Wipro में 3% का तगड़ा उछाल, 8 साल की इस डील पर शेयर बने रॉकेट

Wipro Shares: देश की दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो ने ओलम ग्रुप के साथ आठ वर्षों की एक डील की है। $100 करोड़ की इस डील के जरिए विप्रो के एआई सर्विसेज का दायरा फूड और एग्री-बिजनेस सेक्टर तक फैला है। इसके अलावा कंपनी इसके तहत एक कंपनी का अधिग्रहण भी करेगी। जानिए इस डील में क्या-क्या है और विप्रो को इससे कैसे फायदा मिलेगा

अपडेटेड Apr 06, 2026 पर 4:18 PM
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विप्रो ने ओलम ग्रुप के साथ आठ साल की लॉन्ग-टर्म ट्रांसफॉर्मेशनल डील की है। इस कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू $100 करोड़ से अधिक होने की उम्मीद है जिसमें $80 करोड़ का सुनिश्चित खर्च शामिल है।

Wipro Shares: टेमासेक होल्डिंग्स (Temasek Holdings) के निवेश वाली सिंगापुर की फूड और एग्री-बिजनेस कंपनी ओलम ग्रुप के साथ विप्रो ने लंबी और बड़ी साझेदारी की है। दुनिया भर में करीब 40 हजार एंप्लॉयीज वाले ओलम ग्रुप के साथ विप्रो की डील ने इसके शेयरों की चमक बढ़ा दी है। शुरुआती कारोबार में यह % उछल पड़ा। इस तेजी का कुछ निवेशकों ने फायदा उठाया जिससे भाव थोड़े नरम पड़े लेकिन निचले स्तर पर खरीदारी के चलते अब भी यह काफी मजबूत बना हुआ है। आज बीएसई पर यह 1.23% की बढ़त के साथ ₹197.20 (Wipro Share Price) पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में यह 3.29% चढ़कर ₹201.20 पर पहुंच गया था।

कैसी डील की है Wipro ने?

विप्रो ने ओलम ग्रुप के साथ आठ साल की लॉन्ग-टर्म ट्रांसफॉर्मेशनल डील की है। इस कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू $100 करोड़ से अधिक होने की उम्मीद है जिसमें $80 करोड़ का सुनिश्चित खर्च शामिल है। एग्रीमेंट के तहत विप्रो कंसल्टिंग-आधारित और एआई-पावर्ड एप्रोच के जरिए एंड-टू-एंड ट्रांसफॉर्मेशन सर्विसेज मुहैया कराएगा। दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो इस एग्रीमेंट के तहत अपने विप्रो इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म सुईट, साझेदारियों और इंडस्ट्री एक्सपर्टाइज के जरिए ओलम के मुख्य ऑपरेशंस को मजबूत करेगी और प्रतिस्पर्धियों के ऊपर इसे लॉन्ग-टर्म में फायदा पहुंचाएगी। विप्रो और ओलम ग्रुप के बीच साझेदारी का दायरा ओलम के फार्म-टू-फोर्क वैल्यू चेन तक होगा जिसमें खेती, पूर्वानुमान, कारोबार, सप्लाई चेन और कस्टमर एंगेजमेंट जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य एफिसिएंसी, रीसाइलेंस और स्केलेबल ग्रोथ में सुधार है।


विप्रो इस समझौते के तहत माइंडस्प्रिंट का अधिग्रहण भी करेगी, जिस पर नियामकीय मंजूरी लेनी होगी। यह लेन-देन अगले वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के आखिरी तक पूरा होने की उम्मीद है और माइंडस्प्रिट इस सौदे के पूरा होते ही विप्रो की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बन जाएगी। इसमें 3200 से अधिक एंप्लॉयीज काम करते हैं, जिसमें से अधिकतर भारत से हैं। यह ओलम के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से गहराई से जुड़ी है।

ओलम ग्रुप के सीईओ सनी वर्गीज (Sunny Verghese) का कहना है कि विप्रो के साथ साझेदारी से माइंडस्प्रिंट का सेक्टर एक्सपर्टाइज और विप्रो की वैश्विक पहुंच और एआई की क्षमता से मिलकर इसके ट्रांसफॉर्मेशन में तेजी आएगी और इसके चल रहे बिजनेस रीऑर्गेनाइजेशन को सहारा मिलेगा। विप्रो के सीईओ श्रीनि पल्लिया का कहना है कि इस सौदे से कंपनी की फार्म-टू-फोर्क क्षमता मजबूत हुई है और इसे एआई सर्विसेज का दायरा फूड और एग्री-बिजनेस सेक्टर तक फैला है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

विप्रो के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है और महज तीन महीने में निवेशकों की करीब 32% पूंजी घटा दी। पिछले साल 22 दिसंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹273.15 पर था जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल पर शेयरों की तेजी थमी और महज तीन महीने में यह 31.72% टूटकर 30 मार्च 2026 को ₹186.50 पर आ गया जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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