अपनी किडनी बेचने कंबोडिया पहुंचे इंडोनेशिया के 122 लोग, ज्यादातर की Covid-19 के दौरान गई थी नौकरी, पुलिस ने बड़े गिरोह का किया भंडाफोड़
जकार्ता के DGP जनरल क्राइम हेंगकी हरयादी ने कहा, इंडोनेशियाई अधिकारियों ने 19 जुलाई को एक पुलिस अधिकारी और एक इमिग्रेशन अधिकारी समेत 12 लोगों को गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि पुलिस मानव अंगों का अवैध व्यापार करने वाले मानव तस्करी सिंडिकेट पर कार्रवाई जारी रखेगी। हरयादी ने कहा कि कारखाने के मजदूर, टीचर और अधिकारियों समेत सभी 122 पीड़ित इंडोनेशिया लौट आए हैं
इंडोनेशिया की पुलिस ने मानव अंगों की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का भांडाफोड़ किया, जिसमें पुलिस और इमिग्रेशन अधिकारी भी शामिल हैं
इंडोनेशिया (Indonesia) की पुलिस ने मानव अंगों की तस्करी (Human Organs Smuggling) करने वाले एक बड़े गिरोह का भांडाफोड़ किया, जिसमें पुलिस और इमिग्रेशन अधिकारी भी शामिल हैं। इन लोगों पर तस्करी के जरिए 122 इंडोनेशियाई लोगों को उनकी किडनी (Kidney) बेचने के लिए कंबोडिया के एक अस्पताल में भेजने में मदद करने का आरोप था। जकार्ता के DGP जनरल क्राइम हेंगकी हरयादी ने कहा, इंडोनेशियाई अधिकारियों ने 19 जुलाई को एक पुलिस अधिकारी और एक इमिग्रेशन अधिकारी समेत 12 लोगों को गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि पुलिस मानव अंगों का अवैध व्यापार करने वाले मानव तस्करी सिंडिकेट पर कार्रवाई जारी रखेगी।
हरयादी ने कहा कि कारखाने के मजदूर, टीचर और अधिकारियों समेत सभी 122 पीड़ित इंडोनेशिया लौट आए हैं। पुलिस अभी भी कई दूसरे पीड़ितों की तलाश कर रही है, जिनकी गवाही जांचकर्ताओं के लिए काफी जरूरी है।
उन्होंने कहा, "ज्यादातर पीड़ित वे लोग थे, जिनकी कोरोना महामारी के दौरान नौकरी चली गई थी और ये लोग पैसे के लिए अपनी किडनी बेचने को तैयार हो गए थे।" अधिकारी ने बताया कि इनमें 6 लोग अब भी डॉक्टरों की निगरानी में हैं।
संदिग्धों में से नौ आरोपी पहले भी अंग तस्करी के पीड़ित हैं। इन लोगों पर सोशल मीडिया के जरिए इंडोनेशिया भर के लोगों को कंबोडिया में पैसे के बदले किडनी बेचने के लिए लुभाने का आरोप है।
10वें संदिग्ध पर पीड़ित लोगों को किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह के प्रीह केट मीलिया अस्पताल में भेजने का आरोप है।
हर एक पीड़ित को 13.5 करोड़ इंडोनेशियाई रुपए मिलते थे
हरयादी ने कहा कि संदिग्धों के समूह की तरफ से 2019 के बाद से मानव अंगों के अवैध व्यापार का कारोबार लगभग 24.4 अरब इंडोनेशियाई रुपए था, जबकि हर एक पीड़ित को 13.5 करोड़ इंडोनेशियाई रुपए (13,275 डॉलर) देने का वादा किया गया था।
हरयादी ने कहा कि जकार्ता के पास बेकासी में एक लो-रैंकिंग पुलिस अधिकारी, बाली में एक इमिग्रेशन अधिकारी और 10 तस्कर एक मानव तस्करी गिरोह का हिस्सा थे, जो नौकरी चाहने वालों को अपना शिकार बनाते थे। इनमें से तीन आरोपियों को कंबोडिया में गिरफ्तार किया गया था।
बाली के इमिग्रेशन अधिकारी पर अपनी शक्ति का दुरुपयोग करने और पीड़ितों को विदेश यात्रा के लिए दस्तावेजों में हेरफेर करने का आरोप लगाया गया था। कंबोडिया में तस्करी करके लाए गए प्रत्येक व्यक्ति के लिए इस अधिकारी को कम से कम 30 लाख इंडोनेशियाई रुपए (295 डॉलर) मिलते थे।
संदिग्धों पर इंडोनेशिया के मानव तस्करी कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया और अधिकतम 15 साल की जेल और 60 करोड़ इंडोनेशियाई रुपए (59,000 डॉलर) तक का जुर्माना लगाया गया।
बेकासी सिटी पुलिस के पुलिस अधिकारी ने पुलिस जांच से बचने के लिए तस्करों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में मदद की थी, जिसके लिए उसे कथित तौर पर 61.2 करोड़ मलेशियाई रुपए (60,000 डॉलर) मिले। साथ ही उस पर जांच में रुकावट पैदा करने का भी आरोप है।
इंडोनेशिया के 2007 मानव तस्करी कानून के तहत, दोषी पाए जाने पर दोनों अधिकारियों को पांच साल तक की जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
इंडोनेशियाई राष्ट्रीय पुलिस के अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रभाग के प्रमुख कृष्ण मूर्ति ने कहा, "कंबोडिया के सरकारी प्रीह केट मीलिया अस्पताल में किडनी की तस्करी का लेनदेन हुआ है। हम कंबोडियाई पुलिस के साथ बातचीत कर रहे हैं और उनका सहयोग भी कर रहे हैं।"
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहली बार 1987 में मानव शरीर के अंगों को पैसे के बदले पर रोक लगाई थी। बाद में कई देशों ने इसे अपने राष्ट्रीय कानूनों में भी शामिल कर दिया था।
WHO ने 2008 में अनुमान लगाया था कि दुनिया भर में किए गए सभी प्रत्यारोपणों में से 5 प्रतिशत अवैध थे। अंगों की खरीद-फरोख्त में सबसे ज्यादा पैसे के बदले किडनी बेचने के मामले सामने आते हैं।
मानव अंगों के अवैध व्यापार के अलावा, साइबर क्राइम, मानव तस्करी और श्रम दुर्व्यवहार अभी भी दक्षिण-पूर्व एशिया में काफी गहराई से फैला है।
हाल ही में, फिलीपींस के अधिकारियों ने पिछले महीने एक बड़ी छापेमारी की और चीन, फिलीपींस, वियतनाम, इंडोनेशिया और एक दर्जन से ज्यादा दूसरे देशों के 2700 से ज्यादा श्रमिकों को बचाया, जिन्हें कथित तौर पर धोखाधड़ी वाली ऑनलाइन गेमिंग साइटों और दूसरे साइबर क्राइम ग्रुप के लिए काम करने के लिए ठगा गया था।
मई में, इंडोनेशिया के लाबुआन बाजो में एक शिखर सम्मेलन में दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ के नेताओं ने सीमा प्रबंधन, जांच, कानून प्रवर्तन और अभियोजन के साथ-साथ पीड़ितों के बचाव में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
उन्होंने यह भी आग्रह किया कि राष्ट्रीय रोकथाम प्रयासों में सुधार किया जाए, जिसमें बेहतर जन जागरूकता अभियान और एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाना शामिल है।