जानिए चीन में बैठे सरगना कैसे इंडिया में लोगों को सुसाइड के लिए कर रहे मजबूर

इन इंस्टैंट लोन ऐप ने इंडिया में अपना जाल तब फैलाया जब देश में लॉकडाउन था। स्कैमर्स उन लोगों की तलाश में थे, जिन्हें पैसे की सख्त जरूरत थी। लॉकडाउन की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी चली गई थी। कई लोगों की कमाई बहुत घट गई थी

अपडेटेड Aug 30, 2022 पर 1:56 PM
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जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इंस्टैंट लोन ऐप के काम करने के पीछे कई शातिर दिमाग हैं। सबकुछ चीन के नागरिकों की तरफ से किया जाता है, लेकिन जांच में वे बिल्कुल साफ तरीके से बच निकलते हैं।

इंस्टैंट लोन ऐप (Instant loan app) से कर्ज ले चुके कई लोगों के सुसाइड करने की खबरें कई राज्यों से मिली हैं। जांच में पता चला है कि इनमें से कई ऐप का संबंध चीन (China) और हांगकांग (Hong Kong) से है। कई चीनी नागरिकों और उनके इंडियन सहयोगियों की गिरफ्तारी के बावजूद ऐसे ऐप का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। ये ग्राहकों को पहले कर्ज के जाल में फंसाते हैं। फिर उनके समार्टफोन से डेटा चुराने के बाद उनसे बड़ी रकम की वसूली करते हैं।

इन इंस्टैंट लोन ऐप ने इंडिया में अपना जाल तब फैलाया जब देश में लॉकडाउन था। स्कैमर्स उन लोगों की तलाश में थे, जिन्हें पैसे की सख्त जरूरत थी। लॉकडाउन की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी चली गई थी। कई लोगों की कमाई बहुत घट गई थी। बड़ी संख्या में लोग आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे। इंस्टैंट लोन ऐप ने ऐसे लोगों को आसानी से अपना शिकार बनाया।

जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इंस्टैंट लोन ऐप के काम करने के पीछे कई शातिर दिमाग हैं। सबकुछ चीन के नागरिकों की तरफ से किया जाता है, लेकिन जांच में वे बिल्कुल साफ तरीके से बच निकलते हैं। इसकी वजह यह है कि वे इंडिया में अपना कोई निशान नहीं छोड़ते। दिल्ली पुलिस ने ऐसे एक मामले में करीब 150 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें कुछ फर्जी डायरेक्टर भी शामिल थे।


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दिल्ली पुलिस को जांच में पता चला कि चीन के कई नागरिक इन गिरफ्तार लोगों से ऐप के जरिए जुड़े हुए थे। इस ऐप का सर्वर सिंगापुर में था। डायरेक्टर्स को वहीं से काम से जुड़े निर्देश मिलते थे। कुछ मामलों में यह भी पाया गया कि पेरेंट कंपनियां चीन में ग्वांगझू, शेनजेन, बीजिंग जैसे शहरों में रजिस्टर्ड हैं।

जांच एजेंसियां 90 फीसदी मामलों में चीन के नागरिकों को गिरफ्तार करने में नाकाम रहीं। इसकी वजह इन ऐप के काम करने का कॉम्पलेक्स सिस्टम है। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे लोन ऐप की जांच का पहला मामला तेलंगाना पुलिस से जुड़ा है। तत्कालीन ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर अविनाश मोहंती ने बताया कि एक बेटिंग मामले की जांच के दौरान सबकुछ सामने आ गया।

मोहंती ने कहा, "बारीकी से जांच करने पर हमें पता चला कि एक लोन ऐप चीन के नागरिकों द्वारा चलाया जा रहा है। कुछ मामलों में हमने पाया कि लोगों को धमकी भरे फोन कॉल करने वाले लोग इंडोनेशिया में बैठे लोगों से निर्देश ले रहे थे। यह पूरा ऑपरेशन चीन के नागरिकों की तरफ से चलाया जाता है।"

चूंकि यह ऑपरेशन इंडिया के बाहर से चलाया जाता है जिससे जांच एजेंसियों की तरफ से जारी सर्कुलर नोटिस का फायदा तभी मिलता है जब मामले से जुड़े लोग इंडिया में हों। अगर उन्होंने इंडिया छोड़ दिया है तो फिर जांच एजेंसियों को इंटरपोल की मदद लेनी पड़ती है।

ओडिशा के पुलिस के डीआईजी जेएन पंकज ने बताया, "2019 में हमने चीन के नागरिक लियू वी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था। उसने कई कंपनियां बनाई थी, जिसके फर्जी डायरेक्टर्स बनाए गए थे। उसकी एक कंपनी से जुड़े ऐप के 1.5 लाख डाउनलोड्स थे। पेरेंट कंपनी Jianbing Technology चीन के हैंगझोऊ में थी। वह Omelette Technology का डायरेक्टर था। लेकिन, उसका नियंत्रण ऐसी कई दूसरी कंपनियों पर था, जिनके दर्जनों इंस्टैंट लोन ऐप थे।"

एक दूसरे मामले में दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया कि पैसे को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने के बाद दुबई भेजा गया। ये ऐप बेटिंग ऐप से भी जुड़े हुए हैं। मामले से जुड़े एक आरोपी ने बताया कि पहले उसने इन ऐप से लोन लेकर इनका शिकार बना। फिर, ऐप से जुड़ी कंपनी के लिए काम करने वाले कुछ लोगों ने उससे भी काम करने को कहा। काम शुरू करने के बाद उसे कुछ पैसे भी दिए गए।

चूंकि इन इंस्टैंट ऐप से जुड़ी कंपनियां और लोग रुपया को क्रिप्टोकरेंसी में बदल देते हैं, जिससे यह इंडियन फाइनेंशियल सिस्टम के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकता है। चीन के नागरिक अपना पैसा इनवेस्ट करते हैं और मिलने वाले फायदों को क्रिप्टोकरेंसी में कनवर्ट करते हैं। इस वजह से उन्हें पकड़ना मुश्किल होता है।

जांच में यह भी पता चला कि इन ऐप के सर्वर्स इंडिया से बाहर स्थित हैं। कॉल सेंटर्स स्टाफ लोगों को धमकी देने और पैसे वसूलने का काम करते हैं। वे अपनी आईडी से सिस्टम में लॉग-इन करते हैं। ये आईडी उन्हें उनके सीनियर की तरफ से दिए जाते हैं। तेलंगाना, ओडिशा, दिल्ली और महाराष्ट्र में गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ में पता चला कि उन्हें कैश में 12-15 हजार रुपये की सैलरी कैश में मिलती है। मामले से जुड़े चीनी नागरिकों के इंडिया में कोई बैंक अकाउंट नहीं थे।

पुलिस जांच में सामने आया कि चीन के इन नागरिकों ने कई देशों में कंपनियां बनाई हैं। इनमें इंडोनेशिया, श्रीलंका, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश शामिल हैं। जांच में यह भी पता चला कि उनका प्लान अफ्रीका और पश्चिमी देशों में भी अपना जाल फैलाने का है।

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