम में डाली गई। ऐसे में संभावना है कि केंद्रीय बैंक आगे भी लिक्विडिटी सपोर्ट के लिए कदम उठा सकता है।

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