Zomato गोल्ड प्रोग्राम के जरिए Swiggy का मार्केट शेयर हथिया रहा है, जानिए आगे निवेशकों के लिए सही स्ट्रैटेजी क्या होगी

एक चिंता बरकरार: HSBC के एनालिस्ट्स के मुताबिक, मार्च तिमाही से गोल्ड प्रोग्राम Zomato की बैलेंस शीट पर असर डाल सकता है। यह प्रति ऑर्डर 10-12 रुपए के बीच रह सकता है। इससे आने वाले दिनों में निवेशकों की फिक्र बढ़ सकती है

अपडेटेड Mar 22, 2023 पर 2:25 PM
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Zomato Share Price: आने वाली तिमाहियों में कंपनी Zomato Gold के असर को जज्ब कर लेगी जिसके बाद EBITDA मार्जिन में सुधार होगा
     
     
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    Zomato Share Price: फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो का Gold Loyalty प्रोग्राम सुपरहिट साबित हो रहा है। अपनी इस स्कीम से Zomato प्रतिद्वंदी कंपनी Swiggy का मार्केट शेयर हथिया रही है। HSBC ने अपनी एक रिपोर्ट में इस दिलचस्प तथ्य का खुलासा किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, फिस्कल ईयर 2024 में Zomato की मार्केट हिस्सेदारी 57 फीसदी और Swiggy का मार्केट शेयर घटकर 43 फीसदी तक रह सकती है। HSBC के एनालिस्ट्स के मुताबिक, मार्च तिमाही से गोल्ड प्रोग्राम Zomato की बैलेंस शीट पर असर डाल सकता है। यह प्रति ऑर्डर 10-12 रुपए के बीच रह सकता है। इससे आने वाले दिनों में निवेशकों की फिक्र बढ़ सकती है।

    HSBC के नोट के मुताबिक, "वैसे हमारा मानना है कि Zomato लोअर कॉस्ट और हायर टेक-रेट्स के जरिए गोल्ड प्रोग्राम के नेगेटिव असर को कम कर सकता है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी Zomato Gold के असर को जज्ब कर लेगी जिसके बाद EBITDA मार्जिन में सुधार होगा।"

    इस साल जनवरी में Zomato ने तीन महीने के लिए लॉयल्टी प्रोग्राम (Loyalty Programme) लॉन्च किया था जिसका फोकस फूड डिलीवरी पर था। इस स्कीम की शुरुआती कीमत 149 रुपए थी। पिछले कुछ सालों में Zomato का यह चौथा लॉयल्टी प्रोग्राम था। 2021 में कंपनी ने प्रो-प्लस लॉन्च किया था। उससे पहले 2020 में कंपनी ने Pro लॉन्च किया था जिसे ओरिजनल Zomato Gold Membership की जगह लाया गया था।


    ब्रोकरेज फर्म को ये भी उम्मीद है कि मार्च तिमाही में फूड डिलीवरी मार्केट की ग्रोथ 9 फीसदी रह सकती है। जबकि पहले इसकी ग्रोथ 15 फीसदी रहने की उम्मीद थी।

    HSBC के एनालिस्ट्स ने कहा है, "फिस्कल ईयर 2023 की चौथी तिमाही में फूड डिलीवरी इंडस्ट्री में कमजोरी बनी रहेगी। लेकिन ऐसी कोई वजह नहीं है कि अगले दो से तीन साल में इस सेक्टर की ग्रोथ 15 फीसदी से कम रहे। प्रति व्यक्ति इनकम बढ़ने के साथ ही एनुअल यूजर्स धीरे धीरे मंथली यूजर्स में तब्दील होते जाएंगे।"

    HSBC ने कहा कि हम एकबार फिर यह दोहरा हैं कि भारत में फूड डिलीवरी बिजनेस किसी भी तरह से फूड सर्विस इंडस्ट्री से पलायन नहीं है। यह सिर्फ घर के बने खाने से एक शिफ्ट है।

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