चीन में इनफ्लेशन (Inflation in China) लो लेवल पर बना हुआ है। इसकी वजह यह है कि इकोनॉमी रिकवर करने की कोशिश कर रही है। सरकार ने कोरोना के मामले बढ़ने से रोकने के लिए लॉकडाउन (lockdown) की सख्त पॉलिसी अपनाई थी। हालांकि, पिछले साल के आखिर में सरकार ने यह पॉलिसी बंद कर दी थी। लेकिन, लॉकडाउन से हुए नुकसान से इकोनॉमी अब भी उबरने की कोशिश कर रही है। मई में प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स में 4.6 फीसदी गिरावट आई। यह साल-दर-साल आधार पर बीते 7 साल में सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले मई 2016 में प्रोड्यूसर प्राइसेज में 7.2 फीसदी गिरावट देखने को मिली थी।
प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स में गिरावट
अप्रैल में प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स में 3.6 फीसदी की गिरावट आई थी। रायटर्स के पोल में इकोनॉमिस्ट्स ने मई में इसमें 4.3 फीसदी गिरावट का अनुमान जताया था। चीन में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स साल दर साल आधार पर मई में 0.2 फीसदी बढ़ा है। रायटर्स के सर्वे में शामिल इकोनॉमिस्ट्स ने इसके 0.3 फीसदी बढ़ने का अनुमान जताया था। अप्रैल में CPI 0.1 फीसदी था, जो दा साल का सबसे निचला स्तर है। महीने दर महीने आधार पर प्राइसेज में 0.2 फीसदी गिरावट आई। इकोनॉमिस्ट्स ने 0.1 फीसदी गिरावट का अनुमान जताया था।
चीन में हालात अमेरिका-यूरोप से बिल्कुल उलट
चीन में इनफ्लेशन का लेवल दुनिया के दूसरे देशों के इनफ्लेशन ट्रेंड के मुकाबले बिल्कुल उलट है। अमेरिका, यूरोप और इंडिया जैसी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इनफ्लेशन बढ़ने की वजह से परेशानी का सामना कर रही हैं। इसे कंट्रोल करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जा रही है। अमेरिकी केंद्र बैंक Federal Reserve बीते एक साल से इनफ्लेशन को बढ़ने से रोकने के लिए लगातार इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहा है। इस हफ्ते कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंकों ने उम्मीद के उलट इंटरेस्ट रेट बढ़ा दिए।
इकोनॉमी में डिमांड की स्थिति कमजोर
चीन में मई के इनफ्लेशन के डेटा से पता चलता है कि इकोनॉमी में डिमांड कम है। चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स ने इनफ्लेशन में कमी की वजह कमोडिटी की ग्लोबल कीमतों में नरमी और कमजोर डिमांड को बताया है। प्रोड्यूसर प्राइसेज में गिरावट में माइनिंग और रॉ मैटेरियल इंडस्ट्रीज का बड़ा हाथ रहा। फूड, टुबैको और अल्कोहल की कीमतों में तेजी दिखी।
इकोनॉमी पर मंडरा रहा डिफ्लेशन का खतरा
Pinpoint Asset Management के Zhiwei Zhang ने कहा, "डिफ्लेशन का रिस्क अब भी इकोनॉमी पर मंडरा रहा है। हाल में आए आंकड़े इकोनॉमी में कूलिंग का संकेत दे रहे हैं।" उन्होंने कहा कि सरकार की मॉनेटरी पॉलिसी अगले महीने दूसरी तिमाही के जीडीपी के डेटा के बाद आएगी। इनफ्लेशन के डेटा में नरमी के बावजूद चीन के मार्केट पर नजर रखने वाले एनालिस्ट्स लंबी अवधि में चीन की इकोनॉमी को लेकर आशावान दिख रहे हैं।
इनवेस्टर्स चीन को लेकर पॉजिटिव
एक एक्सपर्ट ने बताया कि इनवेस्टमेंट के लिहाज से चीन में थोड़े रिटर्न के साथ स्टैबिलिटी की उम्मीद दिख रही है। चीन की बड़ी कंपनियों के शेयरों की कीमतें अट्रैक्टिव दिख रही हैं। इनवेस्टर्स से यह पूछा गया कि वे चीन को लॉन्ग करना चाहेंगे या शॉर्ट। उनका जवाब था कि वे लॉन्ग करना पंसद करेंगे। हालांकि, आगे कुछ मुश्किलें दिख रही हैं लेकिन चीन की इकोनॉमी आगे अच्छा प्रदर्शन करेगी।