वाइफ को मिले 1.11 करोड़ पाउंड डिविडेंड पर मुश्किल में ब्रिटिश फाइनेंस मिनिस्टर ऋषि सुनक, जानिए क्या है पूरा मामला

अक्षता की इंफोसिस में 0.93 फीसदी हिस्सेदारी है। इस हिस्सेदारी के एवज में उन्हें कंपनी से डिविडेंड मिला है। इंफोसिस में हिस्सेदारी की बदौलत अक्षता ब्रिटेन की सबसे अमीर महिलाओं में शामिल है

अपडेटेड Mar 28, 2022 पर 1:13 PM
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दुनिया की सबसे बड़ी कंसल्टेंसी कंपनियों में शामिल PWC और KPMG ने भी रूस में अपनी सेवाएं बंद कर दी है। लेकिन, इंफोसिस ने अब तक रूस में अपना कामकाज जारी रखा है।

व्यक्ति की किसी कंपनी में हिस्सेदारी हो सकती है। उसे कंपनी की तरफ से डिविडेंड लेने का भी हक है। फिर, ब्रिटेन के फाइनेंस मिनिस्टर ऋषि सुनक की पत्नी अक्षता मूर्ति को मिले डिविडेंड पर इतना बवाल क्यों मचा है? क्यों इस मामले को लेकर ऋषि सुनक की परेशानी बढ़ती जा रही है? इस मसले का रूस के क्या कनेक्शन है?

अक्षता से सुनक की शादी 2009 में हुई थी

ऋषि सुनक ब्रिटेन के फाइनेंस मिनिस्टर हैं। अक्षता से सुनक की शादी 2009 में हुई थी। उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति इंफोसिस के को-फाउंडर एन आर नारायणमूर्ति की बेटी हैं। उन्हें इंफोसिस की तरफ से 1.11 करोड़ पाउंड का डिविडेंड मिला है। ब्रिटेन के अखबार डेली मेल ने उसका खुलासा किया है। इसके बाद यह मामला गर्मा गया है। इसके चलते ब्रिटेन के फाइनेंस मिनिस्टर पर दबाव बढ़ गया है। उनसे कई तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं।


अक्षता को इंफोसिस से 1.1 करोड़ पाउंड डिविडेंड मिलने का खुलासा

डेली मेल ने अक्षता के बैंक अकाउंट में करोड़ों रुपये बतौर डिविडेंड पहुंचने का खुलासा किया है। यह पैसा इंफोसिस से उनके खाते में पहुंचा है। डेली मेल के एनालिसिस से यह पता चला है कि पिछले एक साल में इंफोसिस ने दो बार अक्षता का डिविडेंड दिया है। कुल मिलाकर उन्हें 1.11 करोड़ पाउंड का डिविडेंड मिला है। रुपया में यह रकम एक करोड़ रुपये से ज्यादा है।

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अक्षता की इंफोसिस में 0.93 फीसदी हिस्सेदारी

अक्षता की इंफोसिस में 0.93 फीसदी हिस्सेदारी है। इस हिस्सेदारी के एवज में उन्हें कंपनी से डिविडेंड मिला है। इंफोसिस में हिस्सेदारी की बदौलत अक्षता ब्रिटेन की सबसे अमीर महिलाओं में शामिल है। नारायणमूर्ति ने 1981 में इंफोसिस की स्थापना की थी। इस कंपनी में नारायण मूर्ती की पत्नी की भी हिस्सेदारी है। इंफोसिस इंडिया की सबसे बड़ी आईटी कंपनी में शामिल है। यह करीब 50 देशों में आईटी और कंसल्टेंसी सेवाएं देती हैं।

सुनक ने कंपनियों से रूस में कामकाज बंद करने की अपील की थी

दरअसल, सुनक की परेशानी की वजह यह है कि बतौर ब्रिटिश फाइनेंस मिनिस्टर उन्होंने खुद कंपनियों से रूस में अपना कामकाज बंद करने की अपील की है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देशों ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय देशों की कंपनियों ने रूस में अपना ऑपरेशंस बंद कर दिया है।

ये कंपनियां रूस में बद कर चुकी हैं काम

दुनिया की सबसे बड़ी कंसल्टेंसी कंपनियों में शामिल PWC और KPMG ने भी रूस में अपनी सेवाएं बंद कर दी है। लेकिन, इंफोसिस ने अब तक रूस में अपना कामकाज जारी रखा है। इस वजह से सुनक को निशाना बनाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि वह दूसरी कंपनियों को रूस में कामकाज बंद करने को कह रहे हैं। लेकिन, उनके घर में ही उनकी बातों की अनदेखी की जा रही है।

सुनक से पूछे जा रहे तीखे सवाल

दो दिन पहले ही स्काई न्यूज की प्रजेंटर जायने सेकर ने सुनक से इस बारे में तीखे सवाल पूछे थे। अब ब्रिटिश सांसद लियाम बायरने ने कहा है कि जब हम यूक्रेन के लोगों के साथ खड़े होने की अपनी जिम्मेदारी का पालन कर रहे हैं, तब इस तरह के मामले का सामने आना चिंता की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि पुतिन सरकार को हमें अलग-थलग करने की जरूरत है न कि उनसे फायदा उठाया जाना चाहिए।

सुनक के प्रवक्ता ने रविवार को कहा कि नारायणमूर्ति इंफोसिस से अक्टूबर 2014 में रिटायर हो चुके हैं। उसके बाद से उनका कंपनी से कोई नाता नहीं है। उसने यह भी कहा कि सुनक की पत्नी की तरह हजारों लोगों की इंफोसिस में हिस्सेदारी है। यह एक पब्लिक कंपनी है। सुनक की पत्नी या परिवार के किसी सदस्य का इस कंपनी के कामकाज से कोई नाता नहीं है।

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