China Coronavirus: कभी 'घातक वायरस', तो कभी 'कॉमन फ्लू', Covid-19 को लेकर चीन के कब-कब बदले स्वर
China Coronavirus: गिरगिट की तरह रंग बदलना भी कोई चीन की इस पूरी प्रोपेगेंडा मशीनरी से सीख सकता है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि जब कड़े विरोध के बाद शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने इस महीने की शुरुआत में अपनी जीरो कोविड पॉलिसी (Zero Covid Policy) में ढील दी, तो उनके सुर भी वैसे ही बदल गए
China Coronavirus: Covid-19 को लेकर चीन के कब-कब बदले स्वर (Moneycontrol Hindi)
China Coronavirus: महामारी (Pandemic) के दौरान, चीन (China) की सरकार और उसकी प्रोपेगेंडा मशीनरी (Propaganda Machinery) ने एक बेहद ही सरल, लेकिन बहुत पावरफुल मैसेज देने की कोशिश। बीजिंग (Beijing) हमेशा से ही ये कहता आया कि देश Covid-19 के पूरी तरह से खत्म करने के लिए अपनी लड़ाई में कोई ढील नहीं करेगा और पूरी शक्ति के साथ लगा रहेगा।
हालांकि, गिरगिट की तरह रंग बदलना भी कोई चीन की इस पूरी प्रोपेगेंडा मशीनरी से सीख सकता है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि जब कड़े विरोध के बाद शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने इस महीने की शुरुआत में अपनी जीरो कोविड पॉलिसी (Zero Covid Policy) में ढील दी, तो उनके सुर भी वैसे ही बदल गए।
चीन के सरकारी अधिकारियों से लेकर मेडिकल एक्सपर्ट्स तक ने अपने बयानों और शब्दों को एकदम बदल दिया।
खुद शी जिनपिंग ने महामारी की शुरुआत में कहा कि ये कोई ऐसा 'खतरनाक' वायरस नहीं है। ये एक कॉमन फ्लू से ज्यादा कुछ नहीं है और बिना किसी डर और दहशत के अर्थव्यवस्था को फिर से खोला जा सकता है।
Bloomberg की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे-जैसे वक्त बढ़ा, ठीक वैसे ही चीन का रुख भी बदलता गया। सरकार ने सभी नए केस की गिनती करना छोड़ दिया और कोरोना के कारण हुई मौत की क्लासिफिकेशन और कैटेगरी तक में भी बदलाव कर दिया।
चाइना मीडिया प्रोजेक्ट के रिसर्च प्रोग्राम के को-डायरेक्टर डेविड बंडरस्की ने कहा, "चीन में, तथ्यों को राजनीति में उलझा दिया जाता है।" उनका कहना है कि इसे आप ऐसे समझिए कि जैस-जैसे राजनीति बदलती है, ठीक वैसे है तथ्यों की समझ में भी बदलाव हो जाता है।
तो आइए एक नजर डालते हैं, चीन के अधिकारियों को उन बयानों पर, जो उन्होंने कोरोना महामारी की शुरुआत और बाद में दिए। साथ ही समझते हैं कि इन दोनों बयानों में कितना अंतर आया।
कोरोना कभी खतरनाक, तो कभी कॉमन कोल्ड फ्लू
तब
चीन के शीर्ष मेडिकल एडाइवजर झोंग नानशान ने 11 दिसंबर 2021 को ग्वांगझू में एक साइंस फोरम में कहा, "ओमिक्रॉन ने दुनिया को धीरे-धीरे एहसास कराया कि चीन का दृष्टिकोण सही था।"
अब
ली ने अब 9 दिसंबर कहा, "भले ही एसिम्पटोमेटिक लोगों से भी वायरस फैलता है, लेकिन वे बीमार मरीज नहीं हैं। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।"
तब
संक्रामक रोगों के डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट के लिए मुख्य सरकारी लेब के डायरेक्टर ली लंजुआन ने 30 मार्च, 2020 को कहा, "एसिम्पटोमेटिक लोग बहुत खतरनाक होते हैं, क्योंकि वे आमतौर पर न्यूक्लिक एसिड टेस्ट के लिए नहीं जाते हैं।" ये बात उन्होंने सरकारी न्यूज चैनल CCTV को दिए एक इंटरव्यू में कही थी।
अब
