यस बैंक की तस्वीर बीते 5 सालों में पूरी तरह से बदल गई है। मार्च 2020 में यस बैंक को मोरेटोरियम में डाल दिया गया था। एसबीआई की अगुवाई में कुछ बैंकों ने मिलकर यस बैंक को डूबने से बचा लिया। आज यस बैंक तेज ग्रोथ के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस मुश्किल वक्त (बीते 5 साल) में यस बैंक का नेतृत्व एमडी और सीईओ प्रशांत कुमार ने किया। मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने यस बैंक के इस कायाकल्प की कहानी विस्तार से बताई। उन्होंने बताया कि मुश्किल वक्त का सामना करने के लिए यस बैंक ने किस तरह अपनी रणनीति बदली। यस बैंक के इस उतारचढ़ाव को हम उसके शेयरों की कीमतों के जरिए समझ सकते हैं।
393 रुपये से गिरकर 10.95 रुपये पर आ गया था स्टॉक
Yes Bank का स्टॉक 17 अगस्त, 2018 को 393 रुपये का था। क्राइसिस के बाद यह गिरकर सितंबर 2021 में 10.95 रुपये पर आ गया था। अभी इसका भाव 17.77 रुपये है। हालांकि, शेयर की कीमत अब भी पीक से काफी नीचे है, लेकिन बैंक का कामकाज पटरी पर आ चुका है। यह नई उड़ान भरने के लिए तैयार है। प्रशांत कुमार के नेतृत्व में यस बैंक ग्रोथ की तय स्ट्रेटेजी पर आगे बढ़ रहा है। ग्राहकों को अच्छी सेवाएं मिल रही हैं।
यस बैंक के PCA में जाने से बचाने पर था फोकस
प्रशांत कुमार ने कहा कि हमारा फोकस आरबीआई के नियमों के पालन पर था। हम नहीं चाहते थे कि नियमों का पालन नहीं करने की वजह से हम नई मुसीबत में फंस जाए। इसके लिए यस बैंक ने कम यील्ड लेकिन सेक्योर्ड रिटेल लोन पर फोकस करने के फैसला किया। मोरेटोरियम में जाने के बाद हम RBI के प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) से बचना चाहते थे। रिटेल सेक्योर्ड रिटेल लोन पर हमारे फोकस का नतीजा यह हुआ कि यस बैंक की कॉर्पोरेट बुक 95,000 करोड़ रुपये से घटकर 53,000 करोड़ रुपये पर आ गई। उन्होंने कहा कि अगर हमने सेक्योर्ड रिटेल लोन पर फोकस नहीं बढ़ाया होता तो हमारी लोन बुक और घट सकती थी। हमारा नेट NPA रेशियो 6 फीसदी से ऊपर जा सकता था।
यस बैंक के नेट एनपीए को 6 फीसदी तक नहीं गिरने दिया
साल 2020 में Yes Bank की खराब स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तब नेट NPA 5.03 फीसदी और ग्रॉस NPA 16.8 फीसदी पर पहुंच गया था। आरबीआई के नियम के मुताबिक, अगर किसी बैंक का नेट NPA 6 फीसदी या उससे ज्यादा हो जाता है तो उसे प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) के तहत डाल दिया जाता है। लेकिन, कुमार के नेतृत्व ने यस बैंक को पीसीए के तहत जाने से बचा लिया। सेक्योर्ड रिटेल लोन पर फोकस के बारे में उन्होंने कहा कि हमें पता था कि नए कार लोन और प्राइस मॉर्टगेज लोन में हमें ज्यादा मार्जिन नहीं मिलेगा। लेकिन, हमारे पास कोई विकल्प नहीं था।
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सेक्योर्ड रिटेल लोन पर फोकस का मिला फायदा
उन्होंने कहा कि हमें अपनी लोन बुक बढ़ानी थी, लेकिन हम रिस्क वाले एसेट को बढ़ाना नहीं चाहते थे। नए कार लोन और प्राइम मॉर्टगेज लोन (होम लोन) में मार्जिन कम था, लेकिन हम पीएसए के तहत जाने से बच गए। तब बैंक ने डायरेक्ट सेलिंग एजेंट्स पर अपनी निर्भरता बढ़ाई। इससे रिटेल फ्रंट पर लोन बुक बढ़ाने में काफी मदद मिली। इसका नतीजा यह हुआ कि कुल रिटेल लोन में DSA के जरिए आने वाले बिजनेस की हिस्सेदारी बढ़कर 71 फीसदी तक पहुंच गई।