Credit Suisse Group का समय खराब चल रहा है। लेकिन, इसके एंप्लॉयीज के लिए अच्छी खबर है। उन्हें बोनस का पैसा मिलेगा। उनका इक्रीमेंट भी समय पर होगा। दरअसल, क्रेडिट सुइस ने कहा है कि उसके अधिग्रहण के बावजूद कामकाज पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा। क्रेडिट सुइस का अधिग्रहण UBS Group AG करने जा रहा है। अब तक दोनों बैंकों के बीच आपस में जबर्दस्त प्रतिस्पर्धा थी। अधिग्रहण से ठीक पहले क्रेडिट सुइस ने अपने एंप्लॉयी को मेल भेजा है। इसमें उसने कहा है कि 24 मार्च को एंप्लॉयीज को बोनस मिल जाएगा। एंप्लॉयीज की सैलरी पर भी अधिग्रहण का कोई असर नहीं पड़ेगा। मेल में यह भी कहा है कि कुछ देशों में क्रेडिट सुइस की इकाइयों में बोनस का पेमेंट हो चुका है।
3.3 अरब डॉलर में अधिग्रहण करेगा UBS
Silicon Valley Bank (SVB) के डूबने की खबर 10 मार्च को आई थी। इसके बाद अेमिरकी बैंकिंग सेक्टर में क्राइसिस बढ़ने की खबरें आई। फिर, यह संकट अमेरिकी की सीमा से बहर निकल यूरोप तक बढ़ गया। क्रेडिट सुइस सहित कुछ बैंक भी डूबने के करीब पहुंच गए। स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए रेगुलेटर्स और सरकार को आगे आना पड़ा। उनके हस्तक्षेप के बाद यूपीएस ग्रुप Credit Suisse का अधिग्रहण करने को तैयार हो गया है। इसके लिए वह 3.3 अरब डॉलर की कीमत चुकाने जा रहा है। यह डील पूरी तरह से शेयरों में होगी। इस डील को सरकार की गारंटी हासिल है।
2023 तक अधिग्रहण पूरा होने की उम्मीद
क्रेडिट सुइस ने चेयरमैन Axel Lehmann और सीईओ Ulrich Koerner ने एंप्लॉयीज से कहा है, "हमें पता है कि आप में से ज्यादातर लोग पिछले 48 घंटे में मीडिया में आई खबरों को देख रहे होंगे। इनमें क्रेडिट सुइस के फ्यूचर को लेकर कई तरह की बातें बताई गई हैं।" बैंक ने कहा है कि उसे कैश अवॉर्ड में किसी तरह के बदलाव की उम्मीद नहीं दिख रही है। एंप्लॉयीज से बैंक ने जो वादा किया है, उसे पूरी तरह पूरा किया जाएगा। हमें उम्मीद है कि यह विलय (यूपीएस में क्रेडिट सुइस का) 2023 के अंत तक पूरा हो जाएगा। इससे पहले हम उसी तरह से काम करते रहेंगे, जिस तरह हम पहले कर रहे थे। हमारा फोकस क्लाइंट्स को बेहतर सेवाएं देने पर होगा।
बैंकों पर क्या मंडरा रहा खतरा?
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद दुनियाभर में इनफ्लेशन तेजी से बढ़ा। इसे काबू में करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व सहित दुनिया के कई बड़े देशों के केंद्रीय बैंकों ने इंटरेस्ट बढ़ाने शुरू कर दिए। इसका सीधा असर बॉन्ड मार्केट पर पड़ा। बॉन्ड की कीमतें घटनी शुरू हो गईं। इससे उसकी यील्ड बढ़ गई। इससे बॉन्ड में ज्यादा इनवेस्ट करने वाले बैंक मुश्किल में फंस गए। 8 मार्च को सिलिकॉन वैली बैंक को बॉन्ड की बिक्री पर 1.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। इस खबर के बाद बैंक के इनवेस्टर्स और डिपॉजिटर्स में घबराहट फैल गई। आखिरकार रेगुलेटर्स ने 10 मार्च को इसे बंद करने का ऐलान कर दिया।