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Bangladesh Civil Unrest: पड़ोसी मुल्क में हालात नाजुक, देखते ही गोली मारने का ऑर्डर; हिंसा में अब तक 133 की मौत

Bangladesh Civil Unrest: विरोध प्रदर्शन के पीछे का कारण बांग्लादेश में वर्तमान सिविल सर्विस जॉब्स एलाकेशन सिस्टम है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने संकेत दिया है कि विवादास्पद कोटा सिस्टम को खत्म कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसा लगता है कि कड़ी कार्रवाई और बढ़ती मौतों के बीच अनुकूल फैसले से भी लोगों का गुस्सा कम नहीं होगा। मांग अब छात्रों के अधिकारों से आगे निकलकर मौजूदा सरकार के इस्तीफे तक पहुंच चुकी है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Jul 21, 2024 पर 12:37 PM
Bangladesh Civil Unrest: पड़ोसी मुल्क में हालात नाजुक, देखते ही गोली मारने का ऑर्डर; हिंसा में अब तक 133 की मौत
पुलिस के शांति कायम करने में विफल रहने के बाद अब सेना ने कमान संभाल ली है।

Bangladesh Unrest: बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा के चलते हालात बेहद नाजुक हो गए हैं। देश में कड़ा कर्फ्यू लगा है और 133 लोगों की मौत के बाद 'शूट ऑन साइट' यानि देखते ही गोली मारने का ऑर्डर निकल चुका है। हिंसा में अब तक हजारों लोग घायल हो चुके हैं। पुलिस के शांति कायम करने में विफल रहने के बाद अब सेना ने कमान संभाल ली है। शनिवार, 20 जुलाई को सैनिकों ने बांग्लादेश की राजधानी ढाका के कुछ हिस्सों में गश्त की।

अधिकारियों ने कहा कि कर्फ्यू का उद्देश्य सड़कों पर, और ढाका और अन्य शहरों के विश्वविद्यालय परिसरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद आगे की हिंसा को रोकना था। कर्फ्यू 20 जुलाई की मध्यरात्रि से शुरू हुआ और लोगों को आवश्यक काम निपटाने के लिए दोपहर 12 बजे से दोपहर 2 बजे तक ढील दी गई। इसके रविवार को समाप्त होने की उम्मीद है। बांग्लादेशी अधिकारियों ने मारे गए और घायल हुए लोगों की कोई आधिकारिक संख्या साझा नहीं की है।

बांग्लादेश में 18 जुलाई से इंटरनेट बंद है, जिससे बाहरी दुनिया में संपर्क काफी हद तक सीमित हो गया है। कई टेलीविजन समाचार चैनल भी बंद हो गए, और अधिकांश स्थानीय न्यूजपेपर्स की वेबसाइट्स बंद हैं। इस बीच, बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक और प्रधानमंत्री कार्यालय सहित कुछ प्रमुख सरकारी वेबसाइट्स को हैक कर लिया गया। विरोध प्रदर्शन के पीछे का कारण बांग्लादेश में वर्तमान सिविल सर्विस जॉब्स एलाकेशन सिस्टम है, जो आधे से अधिक पदों को विशिष्ट समूहों के लिए आरक्षित करता है। इन विशिष्ट समूहों में देश के पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के मुक्ति संग्राम में शामिल सैनिकों (वेटरन्स) के बच्चे भी शामिल हैं।

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