E-Waste: स्मार्टफोन और लैपटॉप का एक ही हो सकता है चार्जर, सरकार कर रही है बड़ी तैयारी

सरकार स्मार्टफोन और टैबलेट जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए एक ही चार्जर लाने की संभावनाएं तलाश रही है। इस पर चर्चा करने के लिए 17 अगस्त को इंडस्ट्री की बैठक बुलाई गई है

अपडेटेड Aug 10, 2022 पर 10:16 AM
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यूरोपीय संघ ने हाल ही में छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए साल 2024 तक यूएसबी-सी पोर्ट वाले कॉमन चार्जिंग मानक को लागू करने की घोषणा की है।

दुनिया भर में ई-वेस्ट (e-Waste) यानी ई-कचरा तेजी से बढ़ रहा है। इसमें कमी लाने के लिए सरकार ने कोशिश करनी शुरू कर दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में आपको स्मार्टफोन, टैबलेट समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए एक ही चार्जर काम करेगा। इसके लिए उपभोक्ता मंत्रालय (consumer ministry) ने 17 अगस्त को इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में चर्चा की जाएगी कि सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए एक चार्जर लागू करने में किस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है?

मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस मीटिंग में मोबाइल बनाने वाली कंपनियों और अन्य संगठनों को बुलाया गया है। अधिकारी ने आगे कहा कि अभी तक जो ढेर सारे चार्जर की व्यवस्था है। उसे खत्म करने की योजना है। इससे ई-कचरा में भी कमी आएगी।

यूरोपीय संघ ने लागू किए ये नियम


वहीं यूरोपीय संघ ने ई-कचरे में कमी लाने की तैयारी शुरू कर दी है। हाल में यूरोपीय संघ ने 2024 तक छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए एक यूएसबी- सी पोर्ट को अपनाने का नियम लागू करने की बात कही है। इसी तरह की योजना अमेरिका में भी बन रही है। अधिकारी ने कहा, अगर मोबाइल कंपनियां यूरोप और अमेरिकी बाजारों में एक चार्जिंग सिस्टम अपना सकती हैं, तो फिर वे ऐसा भारत में क्यों नहीं कर सकती हैं? स्मार्टफोन और टैबलेट जैसे पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में एक कॉमन चार्जर होना चाहिए।

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उन्होंने आगे कहा कि अगर भारत इस तरह के बदलाव के लिए जोर नहीं देता है तो इस तरह के उपकरणों को भारत में लाकर डंप किया जा सकता है। मौजूदा समय में किसी भी नए स्मार्टफोन या टैबलेट की खरीदारी के समय उपभोक्ताओं को अलग से चार्जर भी खरीदना पड़ता है। इसकी वजह यह है कि पुराना चार्जर नए उपकरण के साथ काम नहीं कर पाता है। बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics) और इलेक्ट्रिकल (Electrical) सामान जिसे खराब होने या ठीक से काम न करने पर फेंक दिया जाता है। उसे ई-कचरा कहते हैं।

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