दूर के इलाकों में भी फास्ट इंटरनेट, Elon Musk की Starlink इतने रुपये में देगी कनेक्शन

एलॉन मस्क (Elon Musk) की स्टारलिंक (Starlink) को भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन (SatCom) का लाइसेंस मिल गया है। अब देश में इसके लॉन्च का एक बड़ा रास्ता साफ हो गया है। स्टारलिंक को 15 से 20 दिनों में परीक्षण स्पेक्ट्रम मिल जाएगा। हालांकि अब लोगों की नजरें इस बात पर हैं कि इसकी सर्विसेज किस दाम पर मिलेंगी?

अपडेटेड Jun 09, 2025 पर 12:17 PM
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स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज के लिए लाइसेंस मिल चुका है। अब देखना ये है कि एलॉन मस्क (Elon Musk) की स्टारलिंक (Starlink) का अगला कदम क्या होगा। (File Photo- Pexels)

स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज के लिए लाइसेंस मिल चुका है। अब देखना ये है कि एलॉन मस्क (Elon Musk) की स्टारलिंक (Starlink) का अगला कदम क्या होगा। 15-20 दिनों में इसे परीक्षण स्पेक्ट्रम मिल जाएगा। लाइसेंस मिलने से भारत में इसके लॉन्च होने के रास्ते का एक बड़ा कांटा हट गया है। हालांकि अभी एक और अहम फैक्टर है जिस पर भारत में इसके आगे का रास्ता तय होगा कि इसकी सर्विसेज किस दाम पर मिलेंगी? पहले अनुमान लगाया गया था कि इसकी सर्विसेज ₹3,000-₹7,000 मासिक हो सकती है लेकिन अब एक हालिया मीडिया रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई कि प्रमोशन के तहत स्टारलिंक $10 से कम यानी करीब ₹850 हर महीने के भाव में अनलिमिटेड डेटा प्लान पेश कर सकती है।

शुरुआत लागत होगी इतनी

स्टारलिंक की सर्विसेज के लिए सिर्फ प्लान पर ही नहीं खर्च करना होगा बल्कि एक स्टारलिंक हार्डवेयर किट भी खरीदना होगा, हालांकि यह एक ही बार का खर्च होगा। इस किट में एक सैटेलाइट डिश और वाई फाई राउटर होगा। इस किट की कीमत ₹20000 से ₹35000 की हो सकती है। ध्यान दें कि यह अभी अनुमानित कीमत ही है और कंपनी ने इसकी भारत में कितनी कीमत होगी, इसे लेकर कंपनी ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है।


कंपनी को कितना देना होगा चार्ज?

टेलीकॉम नियामक TRAI (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने प्रशासनिक आवंटन की सिफारिश की है जिसमें कंपनियों को पांच साल तक अपने सालाना एडजस्टेड ग्रास रेवेन्यू (AGR) का 4% चुकाना होता है। खास बात ये है कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के लिए कोई एकमुश्त चार्ज नहीं है तो स्टारलिंक जैसी कंपनियों को वित्तीय तौर पर बड़ी राहत है। इसके अलावा सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियों को शहरों में हर सब्सक्राइबर पर सालाना ₹500 देना पड़ सकता है लेकिन डिजिटल गैप पाटने के उद्देश्य से गांवों में इस प्रकार के चार्जेज से राहत मिल सकती है।

क्या होगा Starlink की सैटेलाइट सर्विसेज से फायदा?

स्टारलिंक धरती की निचली कक्षा में महज 550 किमी ऊपर कुछ उपग्रहों को ऑपरेट करती है। चूंकि ये सैटेलाइट पारंपरिक जियोस्टेशनरी सैटेलाइट की तुलना में धरती से काफी नजदीक हैं तो यह तेज और कम लैटेंसी के साथ इंटरनेट सर्विसेज मुहैया कराती है। अभी यह 70 से अधिक देशों में सर्विसेज दे रही है और इसका लक्ष्य दूर-दराज के इलाकों और आपादा से प्रभावित इलाकों में सर्विसेज देना है। स्पेसएक्स पहले ही धरती की निचली कक्षा में दुनिया भर में करीब 7,000 सैटेलाइट्स तैनात कर चुकी है और अब का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 40,000 से अधिक करना है जिससे यह मुश्किल और दूर-दराज की जगहों पर भी फास्ट इंटरनेट सर्विसेज देना है।

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