इजराइल और हमास के बीच इस समय भयानक जंग छिड़ी हुई है। इजराइल ने लगातार चौथे दिन गाजा पट्टी पर हमला करना जारी रखा है। इस बीच कई सारी मीडिया रिपोर्ट्स ऐसी भी निकल कर सामने आई हैं जिनमें इजराइल पर ऐसा आरोप लगाया जा रहा है कि वह घनी आबादी वाले इलाकों पर सफेद फास्फोरस वाले हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है। इजराइल ने गाजा पट्टी पर हमलों को तेज कर दिया है। इसके अलावा इजराइल ने गाजा के इलाके में पूरी तरह से नाकाबंदी भी लगा दी है।
गाजा में मारे जा चुके हैं सैंकड़ो लोग
इजराइल ने गाजा पर कई सारी एयर स्ट्राइल की है। जिसमें कि अभी तक 700 से भी ज्यादा लोगों की जानें गई हैं। सोशल मीडिया में फैल रही कई सारी फोटो और वीडियो में ऐसा दावा किया जा रहा कि इजराइल घनी आबादी वाले इलाकों में सफेद फॉस्फोरस को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब इजराइल पर इस तरह का आरोप लगा हो। इससे पहले साल 2008 और साल 2009 में भी इजराइल पर गाजा पट्टी के इलाके में सफेद फॉस्फोरस के जरिए हमला करने का आरोप लगा था। इजराइली सेना ने सपेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल करने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
मानवाधिकार रिपोर्ट्स में भी सामने आई बात
इसके अलावा कई सारी मानवाधिकार रिपोर्ट्स भी इस बात का दावा कर रही हैं कि इजराइल ने घनी आबादी वाले इलाकों में सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया है। साल 2009 में टाइम्स ऑफ लंदन की रिपोर्ट के मुताबिक नसेर हॉस्पिटल में 50 से भी ज्यादा लोग सफेद फॉस्फोरस की वजह से जलने के बाद भर्ती किए गए थे।
सफेद फॉस्फोरस एक काफी खतरनाक पदार्थ है। यह जैसे ही यह ऑक्सीजन के संपर्क में आता है तो यह जलने लगता है। इंसानों के लिए भी सफेद फॉस्फोरस से बना बम काफी खतरनाक साबित हो सकता है। इसे जहां भी इस्तेमाल किया जाता है वहां की पूरी ऑक्सीजन को यह सोख लेता है। यह तब तक जलता रहता जब तक कि यह पूरी तरह से खत्म ना हो जाए या वहां की ऑक्सीजन पूरी ना खत्म हो जाए। यह धुंए के गुबार की तरह हर तरफ फैल जाता है। इसके संपर्क में आने पर तेजी से जलन महसूस होती है और इससे मौत तक हो जाती है। युद्ध में दुश्मन के खिलाफ धुंए का कवर बनाने के लिए इसका काफी इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन रिहायशी इलाकों में इसका इस्तेमाल बैन है।