BRICS में सऊदी अरब, ईरान सहित 6 नए देश होंगे शामिल, PM मोदी ने विस्तार का किया समर्थन

ब्रिक्स (BRICS) ग्रुप के नेताओं ने गुरुवार 24 अगस्त को सऊदी अरब, ईरान, इथियोपिया, मिस्र, अर्जेंटीना और संयुक्त अरब अमीरात सहित छह देशों को इस समूह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। इस कदम का उद्देश्य उस ब्रिक्स गुट का दबदबा बढ़ाना है, जिसने "ग्लोबल साउथ" को चैंपियन बनाने का वादा किया है

अपडेटेड Aug 24, 2023 पर 3:01 PM
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BRICS Summit: 40 से अधिक देशों ने ब्रिक्स में शामिल होने में रुचि दिखाई है

ब्रिक्स (BRICS) ग्रुप के नेताओं ने गुरुवार 24 अगस्त को सऊदी अरब, ईरान, इथियोपिया, मिस्र, अर्जेंटीना और संयुक्त अरब अमीरात सहित छह देशों को इस समूह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। इस कदम का उद्देश्य उस ब्रिक्स गुट का दबदबा बढ़ाना है, जिसने "ग्लोबल साउथ" को चैंपियन बनाने का वादा किया है। BRICS समूह में अभी पांच देश हैं- ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका। इन्हें ही संक्षेप में BRICS कहा जाता है। इन पांचों देशों के बीच समूह के विस्तार के पहले चरण पर आम सहमति बन गई है, जो 1 जनवरी, 2024 से लागू होगा।

फिलहाल 2023 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जोहान्सबर्ग के सैंडटन कन्वेंशन सेंटर में चल रहा है, जहां भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद हैं। दक्षिण अफ्रीका के अधिकारियों का कहना है कि 40 से अधिक देशों ने ब्रिक्स में शामिल होने में रुचि दिखाई है। वहीं 22 देशों ने औपचारिक रूप से इसमें शामिल होने के लिए कहा है।

ये संभावित उम्मीदवार एक अलग समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो बड़े पैमाने पर ग्लोबल स्तर पर कॉम्पिटीशन के लिए समान मौके चाहते हैं और उनमें से कई देशों का मानना हैं कि मौजूदा ग्लोबल संगठनों में उनके खिलाफ धांधली हुई है। वे ग्लोबल व्यवस्था को फिर से संतुलित करने के BRICS के वादे से आकर्षित हुए हैं।


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BRICS के विस्तार पर सहमति का ऐलान करते हुए, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा (Cyril Ramaphosa) ने कहा, "इस शिखर सम्मेलन ने ब्रिक्स, लोगों के बीच आदान-प्रदान, दोस्ती और सहयोग को बढ़ाने के महत्व की पुष्टि की। हमने जोहान्सबर्ग की दो घोषणाओं को अपनाया है, जो ग्लोबल आर्थिक, वित्तीय और राजनीतिक महत्व के मामलों पर ब्रिक्स के मुख्य संदेशों को दर्शाते हैं। यह उन साझा मूल्यों और सामान्य हितों को को भी दिखाता है, जो पांचों ब्रिक्स देशों के रूप में हमारे आपसी लाभकारी सहयोग का आधार हैं।"

इससे पहले बुधवार को भारत ने भी ब्रिक्स के विस्तार का समर्थन किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "7 साल बाद, हम कह सकते हैं कि ब्रिक्स का अर्थ- ब्रेक्रिंग बैरियर्स (बाधाओं को तोड़ना), रिविटलाइजिंग इकोनॉमीज (अर्थव्यवस्थाओं में नयी जान फूंकना), और शेपिंग द फ्यूचर(भविष्य को गढ़ना) होगा। ब्रिक्स के साझेदार देशों के साथ मिलकर हम इस नई परिभाषा को सार्थक बनाने में सक्रियता से योगदान देना जारी रखेंगे।"

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