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Yash Optics IPO Listing: लेंस कंपनी की धांसू एंट्री, 11% प्रीमियम पर लिस्टिंग के बाद अपर सर्किट

Yash Optics & Lens IPO Listing: लेंस कंपनी यश ऑप्टिक्स एंड लेंस (Yash Optics & Lens) की कारोबारी सेहत लगातार मजबूत हो रही है। इसके आईपीओ को भी निवेशकों का तगड़ा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल 42 गुना से अधिक सब्सक्राइब हुआ था। इस आईपीओ के तहत सिर्फ नए शेयर जारी हुए हैं। चेक करें कंपनी की कारोबार सेहत कैसी है और आईपीओ के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी कैसे करेगी?

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Apr 08, 2024 पर 3:56 PM
Yash Optics IPO Listing: लेंस कंपनी की धांसू एंट्री, 11% प्रीमियम पर लिस्टिंग के बाद अपर सर्किट
Yash Optics & Lens IPO Listing: यश ऑप्टिक्स एंड लेंस का ₹53.15 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 27 मार्च से 3 अप्रैल तक खुला था। आज इसके शेयरों की लिस्टिंग हुई है। (File Photo- Pexels)

Yash Optics & Lens IPO Listing: लेंस बनाने वाली यश ऑप्टिक्स एंड लेंस (Yash Optics & Lens) के शेयरों की आज NSE के SME प्लेटफॉर्म पर धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 42 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत 81 रुपये के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज NSE SME पर इसकी 90.00 रुपये पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 11 फीसदी का लिस्टिंग गेन (Yash Optics & Lens Listing Gain) मिला। एंट्री के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर यह 94.50 रुपये (Yash Optics & Lens Share Price)  के अपर सर्किट पर पहुंच गया। मुनाफावसूली के चलते भाव में थोड़ी नरमी आई और दिन के आखिरी में यह 92.60 रुपये पर बंद हुआ यानी कि पहले दिन आईपीओ निवेशक अब 14.32 फीसदी मुनाफे में हैं।

Yash Optics & Lens IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

यश ऑप्टिक्स एंड लेंस का ₹53.15 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 27 मार्च से 3 अप्रैल तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 42.17 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 19.88 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 85.27 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 32.46 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले 65,61,600 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल बैकवार्ड इंटीग्रेशन के लिए मैनुफैक्चरिंग यूनिट सेटअप करने, मौजूदा मैनुफैक्चरिंग यूनिट के लिए प्लांट और मशीनरी की खरीदारी, कर्ज चुकाने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में होगा।

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