Birthright Citizenship Row: हजारों अप्रवासियों को बड़ी राहत देते हुए एक अमेरिकी जज ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जन्मजात नागरिकता समाप्त करने वाले कार्यकारी आदेश को अस्थायी रूप से रोक दिया है। जज ने गुरुवार को इसे 'स्पष्ट रूप से असंवैधानिक' करार दिया। 20 जनवरी को राष्ट्रपति के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती घंटों में ट्रंप ने एक आदेश पर हस्ताक्षर किया। इसमें घोषणा की गई है कि भविष्य में बिना दस्तावेज वाले अप्रवासियों के देश में पैदा होने वाले बच्चों को अब नागरिक नहीं माना जाएगा। यह आदेश देश में वैधानिक रूप से लेकिन अस्थायी रूप से रहने वाली कुछ माताओं के बच्चों पर भी लागू होगा।
ट्रंप के शासकीय आदेश में कहा गया है कि ऐसे गैर-नागरिकों के बच्चे अमेरिका के अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं हैं। इस प्रकार वे 14वें संशोधन की दीर्घकालिक संवैधानिक गारंटी के अंतर्गत नहीं आते हैं। ट्रंप के इस कदम से न केवल दुनिया भर से आए अवैध अप्रवासी प्रभावित होंगे। बल्कि भारत से आए छात्र और पेशेवर भी प्रभावित होंगे।
अमेरिकी जिला जज जॉन कफनौर ने इसे 'स्पष्ट रूप से असंवैधानिक' बताते हुए चार डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्योंवाशिंगटन, एरिजोना, इलिनोइस और ओरेगन के आग्रह पर एक अस्थायी आदेश जारी किया। इससे प्रशासन को आदेश लागू करने से रोका जा सके। यह घटनाक्रम ट्रंप द्वारा पदभार ग्रहण करने के पहले दिन कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करने के ठीक तीन दिन बाद हुआ है।
जज जॉन कफनौर ने कहा, "मुझे यह समझने में परेशानी हो रही है कि बार का कोई सदस्य स्पष्ट रूप से कैसे कह सकता है कि यह आदेश संवैधानिक है।" जज ने ट्रंप के आदेश का बचाव करने वाले अमेरिकी न्याय विभाग के वकील से कहा, "यह मेरे दिमाग को चकरा देता है।"
जज ने डोनाल्ड ट्रंप की नीति के बारे में कहा, "मैं चार दशकों से बेंच पर हूं। मुझे ऐसा कोई दूसरा मामला याद नहीं आता जहां पेश सवाल इस मामले जितना स्पष्ट हो। यह एक स्पष्ट रूप से असंवैधानिक आदेश है।"
84 वर्षीय कफनौर ने DOJ के वकील ब्रेट शुमेट से पूछा कि क्या शुमेट व्यक्तिगत रूप से मानते हैं कि यह आदेश संवैधानिक था। वाशिंगटन राज्य के सहायक अटॉर्नी जनरल लेन पोलोजोला ने सुनवाई के दौरान जज से कहा, "इस आदेश के तहत आज जन्म लेने वाले बच्चे अमेरिकी नागरिक नहीं माने जाएंगे।" न्याय विभाग के वकील ब्रेट शुमेट ने तर्क दिया कि डोनाल्ड ट्रंप की कार्रवाई संवैधानिक थी और इसे रोकने वाले किसी भी न्यायिक आदेश को "बेहद अनुचित" करार दिया।
कफनौर ने कहा कि उन्होंने अस्थायी प्रतिबंध आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। शुमेट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन अब जो तर्क दे रहा है, उस पर पहले कभी मुकदमा नहीं चला है। 14-दिवसीय अस्थायी प्रतिबंध आदेश जारी करने का कोई कारण नहीं था, जब कार्यकारी आदेश प्रभावी होने से पहले इसकी अवधि समाप्त हो जाएगी। न्याय विभाग ने बाद में एक बयान में कहा कि वह राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश का जोरदार बचाव करेगा।
भारतीय-अमेरिका सांसदों ने किया विरोध
भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने अमेरिका में पैदा हुए किसी भी व्यक्ति के लिए स्वत: नागरिकता के नियम में परिवर्तन संबंधी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासकीय आदेश का विरोध किया है। भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कहा कि शासकीय आदेश के माध्यम से जन्मजात नागरिकता के नियम में किए गए परिवर्तन से न केवल अवैध और गैर-दस्तावेज वाले अप्रवासियों के नवजात शिशुओं पर असर पड़ेगा। बल्कि H-1B वीजा पर वैध रूप से इस देश में रह रहे लोगों पर भी इसका असर पड़ेगा।
H-1B वीजा एक गैर-अप्रवासी वीजा है जो अमेरिकी कंपनियों को विशेष व्यवसायों में विदेशी कामगारों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। इसके लिए सैद्धांतिक या तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। टेक्नोलॉजी कंपनियां भारत और चीन जैसे देशों से हर साल हजारों कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए इस वीजा कार्यक्रम पर निर्भर रहती हैं।