झोंग ने 15 दिसंबर को एक यूनिवर्सिटी लेक्चर में कहा, ओमिक्रॉन की मृत्यु दर केवल 0.1% है, जो मौसमी इन्फ्लूएंजा की तरह ही है और इसलिए ये कहा जा सकता है Covid-19 एक कॉमन कोल्ड फ्लू है।
तब
चीन के Covid-19 रिस्पांस की देखरेख करने वाले महामारी विज्ञानी से स्वास्थ्य अधिकारी बने लियांग वानियन ने 13 अक्टूबर को एक ब्रीफिंग में कहा, "अगर चीन दूसरे देशों की तरह ही Covid-19 के प्रति 'कोरे झूठ' के नजरिए को अपनाता है, तो इसका नतीजा चीन की आबादी में बड़े पैमाने पर संक्रमण का हमला होगा, जो अनिवार्य रूप से गंभीर से गंभीर बीमारी और मृत्यु का कारण बनेगा।" तब उन्होंने कहा, "यह चीन की संस्कृति और इसके एंटी कोविड फिलॉसफी के साथ असंगत है।"
अब
9 दिसंबर को पीपल्स डेली अखबार के साथ एक इंटरव्यू में लियांग ने कहा, "हमने पिछले तीन सालों में संक्रमण के लाखों मामले और लाखों मौतों को रोकने की जबरदस्त उपलब्धि हासिल की है।"
उन्होंने आगे कहा, "हमने आर्थिक विकास के साथ कोविड नियंत्रणों का बैलेंस बनाते हुए प्रभावी ढंग से लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की रक्षा की है। इन कोशिशों के जरिए, हमने ओमिक्रॉन के मामलों में जबरदस्त गिरावट देखी, प्रभावी वैक्सीन और दवाएं आईं, और महामारी पर हमारे रिस्पांस को और ज्यादा बेहतर बनाने का मौके पाने के लिए काफी समय तक इंतजार भी किया।"
वाइस प्रीमियर सन चुनलान ने 21 नवंबर को चोंगकिंग की यात्रा के दौरान कहा, "अर्थव्यवस्था और लोगों की डेली लाइफ पर वायरस के असर को कम करने के लिए नगर पालिकाओं को 'जोरी कोविड पॉलिसी' का पालन करने में "दृढ़" और "निर्णायक" होना चाहिए।"
अब
सन ने 30 नवंबर को बीजिंग में नेशनल हेल्थ कमीसन के साथ एक बैठक में कहा, "ओमिक्रॉन वैरिएंट कम घातक हो गया है। ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है और कोरोना की रोकथाम में हमारा अनुभव बढ़ा है। महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई एक नए चरण में है और इसमें कई नई चीजें भी जुड़ेंगी।" उन्होंने इस दौरान 'जोरी कोविड पॉलिसी' कहीं कोई जिक्र नहीं किया।
तब
जून के आखिर में वुहान की यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति शी ने जोरी कोविड पॉलिसी को चीन के लिए सबसे "आर्थिक और असरदार" नीति घोषित किया। उन्होंने कहा कि वायरस लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को चोट पहुंचा, ऐसा हम होने नहीं देंगे, इसके बजाय देश आर्थिक विकास पर पड़ने वाले कुछ अस्थायी असर को झेल लेगा।
Xinhua न्यूज एजेंसी के अनुसार, शी ने कहा, "हमारे देश में एक बड़ी आबादी है, इसलिए 'झूठ बोलने' वाली रणनीतियों से ऐसे परिणाम होंगे, जो किसी ने सोचे भी नहीं होंगे।"
उन्होंने कहा, "हमारे पास CCP का नेतृत्व है। हमारे पास जमीनी स्तर पर नींव की तरह मजबूत समुदाय हैं। हमारे पास जीत तक पहुंचने के लिए एक जबरदस्त क्लियरेंस पॉलिसी को लागू करने की क्षमता और ताकत है।"
अब
अब शी ने शिफ्ट के बारे में सार्वजनिक रूप से बात नहीं की है। 1 दिसंबर को दिए गए उनके बयान में बदलाव देखने को मिला, जब शी ने कहा कि चीन में Covid-19 का कम घातक ओमिक्रॉन स्ट्रेन ज्यादा फैला था।
उनकी भाषा में बदलाव के सबसे करीब 1 दिसंबर को यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल की टिप्पणी थी, जब शी ने कहा कि कम घातक ओमिक्रॉन संस्करण अब चीन में प्रचलित कोविड -19 तनाव था।