Wipro Headcount in Q1: आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो के लिए जून तिमाही मिली-जुली रही। हालांकि हेडकाउंट के मामले में इसमें छह तिमाहियों की गिरावट थम गई। जून तिमाही में कंपनी ने 337 एंप्लॉयीज जोड़े। यह ऐसे समय में आया, जब विप्रो अपने लैटरल और कैंपस हायरिंग मॉडल को फिर से एसेस कर रही है ताकि मौजूदा एंप्लॉयीज के यूटिलाइजेशन रेट को सुधारने पर फोकस किया जा सके ताकि मार्जिन बढ़े। जून 2024 तिमाही के आखिरी में विप्रो में 2,34,391 एंप्लॉयीज रहे जो पिछले साल जून तिमाही के मुकाबले 15,367 कम रही। जून 2023 तिमाही के आखिरी में विप्रो के 2,49,758 एंप्लॉयीज थे।
पिछले बारह महीने (लास्ट ट्वेल्व मंथ-LTM) के बेसिस पर मार्च तिमाही के मुकाबले जून तिमाही में एट्रीशन रेट में हल्की गिरावट आई और यह 14.1 फीसदी पर आ गया। एट्रीशन रेट यानी कंपनी छोड़ने वाले एंप्लॉयीज की दर। मार्च तिमाही में यह 14.2 फीसदी पर था।
बाकी आईटी कंपनियों की क्या है हालत?
अब देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की बात करें तो जून तिमाही में इसके 5452 नेट एंप्लॉयीज जोड़े हैं और लगातार तीन तिमाहियों में गिरावट का रुझान पलटा है। हालांकि तिमाही आधार पर ओवरऑल हेडकाउंट में 1759 की गिरावट आई। वहीं इंफोसिस की बात करें तो इसके 1908 और एचसीएल के 8080 एंप्लॉयीज तिमाही आधार पर घटे हैं। सिर्फ एलटीआई माइंडट्री ही ऐसी आईटी कंपनी रही जिसमें तिमाही आधार पर एंप्लॉयीज की संख्या बढ़ी और इसने 284 के करीब एंप्लॉयीज जोड़े।
विप्रो ने आज वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2024 के नतीजे जारी किए। कंपनी को जून तिमाही में मुनाफा तो अधिक हुआ है लेकिन रेवेन्यू गिर गया। एक्सचेंज फाइलिंग में दी गई जानकारी के मुताबिक विप्रो का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.63 फीसदी उछलकर 3003.2 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं इस दौरान कंसालिडेटेड ऑपरेशनल रेवेन्यू 3.79 फीसदी फिसलकर 21,963.8 करोड़ रुपये पर आ गया।